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बड़े आंदोलन को लेकर बैठक रही बेनतीजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। किसान आंदोलन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने के लिए प्रदेश के दस किसान संगठनों के पदाधिकारियों की कई घंटे तक बैठक चली लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब 18 नवंबर को फिर से बैठक का फैसला लिया गया है। आगामी बैठक करनाल या किसी अन्य जिले में भी हो सकती है। जिसमें और ज्यादा संगठनों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन को एक साल होने जा रहा है। आंदोलन की जीत के लिए दिल्ली कूच, संसद घेराव या आरपार की लड़ाई का बड़ा फैसला लिया जा सकता है। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि वह पंजाब या कहीं से चुनाव नहीं लड़ रहे। न किसी राजनीतिक पार्टी का गठन कर रहे हैं। कुछ लोग बदनाम करने के लिए उनके बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे हैं।
बैठक में पंजाब से सुरजीत सिंह फूल, संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा से जुड़े किसान संगठनों से वीरेंद्र हुड्डा, गुरनाम सिंह झब्बर सिरसा, महेंद्र राणा, किसान मजदूर नौजवान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र आर्य, भाकियू आईटी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह मेहला, इंद्री खंड अध्यक्ष मंजीत लालर व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
चुनाव की बात खारिज
पत्रकारों के सवाल पर भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि वह पंजाब या कहीं से चुनाव नहीं लड़ रहे। न किसी राजनीतिक पार्टी का गठन कर रहे हैं। कुछ लोग बदनाम करने के लिए उनके बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। पंजाब के किसानों से आग्रह किया है कि पंचायतें करें और राजनीति में बदलाव के लिए आगे आएं। राजनेताओं ने ही कृषि कानून बनाए हैं। ये कानून सड़कों पर नहीं बने। यह बात वे पहले भी कह चुके हैं। पंजाब में यदि कोई भी किसान किसी सीट से चुनाव लड़ेगा तो उसकी मदद करेंगे। 70 साल से पंजाब में राजनीतिक दलों ने किसानों का भला नहीं किया।
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करनाल। किसान आंदोलन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने के लिए प्रदेश के दस किसान संगठनों के पदाधिकारियों की कई घंटे तक बैठक चली लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब 18 नवंबर को फिर से बैठक का फैसला लिया गया है। आगामी बैठक करनाल या किसी अन्य जिले में भी हो सकती है। जिसमें और ज्यादा संगठनों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन को एक साल होने जा रहा है। आंदोलन की जीत के लिए दिल्ली कूच, संसद घेराव या आरपार की लड़ाई का बड़ा फैसला लिया जा सकता है। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि वह पंजाब या कहीं से चुनाव नहीं लड़ रहे। न किसी राजनीतिक पार्टी का गठन कर रहे हैं। कुछ लोग बदनाम करने के लिए उनके बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे हैं।
बैठक में पंजाब से सुरजीत सिंह फूल, संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा से जुड़े किसान संगठनों से वीरेंद्र हुड्डा, गुरनाम सिंह झब्बर सिरसा, महेंद्र राणा, किसान मजदूर नौजवान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र आर्य, भाकियू आईटी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह मेहला, इंद्री खंड अध्यक्ष मंजीत लालर व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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चुनाव की बात खारिज
पत्रकारों के सवाल पर भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि वह पंजाब या कहीं से चुनाव नहीं लड़ रहे। न किसी राजनीतिक पार्टी का गठन कर रहे हैं। कुछ लोग बदनाम करने के लिए उनके बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। पंजाब के किसानों से आग्रह किया है कि पंचायतें करें और राजनीति में बदलाव के लिए आगे आएं। राजनेताओं ने ही कृषि कानून बनाए हैं। ये कानून सड़कों पर नहीं बने। यह बात वे पहले भी कह चुके हैं। पंजाब में यदि कोई भी किसान किसी सीट से चुनाव लड़ेगा तो उसकी मदद करेंगे। 70 साल से पंजाब में राजनीतिक दलों ने किसानों का भला नहीं किया।
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