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इंसान के जीवन में बढ़ रही लोभ की प्रवृत्ति : साध्वी जयंती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2024 06:20 AM IST
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The tendency of greed is increasing in human life: Sadhvi Jayanti
- श्रीराम कथा के माध्यम से बताई रामायण की महिमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से हुडा मैदान सेक्टर-13 में श्रीराम कथा आयोजित की जा रही है। जिसमें कथा व्यास साध्वी जयंती भारती ने रामायण की महिमा बताते हुए कहा कि कैकेयी मंथरा के विचारों में फंस कर महाराज दशरथ श्रीराम को वनवास व भरत को राज्य अभिषेक कर देते हैं। देखते ही देखते राजभवन की खुशियों से भरा वातावरण कुछ ही पलों में मातम में बदल जाता है।
उन्होंने कहा कि कैकेयी ने श्रीराम को पराया मान वन भेज दिया व भरत को अपना समझ सिंहासन मांग लिया। यहां अपने पराये का मंत्र उसे मंथरा से मिला। यही मंत्र आज घर-घर में भी चल रहा है कि यह अपना है वो पराया है परंतु आज तक इंसान यह नहीं समझ पाया कि अपना कौन है व पराया कौन है। इस नश्वर संसार को इंसान अपना समझ रहा है परंतु वह ईश्वर जिसने इंसान को जीवन दान दिया, जो शक्तिरूप में उसके भीतर रहता है, जो उसका वास्तविक साथ निभाने वाला है, जो उसका अपना है उसे ही पराया समझ लिया। जब व्यक्ति के जीवन में लोभ की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, ईष्या रूपी मंथरा घर कर लेती है तो वह हमारे जीवन में राम को कोसों दूर कर देती है।
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जयंती भारती ने बताया कि प्रभु श्रीराम केवट के पास जाकर उससे नौका की मांग करते हैं तो केवट बिना किसी परिचय के ही प्रभु श्रीराम कोे पहचाना जाता है क्योंकि केवट के पास वह दिव्य दृष्टि थी, उसके पास संतों के द्वारा प्राप्त ब्रह्म ज्ञान था जिससे प्रभु के वास्तविक स्वरूप का बोध हो जाता है। साध्वी ने बताया कि परमात्मा देखने का विषय है, उसे पहले देखा जाता है और फिर ही उसके बारे में व्याख्यान किया जा सकता है।
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आज लोग धन, विद्वता या बल के आधार पर प्रभु को प्रसन्न करना चाहते हैं जो कि रेत से तेल निकालने वाली बात है। कहने का भाव यह है कि यह असंभव है। प्रभु तो प्रेम के वशीभूत हो प्रभु श्रीराम गरीब, अनपढ़ और निर्बल केवट के पास खिंचे चले आए केवट अपने विवेक और बुद्धि से प्रभु के चरण पखारता है और प्रभु को अपनी नौका मैं बिठा कर गंगा पार ले जाता है। इस मौके पर गौतम शर्मा प्रधानाचार्य, श्री रामचरित मानस स्कूल, अजय कुमार, मनोज कुमार, तरुण कक्कड़, श्याम लाल, डॉ. बीर सिंह व दुली चंद मौजूद रहे।
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