{"_id":"68ffdccf9426e8deb003cb24","slug":"syrup-testing-stalled-after-a-week-report-still-pending-karnal-news-c-18-knl1008-767918-2025-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: सप्ताहभर बाद सिरप जांच ठप, अब तक रिपोर्ट भी नहीं आई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: सप्ताहभर बाद सिरप जांच ठप, अब तक रिपोर्ट भी नहीं आई
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में कफ सिरप की जांच अभियान अब ठप पड़ चुकी है। 7 अक्तूबर को शुरू हुई कार्रवाई केवल सप्ताहभर ही चली और फिर सब कुछ सामान्य हो गया है। इसके बाद से न तो किसी फैक्टरी में टीम गई और न ही किसी मेडिकल स्टोर की जांच हुई। 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक लिए गए सिरप सैंपलों की रिपोर्ट तक नहीं आई है। अब शायद विभाग किसी अगले हादसे का इंतजार करने लगा है।
कफ सिरप की बिक्री पर सख्ती के सरकारी दावे अब केवल कागजों तक सीमित दिख रहे हैं। जिले में करीब 15 फैक्टरियों और दो हजार मेडिकल स्टोर हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 11 फैक्टरियों और 20 मेडिकल स्टोरों की ही जांच हो पाई है। बाकी सभी जगह जांच के नाम पर सन्नाटा है। इसी के साथ स्वीकृत दो औषधि नियंत्रण अधिकारियों में से एक पद अब भी खाली था। पहले एक ही अधिकारी के भरोसे जांच चल रही थी, लेकिन नए एसडीसीओ की नियुक्ति होने के बाद भी न तो अभियान में तेजी आई और न ही रिपोर्ट जारी हुई। इस सुस्ती ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों की मानें तो कई फैक्टरियों में सिरप का स्टॉक शून्य मिला था, जबकि कुछ लिए गए नमूने लैब में लंबित हैं। रिपोर्ट आने में 15 दिन से अधिक का समय लग चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अगर जांच में कफ सिरप में पीजी और डीईजी की मात्रा अधिक पाई गई तो बच्चों के लिए कितना जानलेवा साबित हो सकते हैं। इससे बच्चों को किडनी और लिवर को गहरा प्रभाव डाल उनकी जान जोखिम में आ सकती है। अभिभावकों का कहना है कि विभाग की यह ढिलाई सीधे बच्चों की जान से खिलवाड़ है। कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी निगरानी और सैंपलिंग का ठप पड़ जाना इस बात का प्रमाण है कि जांच केवल दिखावे तक सीमित रह गई है।
- बीते दिनों में अन्य शहरों के डीसीओ भी आए थे जांच करने
करनाल में करीब 7 से 8 जिला औषधि अधिकारियों ने कफ सिरप की फैक्ट्रियों में जांच की थी। फैक्ट्रियों में स्टॉक शुन्य पाया गया था। वहीं, जांच केवल दस्तावेजों तक ही सीमित रह गया था। जांच अधिकारी ने कहा था कि जैसे ही सभी फैक्ट्रियों की जांच पूरी की जाएगी मेडिकल स्टोर पर सैंपलिंग की जाएगी। लेकिन हालात यह रहे कि सभी फैक्ट्रियों की ही जांच पूरी नहीं हो पाई। नतीजतन मेडिकल स्टोर पर जांच आगे बढ़ी ही नहीं। वहीं, नमूनों और कागजों की रिपोर्ट की बात की जाए तो अधिकारियों का कहना था कि रिपोर्ट आने में 15 दिन का समय लगता है लेकिन अब तक करीब 20 दिन बीत चुके हैं लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है।
विज्ञापन
ये सिरप हैं प्रतिबंधित
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स कंपनी के ब्रोमहेक्सिन हाइड्रोक्लोराइड, टरब्यूटेलिन सल्फेट, गुआइफेनेसिन व मेन्थॉल सिरप (रेस्मिकेश टीआर), शेष फार्मा कंपनी के एंब्रॉस्मोल एचसीएल, आइफेनेसिन, टरब्यूटेलिन सल्फेट और मेन्थॉल सिरप (रिलाइफ), तमिलनाडु की सेशन फार्मा कंपनी के फोल्डिफ सिरप और जमपुर स्थित केसन्स फार्मा का डेक्सट्रोयेनर्फिन सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि जैसे जैैसे सेंटर और स्टेट हेडक्वार्टर निर्देश दिए गए थे जांच की जा रही थी। वहीं, छह महीने से खाली पड़े एसडीसीओ की नियुक्ति के बाद से लगभग तीन सप्ताह से इस मामले को वही देख रहे हैं।
जिले के वरिष्ठ औषधि नियंत्रक अधिकारी सुनील चौधरी ने बताया कि जिन इंडस्ट्री में इस तरह के कफ सिरप थे तकरीबन हर फैक्टरी की सैंपलिंग और कागजी रिपोर्ट व कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य हेडक्वार्टर तक भेज चुके हैं। अब केवल परिणाम आना बाकी है। रिपोर्ट गवर्नमेंट एनालिस्ट की ओर से दी जानी है। वें जैसे ही मिलेंगी आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मेडिकल स्टोर की जांच पर बताया कि वे इसके लिए आधिकारिक रूप से चंडीगढ़ ड्रग नियंत्रक अधिकारी ही बता सकते हैं। साथ ही बताया कि मेडिकल स्टोर की जांच रुटीन में ड्रग इंस्पेक्टर की ओर से समय समय पर की जाती है।
