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दक्ष शिव के दर्शन से मिलता है अश्वमेघ यज्ञ का फल
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गांव डाचर के शिव मंदिर में शिवलिंग। संवाद
करनाल/निसिंग। गांव डाचर के माता नयना देवी मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग पर रोजाना श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। लोगों की इसमें गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां मांगी हर मन्नत पूरी होती है। हर सावन माह में शिव भक्त जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर के पुजारी मुरारी लाल पांडेय ने बताया कि मंदिर में दक्षेश्वर तीर्थ भी है। जिसका उल्लेख पौराणिक साहित्य व वामन पुराण में भी मिलता है।
वामन पुराण में वर्णित है कि जो दक्ष शिव के दर्शन कर लेता है वह अश्वमेघ यज्ञ के फल को प्राप्त कर लेता है। मान्यता के अनुसार शिव-पार्वती का विवाह भी यहीं हुआ था। वहीं महाभारत काल में अपने वनवास के दौरान पांडव भी यहां रुके थे। मंदिर की दीवारों पर हाथी पर सवार योद्धा, अधि मंथन, नाभिकमल, श्रवण कुमार, गोपियों के मध्य श्रीकृष्ण समेत अन्य धार्मिक प्रसंगों का चित्रण है, जो तीर्थ के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान प्रजापति दक्ष की राजधानी भी रही है। पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति परमपिता ब्रह्मा के पुत्र थे जो कश्मीर के हिमालय क्षेत्र में रहते थे। प्रजापति दक्ष की दो पत्नियों से 84 बेटियां हुई थी। कहा जाता है कि समस्त दैत्य, गंधर्व, अप्सराएं, पक्षी, पशु समेत सारी सृष्टि इन्हीं कन्याओं से पैदा हुई थी।
वर्ष में दो बार होता है हवन व भंडारा
पुजारी ने बताया कि मंदिर में वर्ष में दो बार हवन व भंडारे का आयोजन किया जाता है। पहला भंडारा शुक्ल मास की चौदस व दूसरा चैत मास की चौदस को लगाया जाता है।
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वामन पुराण में वर्णित है कि जो दक्ष शिव के दर्शन कर लेता है वह अश्वमेघ यज्ञ के फल को प्राप्त कर लेता है। मान्यता के अनुसार शिव-पार्वती का विवाह भी यहीं हुआ था। वहीं महाभारत काल में अपने वनवास के दौरान पांडव भी यहां रुके थे। मंदिर की दीवारों पर हाथी पर सवार योद्धा, अधि मंथन, नाभिकमल, श्रवण कुमार, गोपियों के मध्य श्रीकृष्ण समेत अन्य धार्मिक प्रसंगों का चित्रण है, जो तीर्थ के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान प्रजापति दक्ष की राजधानी भी रही है। पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति परमपिता ब्रह्मा के पुत्र थे जो कश्मीर के हिमालय क्षेत्र में रहते थे। प्रजापति दक्ष की दो पत्नियों से 84 बेटियां हुई थी। कहा जाता है कि समस्त दैत्य, गंधर्व, अप्सराएं, पक्षी, पशु समेत सारी सृष्टि इन्हीं कन्याओं से पैदा हुई थी।
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वर्ष में दो बार होता है हवन व भंडारा
पुजारी ने बताया कि मंदिर में वर्ष में दो बार हवन व भंडारे का आयोजन किया जाता है। पहला भंडारा शुक्ल मास की चौदस व दूसरा चैत मास की चौदस को लगाया जाता है।
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