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Karnal News: कर्मचारी ने कबूला गुनाह, जांच टीम ने बताया बेगुनाह
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करनाल। कुंजपुरा के खराजपुर राशन डिपो पर भीगा हुआ गेहूं भेजने के मामले में स्टेट वेयर हाउस की टीम ने जांच पूरी कर दी है, लेकिन टीम की जांच रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट में गेहूं भीगने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।
स्टेट वेयर हाउस के डीएम का कहना है कि टीम ने जांच में बताया कि घीड़ गांव में जो गोदाम बना है। जहां से यह गेहूं आया था। वहां का शेड टूटा था। इस कारण गेहूं भीग गया। इस रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता विकास का कहना है कि विभाग ने खानापूर्ति के लिए जांच टीम बनाई थी। टीम ने इस मामले को दबाने व कर्मचारी को कार्रवाई से बचाने के लिए ऐसी रिपोर्ट बनाई है, क्योंकि जब वह 27 जनवरी को गोदाम में गया था तो वहां कुछ नहीं टूटा था। वहां पर स्टेट वेयर हाउस का कर्मचारी प्रदीप जिसकी देखरेख में गेहूं का स्टॉक रखा हुआ है, उसने खुद कबूला था कि उससे गलती हो गई है। उसने गेहूं पर पानी डाला था।
यदि शेड टूटा होता तो वह उसी दिन बता देता कि शेड टूटा है और उन्हें वह शेड भी दिखाता। जांच टीम ने उस कर्मचारी के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए गंभीरता से जांच नहीं की है। हालांकि अभी एफसीआई की ओर से जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। जिससे यह साफ होगा कि वह भीगा हुआ गेहूं गोदाम से बिना जांच किए कैसे निकला।
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शिकायकर्ता विकास ने बताया कि एक ऑडियो में स्टेट वेयर हाउस का कर्मचारी प्रदीप मान रहा था कि उसने गेहूं पर पानी डाला है। जब वह 27 जनवरी को गोदाम पर डीएफएससी के निरीक्षक के साथ गया तो उसने कर्मचारी से पूछा था कि झूठ मत बोलना तूने गरीबों के राशन पर पानी डलवाया है न, इस सवाल पर पहले तो कर्मचारी ने कहा कि स्प्रे मारा था, लेकिन फिर वह बोला चलो जी मैंने डलवा दिया है पानी, अब इस मामले को निपटा दो। ऐसे में एक तरफ तो कर्मचारी अपना गुनाह कबूल कर रहा है और जांच टीम उसे बेगुनाह बता रही है।
जिसकी निगरानी में स्टॉक रखा था गेहूं, उसे ही जांच टीम में कर लिया शामिल
इस मामले में यह भी सामने आया है कि इस गोदाम पर दो महीने पहले जो उस स्टॉक की देखरेख कर रहा था। भीगा गेहूं बाहर आने के बाद स्टेट वेयर हाउस के अधिकारियों ने उसे ही जांच टीम में शामिल कर दिया। जो गेहूं भीगा हुआ है। उस पर पहले भी पानी मारा गया है। वह गेहूं अंकुरित हो चुका था। इस कारण जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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ये उठ रहे सवाल
- शेड टूटा था तो उसे समय पर ठीक क्यों नहीं कराया?
- शेड टूटा था तो पिछले कई दिनों से बारिश हुई ही नहीं, गेहूं कैसे भीगा?
- समय पर उच्च अधिकारियों को शेड टूटने की जानकारी क्यों नहीं दी?
- यदि कर्मचारी को पता था कि शेड टूटा है और गेहूं भीगा है तो उसने गेहूं राशन डिपो पर क्यों जाने दिया?
- एफसीआई के कर्मचारी ने भी गेहूं की जांच क्यों नहीं की?
