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Karnal News: आधी रह गई फसल की कीमत, टालनी पड़ी बेटियों की शादी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Sep 2025 01:37 AM IST
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The price of the crop was halved, the marriage of daughters had to be postponed
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल/इंद्री। यमुना में आई बाढ़ ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। हजारों एकड़ में फसल को नुकसान हुआ है। कई जगह फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। खेतों में जो फसल बची है उसे भी आधी कीमत पर ही बेचना होगा। अच्छी फसल से लगाई हुई उम्मीदें ध्वस्त हो गई हैं। किसी की बेटियों की शादी फसल पर टिकी थी तो किसी की बच्चों की फीस। बेटियों की शादी की तारीख टालनी पड़ी है। बच्चों की फीस के लिए स्कूल से और समय मांगा है।
सरकार से मिलने वाले मुआवजे के बारे में भी किसानों में संशय है। दो साल पहले आई बाढ़ के बाद मिले मुआवजे से कई किसान असंतुष्ट रहे थे। आरोप है कि बाढ़ में हुए नुकसान का कई किसानों को मुआवजा मिल भी नहीं पाया था। जिनको मिला वह भी नुकसान का मात्र दस से बीस फीसदी ही था। इंद्री का गांव कलसौरा यमुना की बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है। सरपंच सीमा ने बताया कि गांव में नहर किनारे की करीब 100 एकड़ जमीन पर फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। तटबंधों के पास की जमीन पर भी फसल को 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। मुख्य रूप से धान और गन्ना की फसल प्रभावित है। दोनों ही फसलें गांव के लोगों के लिए नकदी फसल हैं।
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किसान दल सिंह, मेहर सिंह, गुरमेल ने बताया कि फसलों को काफी नुकसान हुआ है। धान की फसल पहले ही काटनी पड़ी है। बाजार में इस फसल के दाम आधे ही मिल रहे हैं।
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आगे बढ़ानी पड़ी बेटियों की शादी की तारीख
कलसौरा क्षेत्र के किसान नरेंद्र की दो बेटियों का विवाह नवंबर में होना निश्चित हुआ था। फसल से उम्मीद थी। बाढ़ में हुए नुकसान के कारण शादी की तारीख टालनी पड़ी है। नरेंद्र ने बताया कि उनके पास तीन एकड़ कृषि भूमि है। एक एकड़ के करीब यमुना के साथ लगती हुई है। शेष गांव से कुछ दूरी पर बनाए गए तटबंध के साथ लगती है। बाढ़ से यमुना के साथ वाली जमीन पर फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। तटबंध के साथ वाली जमीन पर पचास प्रतिशत तक फसल का नुकसान हुआ है। नवंबर में दोनों बेटियों की शादी होनी तय थी लेकिन नुकसान ने समस्या खड़ी कर दी।





धान के दाने पड़े काले, कीमत रह गई आधी
किसान प्रवीन ने बताया कि बाढ़ के पानी के साथ आई सिल्ट से फसल को बहुत नुकसान हुआ है। बाढ़ आने से पहले धान की फसल पकने वाली थी। थोड़ा समय और चाहिए था। बाढ़ का पानी खेतों में भर गया। धान के दाने काले पड़ने लगे थे। मजबूरी में फसल कटवानी पड़ रही है। अगर नहीं कटवाते तो सारे दाने काले होने की आशंका थी। अब इस फसल के मंडी में आधे दाम मिल रहे हैं।


फीस भी नहीं भर पाए, स्कूल से मांगा समय
किसान सतीश ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में धान की बुवाई की थी। बाढ़ के पानी ने उनकी पूरी फसल तबाह कर दी। बाजार का लेनदेन और बच्चों की स्कूल फीस सब छह माह में भरते थे। बाढ़ के कारण अब सब रोकना पड़ा है। मंडी में आधे दामों में बिकी फसल से मिले रुपयों से घर खर्च ही मुश्किल से चलेगा। ऐसे में लेनदेन और बच्चों की फीस के भुगतान की चिंता सताने लगी है। स्कूल से और समय मांगा है लेकिन फीस कैसे भरेंगे, यह चिंता सताए जा रही है।
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