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Karnal News: बेटी के बिना घर का आंगन सूना, जैसे बुलबुल बिन गुलशन...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 07:24 AM IST
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The courtyard of the house is empty without a daughter, like Bulbul without Gulshan...
- विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने पेश की रचनाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से क्लब भवन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी।
डॉ. कमर रईस सोनीपत ने कहा, ...पल दो पल भी न फुर्सत हो घर के लिए। इकबाल पानीपत ने कहा, बेटी के बिना घर का आंगन सूना-सूना सा लगता है, बुलबुल के बिना जैसे गुलशन सूना सा लगता है। कवि संदीप शर्मा बांवरा ने हरियाणवी अंदाज में कहा, चिड़िया बोली सुण रै कागा बोण बाजरा चाला, आधी आधी फसल बांडलयां भाई बाहण संभाला।
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हरबंस लाल पथिक ने कहा, दोस्त कितने मेहरबां हैं इसमें कोई शक नहीं, कतरा कतरा दर्द मुझको हर लम्हा देते रहे। साझा विरासत संचालक व वरिष्ठ कवि प्रेम पाल सागर ने कहा, मिलाना था खाक में मुझको शौक से मिला दिया होता, पिलाना था जहर अपने हाथों से पिला दिया होता। लखबीर कौर ने कहा, गुरु मुझे न बांधते कैसे होता आभास, गुरु कारण ही मिले विष्णु नारद साथ। रामेश्वर देव ने कहा, दिन जब भी मुफलिसी में बिताता है आदमी, आवाज फिर ईश्वर को लगाता है आदमी। संजोत सिंह ने कहा, आंखों से जो खूं टपका किया, यों अपने मन को हल्का किया।
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गुलाब सिंह फक्कर ने कहा, गमों के दरिया में अय्याशी ढूढ़ता है, ज्यादा नहीं बस जरा सी ढूंढ़ता है। ममता प्रवीण ने कहा, पलकों पे मेरी उम्मीद के जुनून टिमटिमाएं तो हैं, रूठे हैं मगर मेरी महफिल में आए तो हैं। सचिन पाल दिवाना ने कहा, बिखर चुका तिनका तिनका अब होश सभांलू तो क्या हो, भर गया अंधेरा रूह तक अब दीप जला लूं तो क्या हो।

दिलबाग सिंह ने कहा, फिर घटा सावन की जाने लगी है, तेरी याद दिल को सताने लगी है। वरिष्ठ शायर मो शाबीर खान ने देशभक्ति तराना तरन्नुम से पेश कर सबका मन मोहा। कुमारी शैजल गहलोत ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ साहित्यकारों व पूर्व ग्राम सरपंच महेंद्र फौजी की ओर से की गई। कार्यक्रम में पंकज गहलोत, राजपाल राजन, पूर्ण चंद शर्मा, हरिओम पांचाल, गुरमीत पाढ़ा, बलराज सिंह, हवीस कांबोज मधू शर्मा आदि मौजूद रहे।
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