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Karnal News: बिगड़ रहा स्वर स्वास्थ्य... चीखने और अधिक बोलने से बचें
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मरीज को वॉइस डिओर्डर के बारे में जागरूक करते डॉ. जयवर्धन। अमर उजाला
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में तेज आवाज में अधिक बोलने, चिल्लाने और गले पर लगातार दबाव डालने की आदत अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले रही है। खासतौर पर युवाओं और बच्चों में वॉयस डिसऑर्डर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिविल अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला नागरिक अस्पताल में ईएनटी सर्जन डॉ. जयवर्धन ने बताया कि हर महीने औसतन 40 से 45 मरीज गले की समस्या के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पिछले तीन महीनों में ऐसे 130 से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं। वॉयस डिसऑर्डर ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की आवाज उसकी सामान्य आवाज से अलग हो जाती है। अगर आवाज अचानक बदल जाए, भारी हो जाए या लंबे समय तक ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए।
डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि गायक, शिक्षक और कॉल सेंटर जैसे पेशों से जुड़े लोग इसकी चपेट में अधिक आ रहे हैं। अधिक उपयोग करने के कारण उन्हें भी अपनी आवाज को ठीक कराने के लिए इलाज की जरूरत पड़ रही है।
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गले पर दबाव बन रहा बड़ी वजह
डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि लगातार तेज आवाज में बोलना, चिल्लाना या गले का अधिक इस्तेमाल करना स्वर तंतुओं (वोकल कॉर्ड) पर सीधा असर डालता है। इससे उनमें सूजन आ जाती है जो आगे चलकर वॉयस डिसऑर्डर का कारण बनती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है जबकि बच्चों में ज्यादा चिल्लाने की आदत उनके कोमल वोकल कॉर्ड को नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा प्रीमैच्योर नवजात शिशुओं या जिन बच्चों में तालु से जुड़ी दिक्कत होती है, उनमें भी यह समस्या अधिक पाई जाती है।
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ध्यान रखेंपर्याप्त पानी पिएं।
गले पर जोर न डालें (अधिक चिल्लाने से बचें)।
धूम्रपान से बचें।
गले को आराम दें।
(जैसा कि ईएनटी सर्जन डॉ. जयवर्धन ने बताया)
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1999 में पहली बार मनाया गया
विश्व आवाज दिवस हर साल 16 अप्रैल को मनाया जाता है। उद्देश्य मानव आवाज के अत्यधिक महत्व को रेखांकित करना, स्वर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आवाज से संबंधित समस्याओं के प्रति लोगों को सचेत करना है। इस दिवस की शुरुआत 1999 में ब्राजीलियाई सोसायटी ऑफ लैरींगोलॉजी एंड वॉयस द्वारा की गई थी।
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करनाल। जिले में तेज आवाज में अधिक बोलने, चिल्लाने और गले पर लगातार दबाव डालने की आदत अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले रही है। खासतौर पर युवाओं और बच्चों में वॉयस डिसऑर्डर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिविल अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला नागरिक अस्पताल में ईएनटी सर्जन डॉ. जयवर्धन ने बताया कि हर महीने औसतन 40 से 45 मरीज गले की समस्या के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पिछले तीन महीनों में ऐसे 130 से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं। वॉयस डिसऑर्डर ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की आवाज उसकी सामान्य आवाज से अलग हो जाती है। अगर आवाज अचानक बदल जाए, भारी हो जाए या लंबे समय तक ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए।
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डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि गायक, शिक्षक और कॉल सेंटर जैसे पेशों से जुड़े लोग इसकी चपेट में अधिक आ रहे हैं। अधिक उपयोग करने के कारण उन्हें भी अपनी आवाज को ठीक कराने के लिए इलाज की जरूरत पड़ रही है।
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गले पर दबाव बन रहा बड़ी वजह
डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि लगातार तेज आवाज में बोलना, चिल्लाना या गले का अधिक इस्तेमाल करना स्वर तंतुओं (वोकल कॉर्ड) पर सीधा असर डालता है। इससे उनमें सूजन आ जाती है जो आगे चलकर वॉयस डिसऑर्डर का कारण बनती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है जबकि बच्चों में ज्यादा चिल्लाने की आदत उनके कोमल वोकल कॉर्ड को नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा प्रीमैच्योर नवजात शिशुओं या जिन बच्चों में तालु से जुड़ी दिक्कत होती है, उनमें भी यह समस्या अधिक पाई जाती है।
ध्यान रखेंपर्याप्त पानी पिएं।
गले पर जोर न डालें (अधिक चिल्लाने से बचें)।
धूम्रपान से बचें।
गले को आराम दें।
(जैसा कि ईएनटी सर्जन डॉ. जयवर्धन ने बताया)
1999 में पहली बार मनाया गया
विश्व आवाज दिवस हर साल 16 अप्रैल को मनाया जाता है। उद्देश्य मानव आवाज के अत्यधिक महत्व को रेखांकित करना, स्वर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आवाज से संबंधित समस्याओं के प्रति लोगों को सचेत करना है। इस दिवस की शुरुआत 1999 में ब्राजीलियाई सोसायटी ऑफ लैरींगोलॉजी एंड वॉयस द्वारा की गई थी।