फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   The well in which Nanak had bathed, he still sits in the city of Karna

जिस कुएं में नानक ने किया था स्नान, वह आज भी कर्ण नगरी में विराजमान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Nov 2022 02:12 AM IST
विज्ञापन
The well in which Nanak had bathed, he still sits in the city of Karna
गुरुद्वारा मंजी साहिब। संवाद
गगन तलवार
विज्ञापन

करनाल। सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव 507 साल पहले कर्ण नगरी आए थे। अपने करनाल प्रवास के दौरान गुरु जी ने जिस खुई (कुएं) पर स्नान किया था। उससे आज भी पवित्र जल निकलता है। इस जल से श्रद्धालु स्नान करते हैं और मन की मुरादें पाते हैं। कई दिन तक ठठियारा मोहल्ले में प्रवास कर गुरु जी ने आम जन को जनकल्याण का संदेश दिया था।
ठठियारा मोहल्ले के जिस बगीचे में गुरु जी ने डेरा डाला था, आज उसी जगह पर गुरुद्वारा मंजी साहिब पहली पातशाही बना है। सर्राफा बाजार स्थित यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा संगत की आस्था का केंद्र है। इस पवित्र स्थल पर गुरु अमर दास, गुरु हरकिशन और बाबा बंदा बहादुर भी आ चुके हैं। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी अमृतपाल सिंह और प्रधान बलकार सिंह के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने इस जगह से लोगों को शांति, सद्भाव कायम करने और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की उन्होंने राह दिखाई। उनके समय का कुआं आज भी यहां बने गुरुद्वारा में विराजमान है। बोहली साहिब के नाम से जानी जाने वाली खुई को गुरु नानक देव जी की चरण छू प्राप्त है। गुरुद्वारे में संगत के ठहरने की भी पूरी व्यवस्था है। दूर-दराज से संगत माथा टेकने के लिए पहुंचती है।
विज्ञापन

पहली उदासी के अंतिम चरण में हुआ था गुरु जी का आगमन
गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी अमृतपाल सिंह और प्रधान बलकार सिंह के अनुसार, अपनी चार उदासी में से पहली उदासी (धार्मिक यात्रा) के अंतिम चरण में गुरु नानक देव जी श्यामन (शाम गढ़) से होते हुए सितंबर 1515 में करनाल पहुंचे थे। यहां वे ठठियारा मोहल्ले के उस बगीचे में रुके। उस समय करनाल पर अब्बू अली शाह कलंदर का काफी प्रभाव था। शहर के लोग गुरु नानक देव जी के दर्शनों को आने लगे। इस बात का सैय्यद मुबारक अली शाह को पता चला तो उसने अपने पीर अब्बू अली शाह कलंदर को इसकी सूचना दी। गुरु नानक देव जी के प्रभाव की कहानी सुनकर वे तिलमिला गए और करामात करने लगे। जब उन्होंने देखा कि उनकी करामातों का असर गुरु नानक देव पर नहीं हो रहा है तो वे अपनी करामातों को छोड़कर पैदल चलकर गुरु जी के पास आए। यहां गुरु नानक देव जी ने पीर अब्बू अली शाह कलंदर को भी उपदेश दिया और दुनिया की भलाई के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

1709 में यहीं से स्थापित हुआ था जमींदारा राज
गुरु नानक देव जी के बाद इस पवित्र स्थान पर गुरु हरकिशन साहिब दिल्ली जाते हुए 1663 ई में आए थे। तीसरे पातशाह गुरु अमर दास जी भी इस पवित्र स्थान पर आ चुके हैं। 1709 ई में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने करनाल शहर को फतेह करके यहां जमींदारा राज स्थापित किया था। प्रधान और हेडग्रंथी के अनुसार, सभी गुरुओं की याद में ही यहां गुरुद्वारा स्थापित हुआ। शहर के मुख्य बाजार में स्थापित गुरुद्वारा में सुबह शाम गुरबाणी का पाठ और कीर्तन होता है। रोजाना श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।

गुरुद्वारा मंजी साहिब का बोहली साहिब। संवाद

गुरुद्वारा मंजी साहिब का बोहली साहिब। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed