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Karnal News: आ गए तेरे नाम दे पुजारी, दो दर्शन इक वारी...
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मासिक श्रद्धालु संगम में किए भजन प्रस्तुत, झूमने पर मजबूर हुए भक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री घंटाकर्ण देवस्थान पर मासिक श्रद्धालु संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सबसे पहले श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से दैवी शक्ति का आह्वान किया गया। इस अवसर पर साध्वी जागृति ने यह पावन भूमि यहां बार-बार आना ... भजन गाया।
कर्मवीर चौहान ने आ गए घंटाकर्ण जी तेरे नाम दे पुजारी... भजन गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु जयपाल सिंह, अनिता जैन और मधु गुप्ता ने मुझे रास आ गया है... भजन गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वीणा गोयल ने घंटाकर्ण जी सुन लेना एक सवाल दीवाने का, अगर समझ में आ जाए तो भक्तों को समझा देना भजन गाया और पुष्पा जैन ने दादा देने वाले हैं हम लेने वाले हैं आज खाली हाथ नहीं जाना जिसे चाहिए वो हाथ उठाना आदि भजनों ने सभी को भक्ति में झूमने को मजबूर किया।
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महासाध्वी प्रमिला महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम है। भक्तिपूर्ण समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है और पराशक्तियों की दैवी कृपा से अलौकिक सफलता पाई जा सकती है। श्री घंटाकर्ण जी महाप्रभावी, भक्तवत्सल देवता हैं जिनकी कृपा व्यक्ति को निहाल तथा मालामाल कर देती है।
इनमें भक्तों के संकटों को टालकर भक्त के जीवन को निर्विघ्न मनाने की अप्रतिम क्षमता है। परालौकिक शक्तियां भक्ति से प्रसन्न होकर कंगाल को मालामाल, साधनहीन को साधनसंपन्न तथा दर-दर ठोकरें खाने वाले को भी शाही ठाठ-बाट से युक्त बना देती हैं। श्री घंटाकर्ण जी सभी भारतीय परंपराओं के सर्वमान्य परोपकारी, जनहितैषी ऐसे देवता हैं जिनके अनुकूल होने पर सारी तकलीफें काफूर हो जाती हैं और जीवन-पथ गुलाब की पंखुड़ियों की तरह सुकोमल तथा सुगमता से चलने योग्य बन जाता है।
अंधेर पक्ष की चतुर्दशी श्री घंटाकर्ण देव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाकर अपने जीवन को सुख संपन्न बनाने का विशेष अवसर है जिस दिन देव दरबार में हाजिरी लगाकर अपना कुशल-मंगल, आनंद-क्षेम सुनिश्चित किया जा सकता है। परमात्मा तथा देवपुरुष के शरण में जाने वाला प्रभु के प्रसाद (कृपा) से परम शांति तथा सनातन परम स्थान को प्राप्त करता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री घंटाकर्ण देवस्थान पर मासिक श्रद्धालु संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सबसे पहले श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से दैवी शक्ति का आह्वान किया गया। इस अवसर पर साध्वी जागृति ने यह पावन भूमि यहां बार-बार आना ... भजन गाया।
कर्मवीर चौहान ने आ गए घंटाकर्ण जी तेरे नाम दे पुजारी... भजन गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु जयपाल सिंह, अनिता जैन और मधु गुप्ता ने मुझे रास आ गया है... भजन गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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वीणा गोयल ने घंटाकर्ण जी सुन लेना एक सवाल दीवाने का, अगर समझ में आ जाए तो भक्तों को समझा देना भजन गाया और पुष्पा जैन ने दादा देने वाले हैं हम लेने वाले हैं आज खाली हाथ नहीं जाना जिसे चाहिए वो हाथ उठाना आदि भजनों ने सभी को भक्ति में झूमने को मजबूर किया।
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महासाध्वी प्रमिला महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम है। भक्तिपूर्ण समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है और पराशक्तियों की दैवी कृपा से अलौकिक सफलता पाई जा सकती है। श्री घंटाकर्ण जी महाप्रभावी, भक्तवत्सल देवता हैं जिनकी कृपा व्यक्ति को निहाल तथा मालामाल कर देती है।
इनमें भक्तों के संकटों को टालकर भक्त के जीवन को निर्विघ्न मनाने की अप्रतिम क्षमता है। परालौकिक शक्तियां भक्ति से प्रसन्न होकर कंगाल को मालामाल, साधनहीन को साधनसंपन्न तथा दर-दर ठोकरें खाने वाले को भी शाही ठाठ-बाट से युक्त बना देती हैं। श्री घंटाकर्ण जी सभी भारतीय परंपराओं के सर्वमान्य परोपकारी, जनहितैषी ऐसे देवता हैं जिनके अनुकूल होने पर सारी तकलीफें काफूर हो जाती हैं और जीवन-पथ गुलाब की पंखुड़ियों की तरह सुकोमल तथा सुगमता से चलने योग्य बन जाता है।
अंधेर पक्ष की चतुर्दशी श्री घंटाकर्ण देव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाकर अपने जीवन को सुख संपन्न बनाने का विशेष अवसर है जिस दिन देव दरबार में हाजिरी लगाकर अपना कुशल-मंगल, आनंद-क्षेम सुनिश्चित किया जा सकता है। परमात्मा तथा देवपुरुष के शरण में जाने वाला प्रभु के प्रसाद (कृपा) से परम शांति तथा सनातन परम स्थान को प्राप्त करता है।