{"_id":"611d740e8ebc3e79b36f99f8","slug":"the-colors-of-nature-forced-the-passion-for-photography-karnal-news-knl80338373","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रकृति के रंगों ने किया मजबूर...फोटोग्राफी का चढ़ा जुनून","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रकृति के रंगों ने किया मजबूर...फोटोग्राफी का चढ़ा जुनून
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रकृति की खूबसूरती और इसके विभिन्न रंगों को हर कोई कैमरे में कैद करना चाहता है। कोई शौक के लिए फोटोग्राफी कर रहा है तो कोई इसे करियर के रूप में अपनाकर मुकाम हासिल कर चुका है। ऐसे ही करनाल शहर के कई युवा हैं जिनके लिए फोटोग्राफी पेशा नहीं बल्कि जुनून है। इन युवाओं की कहानी थ्री इडियट फिल्म के फरहान से थोड़ी अलग है। अंतर बस इतना है कि फरहान ने अपने जुनून के चलते पेशा छोड़ दिया था लेकिन ये युवा अपने पेशे के साथ-साथ जुनून को भी जिंदा रखे हुए हैं। इन युवाओं ने बताया कि आज घूमते-फिरते लोग फोटोग्राफी करते नजर आते हैं लेकिन बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए प्रोफेशनल कैमरे के साथ कई बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है।
इंजीनियरिंग के साथ-साथ फोटोग्राफी भी
वैसे तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और नौ साल से फोटोग्राफी कर रहा हूं। जब 16 साल का था तब कंप्यूटर के वॉलपेपर को देखकर फोटोग्राफी की रुचि पैदा हुई। तभी से मैंने रेंडम और एरियल फोटोग्राफी शुरू की। मेरे पिता के चाहने पर डीयू से इंजीनियरिंग की। इंजीनियर बनने के बाद भी फोटोग्राफी जारी रखी। पिछले पांच साल में उत्तर भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए और दुबई में ड्रोन शूट द्वारा फोटोग्राफी की। इसके लिए मुझे खिताब भी मिले हैं।
-दिव्यांशु गुलाटी
पहली सैलेरी से खरीदा था कैमेरा
एक मीडिया ग्रुप में एसोसिएट प्रोड्यूसर के पद पर कार्य कर रही हूं। लेकिन सात साल से फोटोग्राफी का जुनून है। मुझे कॉलेज के दिनों में प्रकृति की फोटोग्राफी करना बेहंद पसंद था, लेकिन कैमरा न होने से मैं बेहतरीन फोटोग्राफी नहीं कर पाती थी। मैंने अपने पेशे पर ध्यान दिया और एसोसिएट प्रोड्यूसर बनी। पहली सैलेरी से मैंने कैमरा खरीदा। अब सप्ताह में दो दिन मैं फोटोग्राफी करती हूं। मेरी तस्वीरें कई ऑनलाइन समाचारों या फोटो संग्रह में चयनित होती हैं।
विज्ञापन
-पल्लवी
स्ट्रीट फोटोग्राफर बना तो समझे जिंदगी के मायने
दो साल से स्ट्रीट फोटोग्राफी कर रहा हूं। फोटोग्राफी के माध्यम से मैंने हर एक तस्वीर में अपनी जिंदगी के मायने समझे हैं। एक बार मैंने रेंडम स्ट्रीट फोटो को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पेश किया। उस तस्वीर ने मुझे मेरा पहला अवार्ड दिलाया था। तब से आज तक मैं अलग-अलग जिलों में कई खिताब जीत चुका हूं। मेरा सपना दिल्ली और बैंगलुरु में फोटोग्राफी करके नाम कमाना है। मैं अपनी फोटोग्राफी के जुनून को पेशा बनाना चाहता हूूं।
-सौरव
पिता का बिजनेस भी संभाला और अपना जुनून भी
अकसर नेशनल जियोग्राफी देखा करता था, बस वहीं से फोटोग्राफी का शौक शुरू हो गया। मैंने कैमरा खरीदा और रोज सुबह जल्दी उठकर सैर पर जाने लगा। प्रकृति के रंगों को कैमरे में कैद करने को मजबूर हो गया। 2016 में मैंने नेशनल जियोग्राफी द्वारा आयोजित राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी स्ट्रीट रिफ्लेक्शन फोटो के लिए खिताब पाया। मैंने लंबे समय तक नेशनल जियोग्राफी के लिए काम किया है। पांच साल से मैंने पिता के व्यवसाय के साथ-साथ अपनी फोटोग्राफी के जुनून को भी लक्ष्य बनाया हू।
