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Karnal News: एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के दो संदिग्ध मरीज मिले, बढ़ी सतर्कता
Tue, 14 Mar 2023 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 14 Mar 2023 02:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। डेरा सिकलीगर में सोमवार को इन्फ्लूएंजा एच3एन2 के टाइप-सी श्रेणी के दो संदिग्ध मरीज मिले हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। दोनों मरीज पति-पत्नी हैं। उन्हें सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन ने दंपती का एक्सरे करवाया तो उनके फेफड़े में संक्रमण मिला। जिसके बाद अस्पताल की लैब ने सैंपल लिए और जांच के लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजा। जिसकी रिपोर्ट आने में 24 घंटे तक का समय लग सकता है।
एक सप्ताह से दोनों को था तेज बुखार
डेरा सिकलीगर निवासी 42 वर्षीय मरीज गुरुदेव ने बताया कि करीब एक सप्ताह से उसे और उसकी 38 वर्षीय पत्नी मीना को करीब एक सप्ताह से तेज बुखार था। कई दिनों से गांव के एक झोलाछाप और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा रहे थे, लेकिन दवा का असर कम होते ही फिर बुखार आ जाता है। सोमवार की सुबह वे दोनों घर में बेहोश होकर गिर पड़े, जिस पर परिजन उन्हें सुबह 10.30 बजे सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों मरीज ऑक्सीजन पर हैं। जिनके शरीर में ऑक्सीजन की अधिक कमी हो गई थी। जिसके वजह से वे बेहोश हो गए थे। दोनों के फेफड़े के एक्सरे करवाएं गए। जिनमें दोनों की रिपोर्ट में उनके फेफड़े में संक्रमण मिला है। संक्रमण मिलने के बाद उनके सैंपल लिए गए है। जिन्हें कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजा गया है।
टीबी और एचआईवी के भी लिए सैंपल
डॉक्टरों ने बताया कि फेपड़े में संक्रमण मिलने के बाद दोनों मरीजों के इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ टीबी व एचआईवी की भी जांच कराई गई। एचआईवी की जांच मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच के लिए कराया गया है।
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क्या है इन्फ्लूएंजा का टाइप-सी
इन्फ्लूएंजा के चार टाइप- ए, बी, सी और डी होते हैं। इनसे टाइप-सी में सामान्य तौर पर सर्दी-जुकाम के लक्षण ही होते हैं, लेकिन इनके साथ ही मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है।
वर्जन
दोनों मरीजों को सिविल अस्पताल के द्वितीय तल पर बने आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टर व स्टाफ को उनकी निगरानी के लिए लगाया गया है। दोनों के सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज में भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मरीजों को इन्फ्लूएंजा टाइप-सी के तहत इलाज दिया जा रहा है।
- डॉ. रेणू चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल, करनाल
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करनाल। डेरा सिकलीगर में सोमवार को इन्फ्लूएंजा एच3एन2 के टाइप-सी श्रेणी के दो संदिग्ध मरीज मिले हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। दोनों मरीज पति-पत्नी हैं। उन्हें सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन ने दंपती का एक्सरे करवाया तो उनके फेफड़े में संक्रमण मिला। जिसके बाद अस्पताल की लैब ने सैंपल लिए और जांच के लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजा। जिसकी रिपोर्ट आने में 24 घंटे तक का समय लग सकता है।
एक सप्ताह से दोनों को था तेज बुखार
डेरा सिकलीगर निवासी 42 वर्षीय मरीज गुरुदेव ने बताया कि करीब एक सप्ताह से उसे और उसकी 38 वर्षीय पत्नी मीना को करीब एक सप्ताह से तेज बुखार था। कई दिनों से गांव के एक झोलाछाप और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा रहे थे, लेकिन दवा का असर कम होते ही फिर बुखार आ जाता है। सोमवार की सुबह वे दोनों घर में बेहोश होकर गिर पड़े, जिस पर परिजन उन्हें सुबह 10.30 बजे सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों मरीज ऑक्सीजन पर हैं। जिनके शरीर में ऑक्सीजन की अधिक कमी हो गई थी। जिसके वजह से वे बेहोश हो गए थे। दोनों के फेफड़े के एक्सरे करवाएं गए। जिनमें दोनों की रिपोर्ट में उनके फेफड़े में संक्रमण मिला है। संक्रमण मिलने के बाद उनके सैंपल लिए गए है। जिन्हें कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजा गया है।
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टीबी और एचआईवी के भी लिए सैंपल
डॉक्टरों ने बताया कि फेपड़े में संक्रमण मिलने के बाद दोनों मरीजों के इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ टीबी व एचआईवी की भी जांच कराई गई। एचआईवी की जांच मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच के लिए कराया गया है।
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क्या है इन्फ्लूएंजा का टाइप-सी
इन्फ्लूएंजा के चार टाइप- ए, बी, सी और डी होते हैं। इनसे टाइप-सी में सामान्य तौर पर सर्दी-जुकाम के लक्षण ही होते हैं, लेकिन इनके साथ ही मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है।
वर्जन
दोनों मरीजों को सिविल अस्पताल के द्वितीय तल पर बने आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टर व स्टाफ को उनकी निगरानी के लिए लगाया गया है। दोनों के सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज में भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मरीजों को इन्फ्लूएंजा टाइप-सी के तहत इलाज दिया जा रहा है।
- डॉ. रेणू चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल, करनाल