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फिर धार्मिक नारों से गूंजा महापंचायत का मंच
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करनाल। मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत के दौरान लगे धार्मिक नारों पर मचे बवाल के बाद एकबार फिर करनाल में किसानों ने धार्मिक एकता के नारे बुलंद किए। महापंचायत में नेताओं ने वाहे गुरु का खालसा, वाहे गुरु दे फतेह के साथ ही अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे भी लगवाए।
राकेश टिकैत की ओर से मुजफ्फरनगर महापंचायत में अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे लगवाने के बाद राजनीतिक दलों में बहस छिड़ गई थी। इस कारण मुजफ्फरनगर महापंचायत को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की भी आरोप लग रहे थे।
ऐसे में करनाल महापंचायत में भी किसान नेताओं ने एकबार फिर जोरशोर से वाहे गुरु का खालसा, वाहे गुरु दे फतेह के साथ ही अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे लगाए। यही नहीं नेताओं ने किसानों में जोश भरने के लिए जय जवान, जय किसान, हमसे जो टकराएगा के साथ इंकलाब जिंदाबाद के भी नारे लगाए। वहीं गीत और कविताओं की पक्तियों से भी महापंचायत में जुटे आंदोलनकारियों में जोश भरा। उत्साह इतना था कि महापंचायत के बाद लघु सचिवालय कूच को प्रदर्शनकारी आजादी की लड़ाई करार दे रहे थे।
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राकेश टिकैत की ओर से मुजफ्फरनगर महापंचायत में अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे लगवाने के बाद राजनीतिक दलों में बहस छिड़ गई थी। इस कारण मुजफ्फरनगर महापंचायत को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की भी आरोप लग रहे थे।
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ऐसे में करनाल महापंचायत में भी किसान नेताओं ने एकबार फिर जोरशोर से वाहे गुरु का खालसा, वाहे गुरु दे फतेह के साथ ही अल्लाह-हू-अकबर और हर-हर महादेव के नारे लगाए। यही नहीं नेताओं ने किसानों में जोश भरने के लिए जय जवान, जय किसान, हमसे जो टकराएगा के साथ इंकलाब जिंदाबाद के भी नारे लगाए। वहीं गीत और कविताओं की पक्तियों से भी महापंचायत में जुटे आंदोलनकारियों में जोश भरा। उत्साह इतना था कि महापंचायत के बाद लघु सचिवालय कूच को प्रदर्शनकारी आजादी की लड़ाई करार दे रहे थे।
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