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गांव अभी तक जलमग्न, बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 02:27 AM IST
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Village still submerged, children sent to relatives' homes
करनाल। जिले में मानसून की भारी बारिश के बाद पांचवें दिन शनिवार भी धान के खेतों में जलभराव से राहत नहीं मिली। निसिंग क्षेत्र में खेतों की मेड़ से ऊपर से एक गांव से दूसरे गांव तक पानी लगातार आगे बढ़ रहा है। कई स्थानों पर पानी की निकासी के लिए सड़क तक तोड़नी पड़ी। दूसरी ओर शनिवार को दिन भर उमस व घुटन भरा वातावरण रहा। गर्मी ने हाल बेहाल कर दिया। मानसून की हवाएं फिर सक्रिय हो चुकी हैं। पूर्वानुमान है कि रविवार अलसुबह व दिन में बूंदाबांदी हो सकती है। सोमवार को जिले में कई जगहों पर अधिक वर्षा होने का पूर्वानुमान है। यदि फिर ज्यादा वर्षा हुई तो किसानों के लिए गंभीर संकट की स्थिति खड़ी हो जाएगी। कई इलाकों में धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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निसिंग क्षेत्र के गांव ब्रास, प्रेमखेड़ा, धौला कुआं, कुचपुरा व आसपास के गांवों के खेतों में जलस्तर कायम है। पांचवें दिन भी हालत नहीं सुधरी है। ब्रास गांव के किसान गुरचरण सिंह ने बताया कि शनिवार को जेसीबी से सड़क तोड़कर पानी निकासी शुरू की गई। इस गांव के समीप बरसाती ड्रेन भी जलमग्न है। पानी आगे निसिंग की तरफ बह रहा है। सौकड़ा गांव की तरफ भी सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न है। कुंजपुरा खंड के सलारपुरा, रिंडल के खेतों का पानी जयरामपुरा गांव के समीप से रास्ता बनाकर बड़ागांव की ओर बह रहा है। संगोही व कमालपुर गांव में सैकड़ों एकड़ खेत डूबे हुए हैं।
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दूसरे दिन भी पंपसेट लगाकर किसान पानी निकालने में जुटे रहे। संगोहा गांव के समीप इंद्री एस्केप ड्रेन में खेतों का पानी डाला जा रहा है। कमांडो कांप्लेक्स नेवल के समीप पंचायती जमीन में अभी भी कई फुट पानी खड़ा है। यह पानी कलवेहड़ी की ओर बह रहा है। पानी टकराने से एसएस इंटरनेशनल स्कूल की दीवार ढह चुकी है। नेवल गांव की पंचायती जमीन में कॉलोनी के सभी घर पानी से घिरे हुए हैं।
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यमुना में धनौरा एस्केप के दूषित पानी से फैली बदबू
करनाल। यमुना के अंदर बह रहे धनौरा एस्केप के दूषित पानी से आसपास के इलाके में बदबू फैल रही है। इस नाले में यमुनानगर की तरफ से दूषित पानी डाला जाता है। करनाल जिले में नबीपुर व खराजपुर गांव के समीप यमुना की ठोकर के साथ इसका पानी यमुना के शुद्ध पानी में मिल जाता है। किसानों का कहना है कि यमुना में पानी कम है। अभी किसी किसान की फसल खराब नहीं हुई। आगे यदि पहाड़ों से ज्यादा पानी आता है तो जलस्तर बढ़ जाएगा। आशंका के चलते लगातार यमुना की निगरानी की जा रही है।
नबीपुर गांव के किसान कमल कांबोज ने कहा कि धनौरा एस्केप नाले का दूषित पानी खराजपुर तक पहुंच गया है और यमुना के पानी में मिल रहा है। यह पानी इतना खतरनाक व केमिकल युक्त है कि फसलों को नष्ट कर देता है। भूजल को खराब करता है। आसपास बदबू उठ रही है। आशंका जताई जा रही है कि यमुना में जलस्तर बढ़ा तो नाले को दूषित पानी फसलों को चपेट में ले लेगा। दूसरी ओर नहरी विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय राहड का कहना है कि यमुना में जलस्तर नहीं है। अभी पीछे से पानी छोड़ने की भी कोई संभावना नहीं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
सिंघडा के घरों में पानी, बच्चों को भेजा रिश्तेदारी में
