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Karnal News: खेेलों के अभ्यास के लिए बने हॉल जर्जर, कैसे तैयार होंगे पदकवीर
Sun, 01 Dec 2024 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 01 Dec 2024 02:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्ण स्टेडियम के कुश्ती हॉल, तलवारबाजी हॉल, भारोत्तोलन व मुक्केबाजी हॉल की हालत खस्ता हैं। जर्जर हो चुके हॉल किसी भी समय गिर सकते हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से कंडम घोषित किए गए सभी हॉलों में खिलाड़ियों को अभ्यास करवाया जा रहा है।
इन सभी हॉलों में न तो लाइट की पूरी व्यवस्था और न ही शौचालय का ही उचित प्रबंध है। कुश्ती हॉल में खेल उपकरणों की कमी भी खिलाड़ियों के लिए चुनौती बनी है। उपकरणों के अभाव में पदकवीर कैसे तैयार होंगे। यह प्रश्न हर एक खेल प्रेमी के जेहन में है। भारोत्तोलन हॉल में वार्म अप होने के लिए रस्सी व भारोत्तोलन के उपकरणों का भी अभाव है।
खिलाड़ी देसी अखाड़े की तरह मैट पर ही कसरत करते हुए अपने शरीर को वॉर्म अप करते है। कोच वजीर सिंह, सुरेंद्र चौहान खिलाड़ियों को कुश्ती व बॉक्सिंग के दांव पेंच बारीकी से सिखा कर सुबह व शाम अपना 100 प्रतिशत दे रहे है लेकिन खेल सुविधाओं के अभाव में उनके प्रयास भी फीके पड़ रहे है।
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महिला खिलाड़ियों के लिए अपनी पोशाक बदलने के लिए कमरे की व्यवस्था भी सही नहीं है। गंदे, बदबूदार शौचालयों में जाने से पहले खिलाड़ियों को बार-बार सोचना पड़ता है। बरसात के मौसम में सभी हॉल की छत से पानी टपकता है इस कारण से पहलवान यहां सही ढंग से अभ्यास नहीं कर पाते। मौसम के खराब होते ही हॉल के अंदर अंधेरा हो जाता है।
छत से टपकता पानी खिलाड़ियों के लिए परेशानी बना जाता है। कुश्ती व तलवारबाजी हॉल के दरवाजे व खिड़कियों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी समय टूट सकते है। यहां लगे दरवाजों की जाली पूरी तरह से टूट चुकी है। हॉल में पंखों की व्यवस्था भी नहीं है। तलवारबाजी हॉल की छत पर उगे पेड़ों की जड़े हॉल की दीवार से साफ-साफ नजर आती है।
कर्ण स्टेडियम में कंडम तलवारबाजी हॉल में खिलाड़ियों को सप्ताह में केवल तीन दिन ही प्रशिक्षण मिलता है बाकी तीन दिन खिलाड़ी खुद ही अभ्यास करते है। यहां के एकमात्र कोच के पास कैथल का अतिरिक्त भार है इस कारण से वह तीन दिन वहां के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते है। ऐसे में खिलाड़ी दोहरी मार झेल रहे है।
बॉक्सिंग का केवल रिंग बदला हॉल नहीं
कर्ण स्टेडियम में बॉक्सरों के अभ्यास के लिए केवल रिंग बदला गया है, हॉल नहीं। ऐसे में सर्द मौसम में भी खिलाड़ी खुले में अभ्यास करते है। बॉक्सिंग हॉल इतना जर्जर हो चुका है कि अब तो उसके अंदर जाना भी खतरे से खाली नहीं है। बॉक्सिंग के तैयार होने के लिए खिलाड़ियों को कुश्ती हॉल के चेंजिंग रूम का इस्तेमाल करना पड़ता है। यहां पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
कर्ण स्टेडियम में सभी नए हॉल स्मार्ट सिटी परियोजना से निर्माणाधीन है। सभी हॉल का निर्माण कार्य करीब एक साल की देरी किया जा रहा है, इस बारे में बार-बार पत्राचार भी किया जा रहा है। जैसे ही नए खेल भवनों का निर्माण होता है, कुश्ती, बॉक्सिंग, तलवारबाजी व भारोत्तोलन के खिलाड़ियों नए हॉल की सौगात दी जाएगी। पहलवानों के अभ्यास के लिए नए कुश्ती मैट की व्यवस्था की गई है। नए भवन में खिलाड़ियों को बेहतर शौचालय, लाइट व पंखों की व्यवस्था मिलेगी। - सुधा भसीन, जिला खेल अधिकारी।
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करनाल। कर्ण स्टेडियम के कुश्ती हॉल, तलवारबाजी हॉल, भारोत्तोलन व मुक्केबाजी हॉल की हालत खस्ता हैं। जर्जर हो चुके हॉल किसी भी समय गिर सकते हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से कंडम घोषित किए गए सभी हॉलों में खिलाड़ियों को अभ्यास करवाया जा रहा है।
इन सभी हॉलों में न तो लाइट की पूरी व्यवस्था और न ही शौचालय का ही उचित प्रबंध है। कुश्ती हॉल में खेल उपकरणों की कमी भी खिलाड़ियों के लिए चुनौती बनी है। उपकरणों के अभाव में पदकवीर कैसे तैयार होंगे। यह प्रश्न हर एक खेल प्रेमी के जेहन में है। भारोत्तोलन हॉल में वार्म अप होने के लिए रस्सी व भारोत्तोलन के उपकरणों का भी अभाव है।
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खिलाड़ी देसी अखाड़े की तरह मैट पर ही कसरत करते हुए अपने शरीर को वॉर्म अप करते है। कोच वजीर सिंह, सुरेंद्र चौहान खिलाड़ियों को कुश्ती व बॉक्सिंग के दांव पेंच बारीकी से सिखा कर सुबह व शाम अपना 100 प्रतिशत दे रहे है लेकिन खेल सुविधाओं के अभाव में उनके प्रयास भी फीके पड़ रहे है।
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महिला खिलाड़ियों के लिए अपनी पोशाक बदलने के लिए कमरे की व्यवस्था भी सही नहीं है। गंदे, बदबूदार शौचालयों में जाने से पहले खिलाड़ियों को बार-बार सोचना पड़ता है। बरसात के मौसम में सभी हॉल की छत से पानी टपकता है इस कारण से पहलवान यहां सही ढंग से अभ्यास नहीं कर पाते। मौसम के खराब होते ही हॉल के अंदर अंधेरा हो जाता है।
छत से टपकता पानी खिलाड़ियों के लिए परेशानी बना जाता है। कुश्ती व तलवारबाजी हॉल के दरवाजे व खिड़कियों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी समय टूट सकते है। यहां लगे दरवाजों की जाली पूरी तरह से टूट चुकी है। हॉल में पंखों की व्यवस्था भी नहीं है। तलवारबाजी हॉल की छत पर उगे पेड़ों की जड़े हॉल की दीवार से साफ-साफ नजर आती है।
कर्ण स्टेडियम में कंडम तलवारबाजी हॉल में खिलाड़ियों को सप्ताह में केवल तीन दिन ही प्रशिक्षण मिलता है बाकी तीन दिन खिलाड़ी खुद ही अभ्यास करते है। यहां के एकमात्र कोच के पास कैथल का अतिरिक्त भार है इस कारण से वह तीन दिन वहां के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते है। ऐसे में खिलाड़ी दोहरी मार झेल रहे है।
बॉक्सिंग का केवल रिंग बदला हॉल नहीं
कर्ण स्टेडियम में बॉक्सरों के अभ्यास के लिए केवल रिंग बदला गया है, हॉल नहीं। ऐसे में सर्द मौसम में भी खिलाड़ी खुले में अभ्यास करते है। बॉक्सिंग हॉल इतना जर्जर हो चुका है कि अब तो उसके अंदर जाना भी खतरे से खाली नहीं है। बॉक्सिंग के तैयार होने के लिए खिलाड़ियों को कुश्ती हॉल के चेंजिंग रूम का इस्तेमाल करना पड़ता है। यहां पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
कर्ण स्टेडियम में सभी नए हॉल स्मार्ट सिटी परियोजना से निर्माणाधीन है। सभी हॉल का निर्माण कार्य करीब एक साल की देरी किया जा रहा है, इस बारे में बार-बार पत्राचार भी किया जा रहा है। जैसे ही नए खेल भवनों का निर्माण होता है, कुश्ती, बॉक्सिंग, तलवारबाजी व भारोत्तोलन के खिलाड़ियों नए हॉल की सौगात दी जाएगी। पहलवानों के अभ्यास के लिए नए कुश्ती मैट की व्यवस्था की गई है। नए भवन में खिलाड़ियों को बेहतर शौचालय, लाइट व पंखों की व्यवस्था मिलेगी। - सुधा भसीन, जिला खेल अधिकारी।