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Karnal News: कभी बेटियों को मारने वाला कहा जाता था प्रदेश, आठ साल में बचाई 30 हजार बच्चियां

Sat, 11 Mar 2023 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 11 Mar 2023 02:36 AM IST
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The state was once called the killer of daughters, saved 30,000 girls in eight years
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एक समय था जब हरियाणा को बेटियों को मारने वाला प्रदेश कहा जाता था।अब तस्वीर बदल चुकी है । सरकार की पहल और संस्थाओं के सहयोग के कारण लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है।आठ वर्ष में देश में 30 हजार से ज्यादा बच्चियों की भ्रूण हत्या होने से बची है। मुख्यमंत्री नई अनाज मंडी में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 15 से ज्यादा ऐसी हरियाणवी बेटियों का उदाहरण भी दिया। जिन्होंने प्रदेश का मान बढ़ाया है। ऐसे कई बड़े पद और उपलब्धियां हैं, जहां केवल हरियाणा की महिलाओं ने सबसे पहले पहुंचकर कीर्तिमान स्थापित किया है। इनमें पहली महिला उप राज्यपाल चंद्रावती, पहली हरियाणा विधानसभा की अध्यक्ष शन्नोदेवी, पहली अंतरिक्ष महिला यात्री कल्पना चावला, ओलंपिक की पहली कांस्य पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक, राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली गीता फौगाट, रजत पदक विजेता दीपा मलिक, डब्ल्यूडब्ल्यू रेस्लिंग में दम दिखाने वाली कविता दलाल, प्रथम महिला भीम पुरस्कार विजेता सुनीता शर्मा, प्रथम महिला मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली मानुषी छिल्लर, पहली कमांडट प्रियंका बेनिवाल और बीएसएफ में महिला कमांडेंट सौम्या शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कई बेटियों ने अपनी उपलब्धियों के दम पर हरियाणा का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने लिंगानुपात का जिक्र करते हुए कहा कि कभी हरियाणा को बेटियों को कोख में मारने वाला कहा जाता था। 2014 में लिंगानुपात 871 था जोकि अब बढ़कर 923 पर पहुंच गया है। सरकार ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत की धरती से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का आह्वान किया था। इस अभियान में सभी का सहयोग मिला तो घटे रहे लिंगानुपात का कलंक मिटा है और उम्मीद है कि आगे भी यह आंकड़ा बढ़ेगा।
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ऐसी महिलाएं भी होंगी आत्मनिर्भर, जिनके यहां कमाने वाला नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 56400 सेल्फ हेल्प ग्रुप चल रहे हैं। इनमें 5.80 लाख महिलाएं जुड़ीं हैं, जो अपने बल पर कमाई कर रही हैं। अब सरकार ऐसी योजना भी बना रही है कि जिनमें उन महिलाओं को भी आत्मनिर्भर या कमाने का साधन बनाएंगे, जिनके यहां कमाने वाला कोई नहीं हैं। इस दिशा में सबसे पहले प्रत्येक सेल्फ हेल्प ग्रुप को एक-एक ऐसी महिला को साथ जोड़ें ताकि इनके लिए भी कुछ आय का साधन बने। ग्रुपों के सहयोग से ही एक बार में ऐसी 56 हजार से ज्यादा महिलाओं के लिए आय का साधन पैदा होगा। इसके बाद अन्यों के लिए भी प्रयास करेंगे।
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