- जब शिकायतकर्ता गोदाम पर आया था तो उस दौरान शेड टूटने के बारे में क्यों नहीं बताया
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वर्जन
टीम की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शेड टूटा हुआ था। यदि कर्मचारी ने किसी के सामने अपनी गलती मानी है तो इसकी भी जांच की जाएगी। फिलहाल भीगा हुआ गेहूं बदलवा दिया है।
विशाल दहिया, डीएम, स्टेट वेयर हाउस पानीपत
स्टेट वेयर हाउस के डीएम का कहना है कि टीम ने जांच में बताया कि घीड़ गांव में जो गोदाम बना है। जहां से यह गेहूं आया था। वहां का शेड टूटा था। इस कारण गेहूं भीग गया। इस रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता विकास का कहना है कि विभाग ने खानापूर्ति के लिए जांच टीम बनाई थी। टीम ने इस मामले को दबाने व कर्मचारी को कार्रवाई से बचाने के लिए ऐसी रिपोर्ट बनाई है, क्योंकि जब वह 27 जनवरी को गोदाम में गया था तो वहां कुछ नहीं टूटा था। वहां पर स्टेट वेयर हाउस का कर्मचारी प्रदीप जिसकी देखरेख में गेहूं का स्टॉक रखा हुआ है, उसने खुद कबूला था कि उससे गलती हो गई है। उसने गेहूं पर पानी डाला था।
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यदि शेड टूटा होता तो वह उसी दिन बता देता कि शेड टूटा है और उन्हें वह शेड भी दिखाता। जांच टीम ने उस कर्मचारी के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए गंभीरता से जांच नहीं की है। हालांकि अभी एफसीआई की ओर से जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। जिससे यह साफ होगा कि वह भीगा हुआ गेहूं गोदाम से बिना जांच किए कैसे निकला।
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शिकायकर्ता विकास ने बताया कि एक ऑडियो में स्टेट वेयर हाउस का कर्मचारी प्रदीप मान रहा था कि उसने गेहूं पर पानी डाला है। जब वह 27 जनवरी को गोदाम पर डीएफएससी के निरीक्षक के साथ गया तो उसने कर्मचारी से पूछा था कि झूठ मत बोलना तूने गरीबों के राशन पर पानी डलवाया है न, इस सवाल पर पहले तो कर्मचारी ने कहा कि स्प्रे मारा था, लेकिन फिर वह बोला चलो जी मैंने डलवा दिया है पानी, अब इस मामले को निपटा दो। ऐसे में एक तरफ तो कर्मचारी अपना गुनाह कबूल कर रहा है और जांच टीम उसे बेगुनाह बता रही है।
जिसकी निगरानी में स्टॉक रखा था गेहूं, उसे ही जांच टीम में कर लिया शामिल
इस मामले में यह भी सामने आया है कि इस गोदाम पर दो महीने पहले जो उस स्टॉक की देखरेख कर रहा था। भीगा गेहूं बाहर आने के बाद स्टेट वेयर हाउस के अधिकारियों ने उसे ही जांच टीम में शामिल कर दिया। जो गेहूं भीगा हुआ है। उस पर पहले भी पानी मारा गया है। वह गेहूं अंकुरित हो चुका था। इस कारण जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ये उठ रहे सवाल
- शेड टूटा था तो उसे समय पर ठीक क्यों नहीं कराया?
- शेड टूटा था तो पिछले कई दिनों से बारिश हुई ही नहीं, गेहूं कैसे भीगा?
- समय पर उच्च अधिकारियों को शेड टूटने की जानकारी क्यों नहीं दी?
- यदि कर्मचारी को पता था कि शेड टूटा है और गेहूं भीगा है तो उसने गेहूं राशन डिपो पर क्यों जाने दिया?
- एफसीआई के कर्मचारी ने भी गेहूं की जांच क्यों नहीं की?
- जब शिकायतकर्ता गोदाम पर आया था तो उस दौरान शेड टूटने के बारे में क्यों नहीं बताया
वर्जन
टीम की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शेड टूटा हुआ था। यदि कर्मचारी ने किसी के सामने अपनी गलती मानी है तो इसकी भी जांच की जाएगी। फिलहाल भीगा हुआ गेहूं बदलवा दिया है।
विशाल दहिया, डीएम, स्टेट वेयर हाउस पानीपत