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इस वर्ष गर गाय का बनएंगे क्लोन, भैंसों में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक
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203: एनडीआरआई सभागार में आयोजित कार्यक्रम मे मौजूद वैज्ञानिक व छात्र को संबोधित करते डॉ एमएस चौह?
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में वर्ष 2022 में गिर गायों का क्लोन बनाया जाएगा। डिंब पिक-अप-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (ओपीयू-आईवीएफ) तकनीक का इस्तेमाल भैंसों में किया जाएगा। बकरी के दूध से पनीर बनाएंगे। भारतीय डेयरी गाय की नस्लों से अद्वितीय डेयरी उत्पादों की पहचान की जाएगी। घन जीवामृत (जैविक उर्वरक) का निर्माण और वितरण किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए डेयरी उत्पादों की दूध की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। भविष्य में किसानों की आय दोगुनी की जाएगी। उद्योग-संस्थान की भागीदारी पर जोर देंगे।
संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने शनिवार को डा. डी. सुंदरेसन भवन में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों को भावी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने पिछले वर्ष की उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा कि एनडीआरआई का यह शताब्दी वर्ष होगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-2021 के दौरान एनडीआरआई को लगातार पांचवीं बार सर्वश्रेष्ठ कृषि विश्वविद्यालय का खिताब मिला। इस वर्ष ओपीयू (आईवीएफ) तकनीक के संबंध में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बछड़ा मृत्यु दर घटकर केवल दो प्रतिशत रह गई है। एनडीआरआई ने दस प्रतिशत प्रोटीन युक्त उच्च प्रोटीन आइसक्रीम विकसित की है। संस्थान को विभिन्न बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं के तहत एक हजार लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। राजस्व के माध्यम से 300 लाख रुपये उत्पन्न हुए। पेटेंट 11 दाखिल किए गए। सात पेटेंट मंजूर किए गए और छह प्रौद्योगिकि यों का व्यावसायीकरण हुआ है।
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संस्थान ने जल संरक्षण के लिए वैश्विक जल पुरस्कार जीता। निदेशक को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी फेलोशिप से सहायता मिली। निदेशक को पी. भट्टाचार्य स्मृति पुरस्कार और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फेलो से सम्मानित किया गया। संस्थान का 18वां दीक्षांत समारोह वर्चुअल मोड में आयोजित किया और 458 छात्रों को डिग्री दी गई। प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने के लिए पहियों पर वाहन और दूध व जानवरों का परीक्षण शुरू किया गया। देसी गाय की नस्ल की क्लोनिंग शुरू की। वर्चुअल मोड़ में जनवरी से दिसंबर 2021 के दौरान 24 वेबिनार आयोजित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि यमुनानगर, पोंटासाहिब, यमकेश्वर (उत्तराखंड) और त्रिपुरा में संचालित अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) गतिविधियों, दवाओं, बीज, खनिज मिश्रण, भंडारण डिब्बे, पशु रबर मैट, बकरियों (25 संख्या) का प्रशिक्षण और वितरण किया। संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र में डेयरी फार्मिंग, बकरी, मछली, मधुमक्खी पर 29 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए और प्रशिक्षण में 681 प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र में जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाई शुरू की गई। जिससे 3500 किसान जुड़े। कोरोना प्रकोप से निपटने में मदद के लिए कोरोना टेस्टिंग मशीन और फ्री मास्क बांटे गए।
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संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने शनिवार को डा. डी. सुंदरेसन भवन में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों को भावी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने पिछले वर्ष की उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा कि एनडीआरआई का यह शताब्दी वर्ष होगा।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-2021 के दौरान एनडीआरआई को लगातार पांचवीं बार सर्वश्रेष्ठ कृषि विश्वविद्यालय का खिताब मिला। इस वर्ष ओपीयू (आईवीएफ) तकनीक के संबंध में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बछड़ा मृत्यु दर घटकर केवल दो प्रतिशत रह गई है। एनडीआरआई ने दस प्रतिशत प्रोटीन युक्त उच्च प्रोटीन आइसक्रीम विकसित की है। संस्थान को विभिन्न बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं के तहत एक हजार लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। राजस्व के माध्यम से 300 लाख रुपये उत्पन्न हुए। पेटेंट 11 दाखिल किए गए। सात पेटेंट मंजूर किए गए और छह प्रौद्योगिकि यों का व्यावसायीकरण हुआ है।
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संस्थान ने जल संरक्षण के लिए वैश्विक जल पुरस्कार जीता। निदेशक को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी फेलोशिप से सहायता मिली। निदेशक को पी. भट्टाचार्य स्मृति पुरस्कार और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फेलो से सम्मानित किया गया। संस्थान का 18वां दीक्षांत समारोह वर्चुअल मोड में आयोजित किया और 458 छात्रों को डिग्री दी गई। प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने के लिए पहियों पर वाहन और दूध व जानवरों का परीक्षण शुरू किया गया। देसी गाय की नस्ल की क्लोनिंग शुरू की। वर्चुअल मोड़ में जनवरी से दिसंबर 2021 के दौरान 24 वेबिनार आयोजित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि यमुनानगर, पोंटासाहिब, यमकेश्वर (उत्तराखंड) और त्रिपुरा में संचालित अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) गतिविधियों, दवाओं, बीज, खनिज मिश्रण, भंडारण डिब्बे, पशु रबर मैट, बकरियों (25 संख्या) का प्रशिक्षण और वितरण किया। संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र में डेयरी फार्मिंग, बकरी, मछली, मधुमक्खी पर 29 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए और प्रशिक्षण में 681 प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र में जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाई शुरू की गई। जिससे 3500 किसान जुड़े। कोरोना प्रकोप से निपटने में मदद के लिए कोरोना टेस्टिंग मशीन और फ्री मास्क बांटे गए।