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Karnal News: एक बेड पर दो जच्चा-बच्चा, संक्रमण का खतरा
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- नागरिक अस्पताल के प्रसूति कक्ष में सिर्फ 32 बेड, इनमें 57 गर्भवतियां व जच्चा-बच्चा भर्ती, बढ़ी परेशानी
अनुज शर्मा
करनाल। नागरिक अस्पताल के प्रसूति कक्ष में बेड की भारी कमी है। एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती करने पड़ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रसूति कक्ष में 32 बेड हैं। इनमें से 17 बेड जच्चा-बच्चा यानी पीएनसी के लिए और 15 गर्भवतियों यानी एएनसी के लिए हैं। वहीं 17 पीएनसी बेड में से भी 10 बेड सिजेरियन और सात बेड सामान्य डिलीवरी के लिए हैं। हालात ये हैं कि शनिवार को इन 32 बेडों पर 57 गर्भवतियां व जच्चा-बच्चा भर्ती की गई थीं।
प्रसूति कक्ष में भर्ती महिलाओं ने बताया कि बेड की कमी के कारण उन्हें और उनके बच्चों को आराम करने का मौका तक नहीं मिल रहा है। वहीं बच्चे को संक्रमण का खतरा भी रहता है। एक महिला ने बताया कि उसे डिलीवरी से पहले भर्ती होने पर भी बेड नहीं मिला और उसने पूरी रात बैठकर गुजारी। वहीं कई महिलाओं काे अस्पताल की तरफ से कंबल तक उपलब्ध नहीं कराए गए, जिस कारण उन्हें घर से कंबल मंगाना पड़ा। इसके अलावा कई महिलाओं को प्रसूति कक्ष में बेडों की कमी के चलते भर्ती होने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में गर्भवतियों के तीमारदार उन्हें भर्ती कराने के लिए प्रसूति कक्ष के कर्मियों के साथ बदसलूकी पर उतारू हो रहे हैं।
सामान्य और सिजेरियन के लिए ये नियम
कर्मचारियों ने बताया कि सामान्य डिलीवरी होने पर जच्चा-बच्चा को 48 घंटे के बाद छुट्टी देनी होती है। वहीं सिजेरियन डिलीवरी होने पर चार दिन जच्चा-बच्चा को निगरानी में रखने के बाद छुट्टी दी जाती है, लेकिन बेड की कमी के कारण सामान्य डिलीवरी के जच्चा-बच्चा को एक दिन के बाद और सिजेरियन डिलीवरी के जच्चा-बच्चा को दो से तीन दिन के अंदर छुट्टी देनी पड़ रही है।
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द्वितीय तल पर आईसीयू बनने के बाद आई दिक्कत
इससे पहले वर्ष 2023 की जनवरी में तत्कालीन सीएमओ डॉ. योगेश शर्मा ने गर्भवतियों की समस्या को देखते हुए सिजेरियन डिलीवरी प्रथम तल पर बने ओटी में करने का प्रावधान किया था और डिलीवरी के बाद उन्हें द्वितीय तल पर एक कमरा उपलब्ध कराया था। इससे प्रसूति कक्ष में सिर्फ सामान्य डिलीवरी होती थी, लेकिन अब द्वितीय तल पर आईसीयू बनने के कारण वह कमरा बंद कर दोबारा सिजेरियन डिलीवरी व जच्चा-बच्चा को प्रसूति कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया है। तब से यह समस्या बनी हुई है। जिस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
सर्दी में भी नहीं मिला कंबल
सोनम व अंशुल ने बताया कि वह 19 जनवरी को प्रसूति कक्ष में भर्ती हुई थी। 20 जनवरी को उसकी डिलीवरी हुई। कड़ाके की ठंड में अस्पताल से कंबल तक नहीं मिला। ऐसे में घर से उसके परिजनों ने कंबल लाकर दिया ताकि वह और उसका बच्चा ठंड से बचाव कर सके।
बेड की कमी बताई
सिमरन व रज्जी ने बताया कि उसकी 19 जनवरी को शाम के समय डिलीवरी हुई थी। जिसके बाद उसे एक अन्य जच्चा-बच्चा के साथ रख दिया। ऐसे में ठीक से न सो पाने के कारण उसने अलग बेड की मांग की तो बेड की कमी बताकर उसे टरका दिया।
द्वितीय तल पर आईसीयू की सुविधा देने के चलते सी-सेक्शन वाले जच्चा-बच्चा को भी अब प्रसूति कक्ष में ही शिफ्ट कर दिया गया था। वे सोमवार को अस्पताल का निरीक्षण करेंगे। जिसके बाद दोबारा सी-सेक्शन वाले जच्चा-बच्चा को द्वितीय तल पर एक कमरा देने का प्रयास किया जाएगा। जिससे प्रसूति कक्ष में गर्भवतियों व जच्चा-बच्चा को परेशानी न हो।
डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, करनाल
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अनुज शर्मा
करनाल। नागरिक अस्पताल के प्रसूति कक्ष में बेड की भारी कमी है। एक ही बेड पर दो-दो जच्चा-बच्चा भर्ती करने पड़ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रसूति कक्ष में 32 बेड हैं। इनमें से 17 बेड जच्चा-बच्चा यानी पीएनसी के लिए और 15 गर्भवतियों यानी एएनसी के लिए हैं। वहीं 17 पीएनसी बेड में से भी 10 बेड सिजेरियन और सात बेड सामान्य डिलीवरी के लिए हैं। हालात ये हैं कि शनिवार को इन 32 बेडों पर 57 गर्भवतियां व जच्चा-बच्चा भर्ती की गई थीं।
प्रसूति कक्ष में भर्ती महिलाओं ने बताया कि बेड की कमी के कारण उन्हें और उनके बच्चों को आराम करने का मौका तक नहीं मिल रहा है। वहीं बच्चे को संक्रमण का खतरा भी रहता है। एक महिला ने बताया कि उसे डिलीवरी से पहले भर्ती होने पर भी बेड नहीं मिला और उसने पूरी रात बैठकर गुजारी। वहीं कई महिलाओं काे अस्पताल की तरफ से कंबल तक उपलब्ध नहीं कराए गए, जिस कारण उन्हें घर से कंबल मंगाना पड़ा। इसके अलावा कई महिलाओं को प्रसूति कक्ष में बेडों की कमी के चलते भर्ती होने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में गर्भवतियों के तीमारदार उन्हें भर्ती कराने के लिए प्रसूति कक्ष के कर्मियों के साथ बदसलूकी पर उतारू हो रहे हैं।
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सामान्य और सिजेरियन के लिए ये नियम
कर्मचारियों ने बताया कि सामान्य डिलीवरी होने पर जच्चा-बच्चा को 48 घंटे के बाद छुट्टी देनी होती है। वहीं सिजेरियन डिलीवरी होने पर चार दिन जच्चा-बच्चा को निगरानी में रखने के बाद छुट्टी दी जाती है, लेकिन बेड की कमी के कारण सामान्य डिलीवरी के जच्चा-बच्चा को एक दिन के बाद और सिजेरियन डिलीवरी के जच्चा-बच्चा को दो से तीन दिन के अंदर छुट्टी देनी पड़ रही है।
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द्वितीय तल पर आईसीयू बनने के बाद आई दिक्कत
इससे पहले वर्ष 2023 की जनवरी में तत्कालीन सीएमओ डॉ. योगेश शर्मा ने गर्भवतियों की समस्या को देखते हुए सिजेरियन डिलीवरी प्रथम तल पर बने ओटी में करने का प्रावधान किया था और डिलीवरी के बाद उन्हें द्वितीय तल पर एक कमरा उपलब्ध कराया था। इससे प्रसूति कक्ष में सिर्फ सामान्य डिलीवरी होती थी, लेकिन अब द्वितीय तल पर आईसीयू बनने के कारण वह कमरा बंद कर दोबारा सिजेरियन डिलीवरी व जच्चा-बच्चा को प्रसूति कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया है। तब से यह समस्या बनी हुई है। जिस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
सर्दी में भी नहीं मिला कंबल
सोनम व अंशुल ने बताया कि वह 19 जनवरी को प्रसूति कक्ष में भर्ती हुई थी। 20 जनवरी को उसकी डिलीवरी हुई। कड़ाके की ठंड में अस्पताल से कंबल तक नहीं मिला। ऐसे में घर से उसके परिजनों ने कंबल लाकर दिया ताकि वह और उसका बच्चा ठंड से बचाव कर सके।
बेड की कमी बताई
सिमरन व रज्जी ने बताया कि उसकी 19 जनवरी को शाम के समय डिलीवरी हुई थी। जिसके बाद उसे एक अन्य जच्चा-बच्चा के साथ रख दिया। ऐसे में ठीक से न सो पाने के कारण उसने अलग बेड की मांग की तो बेड की कमी बताकर उसे टरका दिया।
द्वितीय तल पर आईसीयू की सुविधा देने के चलते सी-सेक्शन वाले जच्चा-बच्चा को भी अब प्रसूति कक्ष में ही शिफ्ट कर दिया गया था। वे सोमवार को अस्पताल का निरीक्षण करेंगे। जिसके बाद दोबारा सी-सेक्शन वाले जच्चा-बच्चा को द्वितीय तल पर एक कमरा देने का प्रयास किया जाएगा। जिससे प्रसूति कक्ष में गर्भवतियों व जच्चा-बच्चा को परेशानी न हो।
डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, करनाल