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Karnal News: करनाल को एनसीआर से बाहर करने का उठा मुद्दा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Nov 2024 06:45 AM IST
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The issue of excluding Karnal from NCR was raised
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहर की नई अनाज मंडी में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एचसीसीआई) के सहयोग से स्किलटेक इंडस्ट्रियल एक्सपो 2024 में रविवार को उद्यमियों को करनाल को एनसीआर से बाहर निकालने की मांग उठाई। उद्यमी बोले कि एनसीआर की पाबंदियों के कारण जिले में उद्यम पनप नहीं पा रहे हैं।
इंद्री के भाजपा विधायक एवं चीफ व्हिप रामकुमार कश्यप बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपा उद्यम स्थापित करने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि नौकरी मांगने की बजाय नौकरी देने वाले बन सके। एक्सपो में पहुंचने पर आयोजकों व उद्यमियों की ओर से उनका स्वागत किया गया।
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विधायक ने यहां लगाए गए करीब 100 लघु उद्यमों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान एग्रो और इंडस्ट्रियल पार्क, हर्बल टी, भवन के आटोमैटिक इलेक्ट्रिक सिस्टम, खाद्य वस्तुओं आदि कई तरह की इकाइयों के उत्पाद देखे और उनकी जमकर सराहना भी है। उन्होंने कहा 99 फीसदी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे जब पढ़ लिखकर निकले तो उन्हें नौकरी मिले।
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सरकार नौकरी दे भी रही हैं लेकिन सभी को नौकरी मिल पाए, ऐसा संभव नहीं हो पाता है लेकिन यदि युवा उद्यम स्थापित करने की दिशा में कदम रखेंगे तो रोजगार की समस्या का भी स्थायी समाधान हो सकेगा। एमएसएमई एडीसी संजीव चावला ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार एमएसएमई को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी इस पर जोर है। विभाग ऐसे एक्सपो में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के प्रमोशन, किराए आदि में आर्थिक सहायता भी करता है। नए उद्यमियों को खासतौर पर प्रशिक्षण दिलाता है और उन्हें उद्यम स्थापित करने में सहयोग करता है। उनके प्रोडक्ट निर्यात कराने में भी सहयोग करता है। मशीने और तकनीकी जानकारियां भी उपलब्ध कराता है।
पानीपत के उद्यमी भीम राणा ने कहा कि करनाल क्षेत्र के एनसीआर में होने का बड़ा खामियाजा उद्योंगो को भुगतना पड़ रहा है, उद्योग पनप नहीं पा रहे हैं, क्योंकि एनडीआर में अत्यधिक पाबंदियां हो गई हैं। करनाल को एनसीआर से जल्द बाहर निकाला जाना चाहिए, क्योंकि इससे दिल्ली की दूरी भी अधिक है।
करनाल के उद्यमी भूषण गोयल ने कहा कि हर गांव में स्पेलर, मिनी आटा चक्की और मिट्टी की जांच की छोटी मशीने लगाई चाहिए, जिसका सीधा फायदा किसानों और वहां के लोगों को होगा, रोजगार भी मिलेगा। अब ऐसी छोटी मशीनें उपलब्ध हो गई हैं। उन्होंने औद्योगिक कचरे से खाद बनाने और पराली के लिए डी कंपोजर बनाने की भी जानकारी दी।

एफपीओ संचालक डॉ. सरदार सिंह ने फेरोमैन ट्रैप आदि आधुनिक खेती की जानकारी दी। इस मौके पर समाजसेवी प्रो.जोगिंद्र मदान, चंद्रगुप्त ढ़ीगड़ा, बीरेंद्र ढींगडा, वासुदेव ढींगड़ा, संजीव मक्कड़, हरमीत सिंह हैप्पी सहित कई उद्यमी व समाजसेवी मौजूद रहे।
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