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Karnal News: बड़ा भाई 33 लाख खर्च कर अमेरिका से डिपोर्ट हो आया, छोटा 60 हजार में दुबई पहुंच करेगा नौकरी
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गगन तलवार
करनाल। प्रदेश सरकार की योजना के तहत मजदूर, बिजली मैकेनिक, किसान, ट्रक ड्राइवर से लेकर पूर्व नेवी अधिकारी तक के बच्चे दुबई में जाकर नौकरी करेंगे। दो वर्ष का वर्क वीजा होगा। महज 60 हजार रुपये के खर्च पर सरकार विदेश भेज रही है। शनिवार को करनाल में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने ऐसे 210 युवाओं को दुबई में नौकरी के ऑफर लेटर सौंपे। वहां जाकर बाइक राइडर और वेयर हाउस वर्कर का काम करेंगे।
अमर उजाला से बातचीत में राहड़ा गांव निवासी बिजली मैकेनिक के बेटे 27 वर्षीय रवि कुमार ने बताया कि गुरुग्राम में निजी कंपनी में 22 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी थी। भाई 33 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका गया था। पिछले साल डिपोर्ट हो गया। इससे उनका सब कुछ खत्म हो गया। वह महज 60 हजार रुपये के खर्च पर दुबई जाकर नौकरी करेंगे।
जिन युवाओं को सरकार की ओर से ऑफर लेटर दिया है, उनमें से कुछ निजी कंपनी में नौकरी कर रहे थे तो कुछ बेरोजागर, पेंटर, ऑपरेटर का काम करके घर का गुजारा चला रहे थे।
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पेंटर का सपना हुआ साकार
फतेहाबाद में पेंटर का काम करने वाले संदीप सिंह अपने परिवार के पहले सदस्य हैं जो विदेश जाएंगे। उन्होंने बताया कि पिता मजदूरी करके घर चला रहे थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने दम पर विदेश नहीं जा पाए। अब अच्छी आय की उम्मीद है।
अपने दम पर नहीं जा पाए विदेश
करनाल की विकास कॉलोनी निवासी पूर्व नौसेना अधिकारी के बेटे अमित मलिक दुबई जाएंगे। वह करनाल में बीमा एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। बोले कि अब परिवार के हालात और सुधरेंगे। सरकार के प्रयास से ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत करें और फिर विदेश जाएं।
ऑस्ट्रेलिया नहीं जा पाया था
कैथल के आईटीआई पास प्रवेश का कहना है कि वह दो साल से बेरोजगार थे। उन्हें यहां काम नहीं मिला। किसान पिता होशियार सिंह ने उन्हें पढ़ाया। ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए उन्होंने फाइल लगाई थी लेकिन उस पर आपत्ति लगा दी गई थी। अब सपना साकार हो पाया है।
घर के हालात ठीक कर पाएंगेकैथल निवासी पलंबर कर्ण सिंह ने बताया कि उनके चाचा का बेटा कनाडा में और बेटी अमेरिका में है। अब सरकार उन्हें बेहद कम खर्च पर दुबई भेज रही है। वह नौवीं कक्षा से पढ़ाई के साथ काम कर रहे हैं। अब वह घर के हालात ठीक कर पाएंगे।
फाइल पर दो बार लगी आपत्ति
कैथल निवासी लैब टेक्नीशियन ललित ने बताया कि उनके रिश्तेदारों के बच्चे विदेश में हैं। उनकी भी जाने की इच्छा थी। दो बार कोशिश की लेकिन फाइल पर आपत्ति लगा दी गई। सरकार ने विदेश जाकर नौकरी का सपना पूरा कर दिया।
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करनाल। प्रदेश सरकार की योजना के तहत मजदूर, बिजली मैकेनिक, किसान, ट्रक ड्राइवर से लेकर पूर्व नेवी अधिकारी तक के बच्चे दुबई में जाकर नौकरी करेंगे। दो वर्ष का वर्क वीजा होगा। महज 60 हजार रुपये के खर्च पर सरकार विदेश भेज रही है। शनिवार को करनाल में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने ऐसे 210 युवाओं को दुबई में नौकरी के ऑफर लेटर सौंपे। वहां जाकर बाइक राइडर और वेयर हाउस वर्कर का काम करेंगे।
अमर उजाला से बातचीत में राहड़ा गांव निवासी बिजली मैकेनिक के बेटे 27 वर्षीय रवि कुमार ने बताया कि गुरुग्राम में निजी कंपनी में 22 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी थी। भाई 33 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका गया था। पिछले साल डिपोर्ट हो गया। इससे उनका सब कुछ खत्म हो गया। वह महज 60 हजार रुपये के खर्च पर दुबई जाकर नौकरी करेंगे।
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जिन युवाओं को सरकार की ओर से ऑफर लेटर दिया है, उनमें से कुछ निजी कंपनी में नौकरी कर रहे थे तो कुछ बेरोजागर, पेंटर, ऑपरेटर का काम करके घर का गुजारा चला रहे थे।
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पेंटर का सपना हुआ साकार
फतेहाबाद में पेंटर का काम करने वाले संदीप सिंह अपने परिवार के पहले सदस्य हैं जो विदेश जाएंगे। उन्होंने बताया कि पिता मजदूरी करके घर चला रहे थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने दम पर विदेश नहीं जा पाए। अब अच्छी आय की उम्मीद है।
अपने दम पर नहीं जा पाए विदेश
करनाल की विकास कॉलोनी निवासी पूर्व नौसेना अधिकारी के बेटे अमित मलिक दुबई जाएंगे। वह करनाल में बीमा एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। बोले कि अब परिवार के हालात और सुधरेंगे। सरकार के प्रयास से ट्रैवल हिस्ट्री मजबूत करें और फिर विदेश जाएं।
ऑस्ट्रेलिया नहीं जा पाया था
कैथल के आईटीआई पास प्रवेश का कहना है कि वह दो साल से बेरोजगार थे। उन्हें यहां काम नहीं मिला। किसान पिता होशियार सिंह ने उन्हें पढ़ाया। ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए उन्होंने फाइल लगाई थी लेकिन उस पर आपत्ति लगा दी गई थी। अब सपना साकार हो पाया है।
घर के हालात ठीक कर पाएंगेकैथल निवासी पलंबर कर्ण सिंह ने बताया कि उनके चाचा का बेटा कनाडा में और बेटी अमेरिका में है। अब सरकार उन्हें बेहद कम खर्च पर दुबई भेज रही है। वह नौवीं कक्षा से पढ़ाई के साथ काम कर रहे हैं। अब वह घर के हालात ठीक कर पाएंगे।
फाइल पर दो बार लगी आपत्ति
कैथल निवासी लैब टेक्नीशियन ललित ने बताया कि उनके रिश्तेदारों के बच्चे विदेश में हैं। उनकी भी जाने की इच्छा थी। दो बार कोशिश की लेकिन फाइल पर आपत्ति लगा दी गई। सरकार ने विदेश जाकर नौकरी का सपना पूरा कर दिया।