विज्ञापन
करनाल। जिले में कफ सिरप की जांच अभियान अब ठप पड़ चुकी है। 7 अक्तूबर को शुरू हुई कार्रवाई केवल सप्ताहभर ही चली और फिर सब कुछ सामान्य हो गया है। इसके बाद से न तो किसी फैक्टरी में टीम गई और न ही किसी मेडिकल स्टोर की जांच हुई। 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक लिए गए सिरप सैंपलों की रिपोर्ट तक नहीं आई है। अब शायद विभाग किसी अगले हादसे का इंतजार करने लगा है।
कफ सिरप की बिक्री पर सख्ती के सरकारी दावे अब केवल कागजों तक सीमित दिख रहे हैं। जिले में करीब 15 फैक्टरियों और दो हजार मेडिकल स्टोर हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 11 फैक्टरियों और 20 मेडिकल स्टोरों की ही जांच हो पाई है। बाकी सभी जगह जांच के नाम पर सन्नाटा है। इसी के साथ स्वीकृत दो औषधि नियंत्रण अधिकारियों में से एक पद अब भी खाली था। पहले एक ही अधिकारी के भरोसे जांच चल रही थी, लेकिन नए एसडीसीओ की नियुक्ति होने के बाद भी न तो अभियान में तेजी आई और न ही रिपोर्ट जारी हुई। इस सुस्ती ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों की मानें तो कई फैक्टरियों में सिरप का स्टॉक शून्य मिला था, जबकि कुछ लिए गए नमूने लैब में लंबित हैं। रिपोर्ट आने में 15 दिन से अधिक का समय लग चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अगर जांच में कफ सिरप में पीजी और डीईजी की मात्रा अधिक पाई गई तो बच्चों के लिए कितना जानलेवा साबित हो सकते हैं। इससे बच्चों को किडनी और लिवर को गहरा प्रभाव डाल उनकी जान जोखिम में आ सकती है। अभिभावकों का कहना है कि विभाग की यह ढिलाई सीधे बच्चों की जान से खिलवाड़ है। कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी निगरानी और सैंपलिंग का ठप पड़ जाना इस बात का प्रमाण है कि जांच केवल दिखावे तक सीमित रह गई है।
विज्ञापन
- बीते दिनों में अन्य शहरों के डीसीओ भी आए थे जांच करने
करनाल में करीब 7 से 8 जिला औषधि अधिकारियों ने कफ सिरप की फैक्ट्रियों में जांच की थी। फैक्ट्रियों में स्टॉक शुन्य पाया गया था। वहीं, जांच केवल दस्तावेजों तक ही सीमित रह गया था। जांच अधिकारी ने कहा था कि जैसे ही सभी फैक्ट्रियों की जांच पूरी की जाएगी मेडिकल स्टोर पर सैंपलिंग की जाएगी। लेकिन हालात यह रहे कि सभी फैक्ट्रियों की ही जांच पूरी नहीं हो पाई। नतीजतन मेडिकल स्टोर पर जांच आगे बढ़ी ही नहीं। वहीं, नमूनों और कागजों की रिपोर्ट की बात की जाए तो अधिकारियों का कहना था कि रिपोर्ट आने में 15 दिन का समय लगता है लेकिन अब तक करीब 20 दिन बीत चुके हैं लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है।
विज्ञापन
ये सिरप हैं प्रतिबंधित
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स कंपनी के ब्रोमहेक्सिन हाइड्रोक्लोराइड, टरब्यूटेलिन सल्फेट, गुआइफेनेसिन व मेन्थॉल सिरप (रेस्मिकेश टीआर), शेष फार्मा कंपनी के एंब्रॉस्मोल एचसीएल, आइफेनेसिन, टरब्यूटेलिन सल्फेट और मेन्थॉल सिरप (रिलाइफ), तमिलनाडु की सेशन फार्मा कंपनी के फोल्डिफ सिरप और जमपुर स्थित केसन्स फार्मा का डेक्सट्रोयेनर्फिन सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि जैसे जैैसे सेंटर और स्टेट हेडक्वार्टर निर्देश दिए गए थे जांच की जा रही थी। वहीं, छह महीने से खाली पड़े एसडीसीओ की नियुक्ति के बाद से लगभग तीन सप्ताह से इस मामले को वही देख रहे हैं।
जिले के वरिष्ठ औषधि नियंत्रक अधिकारी सुनील चौधरी ने बताया कि जिन इंडस्ट्री में इस तरह के कफ सिरप थे तकरीबन हर फैक्टरी की सैंपलिंग और कागजी रिपोर्ट व कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य हेडक्वार्टर तक भेज चुके हैं। अब केवल परिणाम आना बाकी है। रिपोर्ट गवर्नमेंट एनालिस्ट की ओर से दी जानी है। वें जैसे ही मिलेंगी आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मेडिकल स्टोर की जांच पर बताया कि वे इसके लिए आधिकारिक रूप से चंडीगढ़ ड्रग नियंत्रक अधिकारी ही बता सकते हैं। साथ ही बताया कि मेडिकल स्टोर की जांच रुटीन में ड्रग इंस्पेक्टर की ओर से समय समय पर की जाती है।