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Karnal News: दूसरे पक्ष ने की वर्तमान प्रधान भूपेंद्र लाठर से इस्तीफे की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:50 AM IST
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The other faction demanded the resignation of incumbent President Bhupendra Lathar.
 धरने पर बैठे जाट समाज के लोग।
करनाल। जाट धर्मशाला की प्रधानी को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को जाट समाज के दूसरे पक्ष ने धर्मशाला परिसर में धरना देकर मौजूदा प्रधान भूपेंद्र लाठर के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिरादरी में संतुलन और एकता बनाए रखने के लिए अब किसी दूसरे परिवार, विशेष रूप से असंध जोन को नेतृत्व का मौका दिया जाना चाहिए।
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धरने पर मौजूद लोगों ने कहा कि वे विवाद को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं हैं। बिरादरी के मामलों को समाज के भीतर ही सुलझाया जाना बेहतर है। धरने में शामिल सुखबीर संधू, जगपाल सिंह, बलवान सिंह सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि धर्मशाला को परिवार विशेष तक सीमित करने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि जाट भवन में लाठर परिवार के नाम वाले पत्थर लगवाकर कब्जे की मंशा जताई गई, जिसका समाज ने विरोध किया। विरोध के बाद ये पत्थर हटवाए गए, जिसे वे अपनी पहली जीत बता रहे हैं।
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असंध जोन से प्रधान चुने जाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब दूसरी और प्रमुख मांग यह है कि एक ही परिवार से कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक प्रधान न बने। उनके अनुसार लाठर परिवार से चार बार प्रधानी हो चुकी है, इसलिए अब परंपरा और संतुलन के तहत दूसरे परिवार को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जाट समाज को पांच जोन में बांटा गया है, जिनमें चार जोन को पहले ही प्रतिनिधित्व मिल चुका है, जबकि असंध जोन अब तक वंचित है। ऐसे में इस बार सर्वसम्मति से असंध जोन से प्रधान चुना जाना चाहिए।
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धरने की प्रमुख मांगें
- उच्च न्यायालय एवं रजिस्ट्रार जनरल सोसायटी, हरियाणा के आदेशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए।
- उपनियमों में किए गए विवादित संशोधनों की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- वर्ष 2020 में गठित कॉलेजियम को संबंधित नियमों के अनुसार दुरुस्त किया जाए।
- संस्थापक सदस्यों की सदस्यता बहाल करने की मांग पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
- चुनाव से पहले सदस्यता, कॉलेजियम और उपनियमों से जुड़े विवादों का समाधान किया जाए।
- वर्ष 2017 से 2026 तक के कथित नियम-विरुद्ध कार्यों की निष्पक्ष जांच की जाए।
- आगामी चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी, संविधानसम्मत और सभी पात्र सदस्यों की भागीदारी वाली हो।
- संस्था के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड, सदस्यता प्रक्रिया और निर्णयों में आवश्यक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
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