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Karnal News: सात वर्षों में 36 फीसदी बढ़ गई टीबी के मरीजों की संख्या

Sat, 10 Jan 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 10 Jan 2026 01:40 AM IST
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The number of TB patients has increased by 36% in seven years.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिले में टीबी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। सात वर्षों की तुलना में 2025 में 36 फीसदी टीबी मरीज बढ़ गए हैं। घर-घर जांच अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और मुफ्त इलाज की सुविधाओं के बावजूद, 2019 में 3854 टीबी के मरीज मिले थे 2025 में आंकड़ा बढ़कर 5256 हो गया है। इतना ही नहीं, सात वर्षों की बात करें तो हर साल टीबी मरीजों की संख्या बढ़ी है।
यह स्थिति तब है, जब रोजाना लोगों को जागरूक किया जा रहा है, बड़े-बड़े शिविर लग रहे हैं और जगह-जगह जांच भी हो रही है, उसके बावजूद लोग जागरूक नहीं हैं और टीबी की चपेट में आ रहे हैं। वर्ष 2024 में भी टीबी मरीजों की संख्या जहां 5028 थी, 2025 में वह 228 और बढ़ गई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर दिन जिला कारागार से लेकर गांव-गांव और घर-घर लोगों की जांच की जा रही है, एक्सरे लिए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी लोगों में जागरूकता की कमी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने जो वर्ष 2025 के लिए 5439 टीबी मरीजों की खोज का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन विभाग की पहुंच केवल 5256 मरीजों तक ही बन सकी।
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जिला कारागार में भी की जा रही टीबी जांच
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मरीजों की खोज के लिए रोजाना जागरूकता शिविर और जगह-जगह जांच की जा रही है। 5 जनवरी से विभाग की ओर से जिला कारागार में रोजाना 150 कैदियों की जांच की जा रही है और कारागार के 2300 कैदियों की जांच करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही जिले में 600 निक्षय मित्र पंजीकृत हैं। साथ ही लोगों की जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें बलगम जांच,एक्सरे कराने, काला पीलिया, एचआईवी और शुगर, खून जांच समेत कई जांच कराने के लिए लोगों का प्रेरित किया जा रहा है। नाटक के जरिये लोगों को जागरूक किया जाता है जो स्वास्थ्य विभाग के अभियान का हिस्सा है।
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जिले में दो सीबी नाट मशीनों का तीन महीने से कार्टेज खत्म

टीबी की पहचान के लिए जिले में इस साल करीब 43 हजार लोगों की माइक्रोस्कोपी व नाट जांच कराई गई, जबकि 30 हजार लोगों के एक्स-रे किए गए। इसके बावजूद संसाधनों की कमी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। जिले में मौजूद दो सीबी-नाट मशीनों के कार्टेज पिछले तीन महीनों से खत्म पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मशीने काम कर रही हैं लेकिन कार्टेज खत्म है। जिसके चलते जांच का काम ट्रू-नाट मशीन से चलाया जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, सीबी-नाट मशीन की जांच रिपोर्ट 99 प्रतिशत तक सटीक मानी जाती है, जबकि ट्रू-नाट मशीन की सटीकता लगभग 89 प्रतिशत होती है। ऐसे में ट्रू-नाट जांच में नेगेटिव रिपोर्ट आने की संभावना अधिक रहती है, जिससे कुछ मामलों में बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ पाती।


टीबी के 2713 मरीजों का चल रहा इलाज
साल भर में सामने आए 5256 टीबी मरीजों में से अब तक 2543 मरीजों को ठीक घोषित किया जा चुका है, जबकि 2713 मरीजों का इलाज अभी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इलाज लंबा होने, बीच में दवाएं छोड़ देने और देर से जांच कराने के कारण मरीजों के पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लग रहा है।


सात वर्षों में बढ़ती टीबी मरीजों की संख्या
वर्ष टीबी मरीज
2019 3854
2020 4312
2021 4274
2022 4507
2023 2218
2024 5028
2025 5256


टीबी के लक्षण

- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी हो।

- शाम के समय बुखार आता हो।

- खांसते समय बलगम में खून आता हो।

- छाती में दर्द होता हो या सांस फूलती हो।

- भूख और वजन कम हो रहा हो।

- रात के समय पसीना आता हो।

- गर्दन या बगल में गांठें हों।

कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और जांच कराने में देरी करते हैं। इससे न केवल बीमारी गंभीर हो जाती है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। समय पर जांच, नियमित दवा और जागरूकता ही टीबी को जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- डॉ. प्रदीप, टीबी रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल
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