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Karnal News: सजा से कम नहीं अल्ट्रासाउंड जांच, अस्पताल में ही बितानी पड़ती है रात
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सिविल अस्पताल में अगर चिकित्सक ने मरीज को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिख दिया तो यह किसी सजा से कम नहीं है। कम से कम सिविल अस्पताल करनाल की व्यवस्था को देखकर तो यही लगता है, जहां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को केंद्र के बाहर ही रात गुजारनी पड़ती है। उसके बाद भी जरूरी नहीं कि जांच हो जाए। खास तौर से यहां गर्भवती महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
दरअसल, सिविल अस्पताल में प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 50 मरीजों को ही टोकन जारी किए जाते हैं। बाकी मरीजों को अगले दिन बुलाया जाता है। ऐसे में सुबह नौ बजे अल्ट्रासाउंड केंद्र खुलते ही महज 15 से 20 मिनट में टोकन खत्म हो जाते हैं। इसके बाद सिर्फ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड होते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवतियों को होती है। अमर उजाला टीम ने सिविल अस्पताल का नाइट लाइव किया, जहां अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर ही मरीज रातभर सोते मिले।
दृश्य-1
जमीन पर लेटी थी मंगलौरा की आयशा
रात के 11 बजे थे। अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर एक बच्चा खेल रहा था। पास ही उसकी मां जमीन पर चादर बिछाकर लेटी थी। आयशा गांव मंगलौरा की रहने वाली थी। उसने बताया कि वह दो माह की गर्भवती है। कुछ दिन से पेट में दर्द है। डॉक्टर को दिखाया तो पर्ची में अल्ट्रासाउंड की जांच लिख दी। उसने बताया कि सुबह सात बजे सिविल अस्पताल आई थी, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इससे पहले भी दो बार अल्ट्रासाउंड के लिए आ चुकी है, लेकिन कभी डॉक्टर नहीं मिलते तो कभी केंद्र में अधिक भीड़ रहती है। अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था। यही कारण है कि रात में ही अस्पताल आ गई, जिससे सुबह अल्ट्रासाउंड केंद्र खुलते ही जांच करा सके।
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दृश्य-2
ईंट के नीचे रख देते हैं पर्चियां
अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर एक ईंट रखी थी। इस ईंट के नीचे सात पर्चियां दबाकर रखी गई थीं। यहीं पास में गोशाला रोड निवासी दयाल सिंह मिले। उन्होंने बताया कि ईंट के नीचे उनकी पर्ची भी रखी है। बेटी गर्भवती है, लेबर वार्ड की डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है। दो दिन से वह अस्पताल आ रही है, लेकिन उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था, जिस वजह से वह रात में ही अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर आकर रुक गए, जिससे सुबह केंद्र खुलते ही नंबर लगा सकें। फिर बेटी को बुला लेंगे, जिससे अल्ट्रासाउंड हो जाए।
दृश्य-3
तीन दिन तक नंबर नहीं आया तो रात में आने को हुए मजबूर
यहां जुंडला निवासी रवि मिले, जो बीमार हैं। उन्हें भी डॉक्टर ने पर्ची में अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है। रवि ने बताया कि वह तीन दिन से लगातार अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल में आ रहे हैं, लेकिन उनका नंबर ही नहीं आता है। उन्होंने कहा कि जिस दिन अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है, उसी दिन हो जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। यही कारण है कि बीमार होने के बावजूद वे रात में यहां आ गए हैं, जिससे सुबह अल्ट्रासाउंड करा सकें।
वर्जन
अल्ट्रासाउंड केंद्र में ओपीडी स्लिप पर डॉक्टर के परामर्श पर सभी मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। मरीजों को अस्पताल में रात में आने की जरूरत नहीं है, सुबह टोकन लिए जा सकते हैं। एक दिन में जितने टोकन दिए जाते हैं, उनकी जांच होना निश्चित है।
- डॉ. रेणू चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल
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करनाल। सिविल अस्पताल में अगर चिकित्सक ने मरीज को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिख दिया तो यह किसी सजा से कम नहीं है। कम से कम सिविल अस्पताल करनाल की व्यवस्था को देखकर तो यही लगता है, जहां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को केंद्र के बाहर ही रात गुजारनी पड़ती है। उसके बाद भी जरूरी नहीं कि जांच हो जाए। खास तौर से यहां गर्भवती महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
दरअसल, सिविल अस्पताल में प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 50 मरीजों को ही टोकन जारी किए जाते हैं। बाकी मरीजों को अगले दिन बुलाया जाता है। ऐसे में सुबह नौ बजे अल्ट्रासाउंड केंद्र खुलते ही महज 15 से 20 मिनट में टोकन खत्म हो जाते हैं। इसके बाद सिर्फ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड होते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवतियों को होती है। अमर उजाला टीम ने सिविल अस्पताल का नाइट लाइव किया, जहां अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर ही मरीज रातभर सोते मिले।
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जमीन पर लेटी थी मंगलौरा की आयशा
रात के 11 बजे थे। अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर एक बच्चा खेल रहा था। पास ही उसकी मां जमीन पर चादर बिछाकर लेटी थी। आयशा गांव मंगलौरा की रहने वाली थी। उसने बताया कि वह दो माह की गर्भवती है। कुछ दिन से पेट में दर्द है। डॉक्टर को दिखाया तो पर्ची में अल्ट्रासाउंड की जांच लिख दी। उसने बताया कि सुबह सात बजे सिविल अस्पताल आई थी, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इससे पहले भी दो बार अल्ट्रासाउंड के लिए आ चुकी है, लेकिन कभी डॉक्टर नहीं मिलते तो कभी केंद्र में अधिक भीड़ रहती है। अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था। यही कारण है कि रात में ही अस्पताल आ गई, जिससे सुबह अल्ट्रासाउंड केंद्र खुलते ही जांच करा सके।
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ईंट के नीचे रख देते हैं पर्चियां
अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर एक ईंट रखी थी। इस ईंट के नीचे सात पर्चियां दबाकर रखी गई थीं। यहीं पास में गोशाला रोड निवासी दयाल सिंह मिले। उन्होंने बताया कि ईंट के नीचे उनकी पर्ची भी रखी है। बेटी गर्भवती है, लेबर वार्ड की डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है। दो दिन से वह अस्पताल आ रही है, लेकिन उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था, जिस वजह से वह रात में ही अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर आकर रुक गए, जिससे सुबह केंद्र खुलते ही नंबर लगा सकें। फिर बेटी को बुला लेंगे, जिससे अल्ट्रासाउंड हो जाए।
दृश्य-3
तीन दिन तक नंबर नहीं आया तो रात में आने को हुए मजबूर
यहां जुंडला निवासी रवि मिले, जो बीमार हैं। उन्हें भी डॉक्टर ने पर्ची में अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है। रवि ने बताया कि वह तीन दिन से लगातार अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल में आ रहे हैं, लेकिन उनका नंबर ही नहीं आता है। उन्होंने कहा कि जिस दिन अल्ट्रासाउंड की जांच लिखी है, उसी दिन हो जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। यही कारण है कि बीमार होने के बावजूद वे रात में यहां आ गए हैं, जिससे सुबह अल्ट्रासाउंड करा सकें।
वर्जन
अल्ट्रासाउंड केंद्र में ओपीडी स्लिप पर डॉक्टर के परामर्श पर सभी मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। मरीजों को अस्पताल में रात में आने की जरूरत नहीं है, सुबह टोकन लिए जा सकते हैं। एक दिन में जितने टोकन दिए जाते हैं, उनकी जांच होना निश्चित है।
- डॉ. रेणू चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल