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पुलिस नहीं कर पाई रिकवरी, दंपती को न्यायिक हिरासत में भेजा
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सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग मामले में गिरफ्तार महिला और उसके पति से एक दिन के पुलिस रिमांड के बावजूद पुलिस कोई रिकवरी नहीं कर पाई। मंगलवार को दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले रिमांड के दौरान महिला से पूछताछ और उसके घर की तलाशी ली गयी। इस दौरान अदालत के आदेश पर महिला पक्ष के तीन वकील भी साथ रहे थे। अब पुलिस ने अदालत में महिला के वायस सैंपल और हैंडराइटिंग जांच के लिए आवेदन दिया है। बता दें कि पुलिस के पास महिला और विधायक धर्मपाल गोंदर के बेटे शिव के बीच हुई बातचीत की आडियो है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस सैंपल लेने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर बुधवार को महिला और उसके पति की जमानत पर सुनवायी होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकीं हैं।
सामूहिक दुष्कर्म के बाद ब्लैकमेलिंग मामले में पुलिस ने दंपती को सवा सात लाख रुपये की नकदी के साथ गिरफ्तार किया था, लेकिन मामले की वीडियोग्राफी नहीं कराने और नोटों पर पाउडर नहीं लगाने के कारण कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया था। साथ ही जांच अधिकारी को भी फटकार लगायी थी। यही नहीं कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी भी खारिज कर दी थी। इसके बाद
31 अगस्त को पुलिस ने दुबारा अदालत से महिला और उसके पति का दो दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने एक दिन का सशर्त रिमांड मंजूर किया था। साथ ही रिमांड के दौरान महिला के वकीलों को भी साथ रखने के निर्देश दिया था। रिमांड के दौरान पुलिस महिला और उसके पति को लेकर कुरुक्षेत्र उसके मकान पर गयी। वहां पूछताछ और घर की तलाशी ली गयी, लेकिन कोई पैसा बरामद नहीं हो सका। मंगलवार दोपहर को पुलिस ने दोबारा से दंपती को अदालत के सामने पेश किया। दूसरी ओर, महिला पक्ष की ओर से दोनों की जमानत के लिए अदालत में अर्जी लगाई गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होनी है।
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मामले में प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं : राठौड़
महिला पक्ष के वकील भूपेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि इस मामले में प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं है, केवल अदालत से ही न्याय मिलेगा। बुधवार को महिला की जमानत को लेकर बहस होगी, हमारा प्रयास रहेगा कि महिला को जमानत मिले। इसके बाद इस केस को पूरी शिद्दत के साथ लड़ा जाएगा, ताकि सच जनता के सामने आ सके। इसके लिए वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं।
जुलाई में दर्ज हुआ था दुष्कर्म का केस
विदित हो कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में महिला ने प्रताप पब्लिक स्कूल के संचालक अजय भाटिया, प्रिंसिपल पूनम नेवट और तहसीलदार राजबख्श पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इसी मामले में अजय भाटिया को महिला ब्लैकमेल करने लगी और पैसे की डिमांड की। दावा है कि भाटिया की तरफ से 6 लाख रुपये पहले दिये जा चुके हैं। बावजूद इसके महिला ने और पैसे की डिमांड की। इस पर भाटिया ने सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकायत दी। 21 अगस्त को महिला और उसके पति को सवा सात लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन 22 अगस्त को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने दो दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
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सामूहिक दुष्कर्म के बाद ब्लैकमेलिंग मामले में पुलिस ने दंपती को सवा सात लाख रुपये की नकदी के साथ गिरफ्तार किया था, लेकिन मामले की वीडियोग्राफी नहीं कराने और नोटों पर पाउडर नहीं लगाने के कारण कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया था। साथ ही जांच अधिकारी को भी फटकार लगायी थी। यही नहीं कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी भी खारिज कर दी थी। इसके बाद
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31 अगस्त को पुलिस ने दुबारा अदालत से महिला और उसके पति का दो दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने एक दिन का सशर्त रिमांड मंजूर किया था। साथ ही रिमांड के दौरान महिला के वकीलों को भी साथ रखने के निर्देश दिया था। रिमांड के दौरान पुलिस महिला और उसके पति को लेकर कुरुक्षेत्र उसके मकान पर गयी। वहां पूछताछ और घर की तलाशी ली गयी, लेकिन कोई पैसा बरामद नहीं हो सका। मंगलवार दोपहर को पुलिस ने दोबारा से दंपती को अदालत के सामने पेश किया। दूसरी ओर, महिला पक्ष की ओर से दोनों की जमानत के लिए अदालत में अर्जी लगाई गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होनी है।
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मामले में प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं : राठौड़
महिला पक्ष के वकील भूपेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि इस मामले में प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं है, केवल अदालत से ही न्याय मिलेगा। बुधवार को महिला की जमानत को लेकर बहस होगी, हमारा प्रयास रहेगा कि महिला को जमानत मिले। इसके बाद इस केस को पूरी शिद्दत के साथ लड़ा जाएगा, ताकि सच जनता के सामने आ सके। इसके लिए वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं।
जुलाई में दर्ज हुआ था दुष्कर्म का केस
विदित हो कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में महिला ने प्रताप पब्लिक स्कूल के संचालक अजय भाटिया, प्रिंसिपल पूनम नेवट और तहसीलदार राजबख्श पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इसी मामले में अजय भाटिया को महिला ब्लैकमेल करने लगी और पैसे की डिमांड की। दावा है कि भाटिया की तरफ से 6 लाख रुपये पहले दिये जा चुके हैं। बावजूद इसके महिला ने और पैसे की डिमांड की। इस पर भाटिया ने सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकायत दी। 21 अगस्त को महिला और उसके पति को सवा सात लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन 22 अगस्त को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने दो दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।