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Karnal News: जिस फैक्टरी से अपशिष्ट पदार्थ निकला वह अवैध, मालिक पर केस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Apr 2025 02:30 AM IST
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The factory from which the waste material came out is illegal, case filed against the owner
- बिजली निगम ने मीटर कैसे दिया इसकी भी हो रही जांच, जहरीला पानी पीने से 15 भैंसों की मौत का मामला
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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। फैक्टरी से निकला जहरीला पानी पीने से 15 भैंसों की मौत हो गई थी। जिला योजना कर विभाग के अनुसार जांच में सामने आया है कि जिस फैक्टरी से जहरीला पानी निकला, वह अवैध रूप से संचालित हो रही थी। अब विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। टीम यह भी जांच कर रही है कि इस अवैध फैक्टरी का निर्माण कैसे हुआ और किसकी अनुमति से यह इतने समय से चल रही थी।
वहीं, इस अवैध फैक्टरी में बिजली आपूर्ति भी हो रही थी, जिसे लेकर बिजली निगम से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सवाल उठ रहा है कि जब फैक्टरी अवैध है, तो उसे बिजली का मीटर कैसे और किस आधार पर दिया गया। इस संबंध में निगम अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।
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नगला चौक के पास स्थित एक फैक्टरी से निकले जहरीले रसायनयुक्त पानी को पीने से सोमवार को 15 मुर्राह नस्ल की भैंसों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब पंजाब के चरवाहे सराएद्दीन और उनके बहनोई की करीब 70 भैंसों का झुंड यमुना नदी की ओर जा रहा था और रास्ते में उन्होंने फैक्टरी के पास बह रहे पानी से प्यास बुझाई। पानी पीने के चंद मिनटों के भीतर भैंसों की हालत बिगड़ने लगी, उनके मुंह से झाग निकलने लगा और एक-एक कर 15 भैंसें दम तोड़ने लगीं।
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हर भैंस की कीमत एक लाख रुपये के करीब
सराएद्दीन के अनुसार, मरी हुई भैंसों में से अधिकांश मुर्राह नस्ल की थीं, जिनकी बाजार में कीमत लगभग एक लाख रुपये प्रति भैंस थी। इस दुर्घटना में न सिर्फ 15 भैंसें मर गईं, बल्कि कुछ लापता भी हो गई हैं। इससे चरवाहों को करीब 15 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

पहले भी हो चुकी 21 भेड़ों की मौत
ग्रामीणों के मुताबिक, इसी फैक्टरी के जहरीले अपशिष्ट से पहले भी 21 भेड़ों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की थी। प्रशासन की इसी लापरवाही के चलते एक बार फिर जानवरों की जान चली गई।


फैक्टरी मालिक गायब
घटना के बाद थाना सदर प्रभारी तरसेम सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने जहरीले पानी के सैंपल भरवाकर जांच के लिए भेज दिए हैं और मृत भैंसों के विसरा भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं ताकि मौत के कारण की पुष्टि की जा सके। फैक्टरी मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है, हालांकि वह घटना के बाद से गायब है। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों और पशुपालकों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द उचित मुआवजा नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मेरठ रोड हाईवे को जाम कर देंगे। यह घटना जिला प्रशासन की निगरानी और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि पहले हुई घटनाओं के बाद फैक्टरी पर रोक लगाई जाती या अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था होती, तो यह हादसा टल सकता था। फिलहाल जिला योजना कर विभाग, बिजली निगम और पुलिस मिलकर मामले की विस्तृत जांच कर रहे है।
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