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Karnal News: 48 साल पुराने टिकरी विद्यालय की छत से टपक रहा पानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 01:18 AM IST
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Water is dripping from the roof of the 48 year old Tikri school
गगन तलवार
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करनाल। शहर से महज आठ किलोमीटर दूर टपराना गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का करीब 48 वर्ष पुराना भवन पूरी तरह जर्जर है। छत से पानी टपक रहा है। दीवारों पर हाथ लगाते ही रेत गिरने लगता है। इन कमरों में बोर्ड कक्षा की कॉमर्स की कक्षाएं लगती हैं। पढ़ाई के दौरान पुस्तक के पन्नों पर जब मिट्टी के कण दिखाई देते हैं तो बच्चे छत की ओर निगाह दौड़ाते हैं।

खेत के साथ लगती जर्जर दीवार के पास बने शौचालयों और कमरों में जाते समय विद्यार्थियों के अलावा शिक्षकों को भी डर लगता है। इस बरसाती मौसम में कई बार सांप और बिच्छू दिखाई दे चुके हैं। कुछ विद्यार्थी तो डर से इनमें जाते ही नहीं हैं। ऐसे खराब हालात पर स्कूल प्रबंधन की ओर से तीन बार जिला शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। विडंबना तो यह है कि गत वर्ष स्कूल की मांग पर नए कमरे बनाने के लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका था लेकिन इसे अभी तक रिलीज नहीं किया गया।
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खेल मैदान नहीं, लैब के नाम पर केवल कमरा

स्कूल में अलग से खेल मैदान नहीं हैं। ऐसे में विद्यार्थी ज्यादातर इंडोर गेम्स में हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा लैब के नाम पर महज एक साइंस रूम है। इसमें भी कक्षाएं लगती हैं। प्रिंसिपल क्षमा वर्मा का कहना है कि साइंस में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और अंग्रेजी लैब की जरूरत है। खेल मैदान के लिए ग्राम पंचायत से भी जगह देने का आग्रह किया था मगर सुनवाई नहीं हुई। स्कूल का सफाईकर्मी एवं चौकीदार भी मई माह में सेवानिवृत्त हो चुका है तब से सफाई और निगरानी का काम भी शिक्षक अपने स्तर पर कर रहे हैं।
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अंग्रेजी का महज एक शिक्षक
स्कूल में पहले अंग्रेजी के तीन शिक्षक थे। इनमें से दो शिक्षक पिछले दिनों पदोन्नति के बाद प्रिंसिपल बनकर चले गए। अब महज एक शिक्षक के सहारे छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। इससे स्कूल और कक्षा प्रभारी चिंतित हैं कि अंग्रेजी कौन पढ़ाएगा। सप्ताह में ऐसे भी कई दिन बीत जाते हैं, जब विद्यार्थियों का अंग्रेजी का पीरियड ही नहीं लगता। स्कूल में 372 के करीब विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। नियमित 22 और सात अनुबंधित शिक्षक कार्यरत हैं।



2019 में टिकरी से अलग हुआ था टपराना विद्यालय

2019 तक लगातार करीब चार दशक तक टिकरी में ही विद्यालय था। 2019 में सरकार के आदेश पर टपराना में स्कूल अलग बनाया गया। इसके बाद विद्यार्थियों की संख्या घट गई थी अब पांच वर्ष में शिक्षकों ने मेहनत करके फिर उतनी छात्र संख्या की है, जितनी दो गांवों की मिलाकर हुआ करती थी लेकिन सुविधाओं का अभाव बना है। शौचालय गंदे हैं। पीने के लिए सादा पानी है। लाइट न होने पर जनरेटर भी नहीं चलता। विद्यार्थी मजबूरी में गर्मी में बैठकर पढ़ाई करते हैं। 40 बैंच की भी कमी थी।



वर्जन

लंबित काम कराएंगे पूरा

स्कूल के नए भवन, पुस्तकालय और चहारदीवारी आदि बनाने के लिए करीब 40 लाख रुपये के बजट को गत वित्त वर्ष में स्वीकृति मिली थी। जो राशि हमारे पास आई थी, उसे जारी कर दिया गया। समग्र शिक्षा के तहत 75 फीसदी राशि ही पहले जारी होती है। जो काम लंबित है उसे पूरा कराएंगे।
- वीरेंद्र सिंह, एसडीई



वर्जन

स्कूल के एक खंड की हालत खराब

हम तीन बार पत्र लिख चुके हैं। पांच कमरों के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद भी नहीं मिली। स्कूल में कुछ कमरे गत वर्ष बने हैं। चहारदीवारी भी जर्जर हालत में है। अंग्रेजी शिक्षक का पद खाली है। अधिकारियों से मांग है कि स्कूल के जर्जर कमरों की जगह जल्द नए बनवाएं।

- क्षमा वर्मा, प्रिंसिपल, जीएसएसएस टिकरी



वर्जन

जिन स्कूलों के भवन कंडम हैं या चहारदीवारी सहित अन्य दिक्कते हैं, उन्हें चिह्नित कराया जा रहा है। इसके बाद उन्हें ठीक कराने की दिशा में कार्य शुरू हो जाएगा। हर वर्ष छोटे कार्यों व मरम्मत आदि के लिए भी बजट जारी होता है। बड़े कार्यों के लिए विशेष स्वीकृति की जरूरत पड़ती है।
- सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी
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