करनाल। तीन दिन लगातार हुई बारिश सिंघडा के लोगों के लिए आफत बन कर बरसी। उनके घरों में पानी इस कदर भर गया कि बच्चों को रिश्तेदारी में भेजने को मजबूर होना पड़ा। दूसरी ओर पानी की निकासी के लिए जो एकमात्र ड्रेन है, उसमें गांव का एक पक्ष निकासी नहीं करने दे रहा। इसकी शिकायत ग्रामीण कई बार अधिकारियों को कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया।
शनिवार को शिकायत लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे ग्रामीण विरेंद्र सिंह ने बताया कि भारी बारिश से घरों में पानी भर गया है। कमरों और रसोई तक पानी भरा है लेकिन गांव के एक पक्ष के विरोध की वजह से ड्रेन में निकासी नहीं हो पा रही। कई बार शिकायत के बाद शुक्रवार को निसिंग तहसीलदार, सिंचाई विभाग एसडीओ समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे लेकिन आश्वासन ही मिला समाधान नहीं। सभी ने जल्द ही समस्या का समाधान कराने की मांग की।
पानी निकासी का रास्ता नहीं होने पर दुकानदारों ने जताया रोष
तरावड़ी। जिस नाले को खोलने के बाद आधे शहर का पानी माइनर में डालने से राहत मिली थी, शनिवार फिर नहरी विभाग ने उसी नाले को आगे मिट्टी लगाकर बंद कर दिया। रेलवे रोड के दुकानदारों का कहना है कि इसके बंद करने से फिर उनके लिए खतरा पैदा हो सकता है। मानसून की पहली बारिश से ही दुकानों में करीब दो फीट पानी घुस गया था। दुकानदारों ने प्रदर्शन करते हुए निकासी व्यवस्था की मांग की।
रेलवे रोड के दुकानदार ज्ञान सिंह, राजकुमार मुंजाल, शामलाल, अशोक कुमार, पूर्ण चंद कश्यप, कुलदीप सिंह व राजेंद्र कुमार ने कहा कि नहरी विभाग ने कुछ माह पहले नाले का पानी माइनर में जाने पर रोक लगा दी थी। नाले के आगे कंक्रीट की दीवार बना दी थी और नाले के पानी को साथ से गुजर रहे सीवरेज मेनहोल में डाल दिया। मेनहोल का पाइप मात्र आठ से दस इंच का है। वर्षा होने पर सैकड़ों घरों के पानी की इससे एक साथ निकासी नहीं हो पाती। दुकानदारों ने जिला प्रशासन से मांग की कि बारिश के पानी की निकासी का उचित प्रबंध करवाए।
इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि एनजीटी के निर्देश के अनुसार नहरी विभाग ने नालों का पानी माइनर में डालने पर पाबंदी लगाई हुई है। इसलिए शहर में 32 जगह नालों का कनेक्शन सीवरेज में करने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पैसे दे रखे हैं। आरोप लगाया कि अब जो भी ढिलाई है वह जनस्वास्थ्य विभाग की है। उधर, जनस्वास्थ्य विभाग के उपमंडल अधिकारी अभिषेक का कहना है कि नगरपालिका ने 32 सीवरेज कनेक्शन के लिए 19 लाख रुपये का चेक दिया है, लेकिन इसके लिए 24 लाख की जरूरत है। जब तक नगरपालिका पांच लाख रुपये का अतिरिक्त चेक नहीं देगी तब तक टेंडर नहीं लगाया जा सकता। वहीं नहरी विभाग के उपमंडल अधिकारी करनैल सिंह का कहना है कि किसी भी कीमत पर नाले व बरसात के पानी को माइनर में डालने नहीं देंगे। यह एनजीटी के आदेश हैं और उनकी अवमानना नहीं की जा सकती।
बरसाती नाले की सफाई का कार्य शुरू
तरावड़ी। सिंचाई विभाग की ओर से शहर के बीच स्थित बरसाती नाले की सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। भारी बारिश के बाद शहर में उत्पन्न हुई जलभराव की स्थिति के बाद विभाग की नींद खुली है। पानी निकासी नहीं होने के कारण सड़कों पर पानी खड़ा हो गया था। इस कारण कस्बावासियों के लिए परेशानी खड़ी हुई।

यह नाला शहर के मध्य से गुजरता है। वर्षा के अलावा इसमें बारिश के पानी की निकासी होती है। नाले की सफाई नहीं होने के कारण यह कचरे से अटा पड़ा था। जिस वजह से बरसात का पानी सड़कों पर आ गया। इस बाबत विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुनील कुमार का कहना है कि बरसाती नाले में जहां जाम की समस्या है उसे ठीक करने के लिए मशीन लगाई है। सफाई कार्य करवाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान निकासी की दिक्कत न हो।
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