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Karnal News: जिले में 55,431 निरक्षरों को साक्षर बनाने का था लक्ष्य, 13,037 शेष

Mon, 23 Feb 2026 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 23 Feb 2026 12:43 AM IST
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The target was to make 55,431 illiterates literate in the district, 13,037 remaining
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिले में चल रही उल्लास योजना (समग्र साक्षरता अभियान) की प्रगति अपेक्षित नहीं है। वर्ष 2025-26 के लिए तय किए गए 55,431 निरक्षर व्यक्तियों को साक्षरता कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य था। अभी 13,037 लोगों का पंजीकरण शेष है।

सर्वे करने पर भी जिले में निरक्षर नहीं मिल रहे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर संख्या निर्धारित की गई है। अब 15 वर्ष बीत चुके हैं। महिलाओं और बुजुर्गों तक सूचना पहुंचाने के लिए अब आंगनबाड़ी, स्वयंसेवी समूहों और पंचायत स्तर के माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
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छूटे हुए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए ग्राम स्तर पर दोबारा सर्वे कराया जा रहा है। योजना को गति देने के लिए शिक्षक स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है। हर स्कूल में एक शिक्षक को 30 से 40 निरक्षर ढ़ूंढ़ने का लक्ष्य दिया गया है। हर महीने लक्ष्य बढ़ा दिया जाता है। पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से ऐसे परिवारों की सूची तैयार की जा रही है, जहां अब भी निरक्षर वयस्क मौजूद हैं। इस बार सर्वे को अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया गया है ताकि वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें।
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- ऐसे किया जाता है सर्वे

डीएमएस सुमित ने बताया कि निरक्षरों को ढूंढ़ने के लिए हर स्कूल से दो-दो शिक्षकों को सर्वेयर बनाया गया है। शिक्षक आंगनबाड़ी में संपर्क करते हैं। वहां से पंचायतों को संपर्क किया जाता है जिनसे निरक्षरों की पहचान करने करने के निर्देश दिए जाते हैं।

60 सामाजिक चेतना केंद्र
निरक्षरों को पढ़ाने के लिए जिले में 60 सामाजिक चेतना केंद्र बनाए गए हैं। ये केंद्र सरकारी स्कूलों या पंचायतों भवनों में बनाए गए हैं। निरक्षरों की वर्ष में दो बार परीक्षा ली जाती है। इस बार परीक्षा मार्च के अंतिम दिनों में ली जाएगी। पिछली परीक्षा सितंबर में ली गई थी। परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर साक्षरता का प्रमाणपत्र दिया जाता है।
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