-युवराज, फोटोग्राफर
विज्ञापन
करनाल। प्रकृति की खूबसूरती और इसके विभिन्न रंगों को हर कोई कैमरे में कैद करना चाहता है। कोई शौक के लिए फोटोग्राफी कर रहा है तो कोई इसे करियर के रूप में अपनाकर मुकाम हासिल कर चुका है। ऐसे ही करनाल शहर के कई युवा हैं जिनके लिए फोटोग्राफी पेशा नहीं बल्कि जुनून है। इन युवाओं की कहानी थ्री इडियट फिल्म के फरहान से थोड़ी अलग है। अंतर बस इतना है कि फरहान ने अपने जुनून के चलते पेशा छोड़ दिया था लेकिन ये युवा अपने पेशे के साथ-साथ जुनून को भी जिंदा रखे हुए हैं। इन युवाओं ने बताया कि आज घूमते-फिरते लोग फोटोग्राफी करते नजर आते हैं लेकिन बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए प्रोफेशनल कैमरे के साथ कई बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है।
इंजीनियरिंग के साथ-साथ फोटोग्राफी भी
वैसे तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और नौ साल से फोटोग्राफी कर रहा हूं। जब 16 साल का था तब कंप्यूटर के वॉलपेपर को देखकर फोटोग्राफी की रुचि पैदा हुई। तभी से मैंने रेंडम और एरियल फोटोग्राफी शुरू की। मेरे पिता के चाहने पर डीयू से इंजीनियरिंग की। इंजीनियर बनने के बाद भी फोटोग्राफी जारी रखी। पिछले पांच साल में उत्तर भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए और दुबई में ड्रोन शूट द्वारा फोटोग्राफी की। इसके लिए मुझे खिताब भी मिले हैं।
विज्ञापन
-दिव्यांशु गुलाटी
पहली सैलेरी से खरीदा था कैमेरा
एक मीडिया ग्रुप में एसोसिएट प्रोड्यूसर के पद पर कार्य कर रही हूं। लेकिन सात साल से फोटोग्राफी का जुनून है। मुझे कॉलेज के दिनों में प्रकृति की फोटोग्राफी करना बेहंद पसंद था, लेकिन कैमरा न होने से मैं बेहतरीन फोटोग्राफी नहीं कर पाती थी। मैंने अपने पेशे पर ध्यान दिया और एसोसिएट प्रोड्यूसर बनी। पहली सैलेरी से मैंने कैमरा खरीदा। अब सप्ताह में दो दिन मैं फोटोग्राफी करती हूं। मेरी तस्वीरें कई ऑनलाइन समाचारों या फोटो संग्रह में चयनित होती हैं।
विज्ञापन
-पल्लवी
स्ट्रीट फोटोग्राफर बना तो समझे जिंदगी के मायने
दो साल से स्ट्रीट फोटोग्राफी कर रहा हूं। फोटोग्राफी के माध्यम से मैंने हर एक तस्वीर में अपनी जिंदगी के मायने समझे हैं। एक बार मैंने रेंडम स्ट्रीट फोटो को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पेश किया। उस तस्वीर ने मुझे मेरा पहला अवार्ड दिलाया था। तब से आज तक मैं अलग-अलग जिलों में कई खिताब जीत चुका हूं। मेरा सपना दिल्ली और बैंगलुरु में फोटोग्राफी करके नाम कमाना है। मैं अपनी फोटोग्राफी के जुनून को पेशा बनाना चाहता हूूं।
-सौरव
पिता का बिजनेस भी संभाला और अपना जुनून भी
अकसर नेशनल जियोग्राफी देखा करता था, बस वहीं से फोटोग्राफी का शौक शुरू हो गया। मैंने कैमरा खरीदा और रोज सुबह जल्दी उठकर सैर पर जाने लगा। प्रकृति के रंगों को कैमरे में कैद करने को मजबूर हो गया। 2016 में मैंने नेशनल जियोग्राफी द्वारा आयोजित राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी स्ट्रीट रिफ्लेक्शन फोटो के लिए खिताब पाया। मैंने लंबे समय तक नेशनल जियोग्राफी के लिए काम किया है। पांच साल से मैंने पिता के व्यवसाय के साथ-साथ अपनी फोटोग्राफी के जुनून को भी लक्ष्य बनाया हू।
-युवराज, फोटोग्राफर