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Karnal News: लवणीय भूमि पर उगने वाली गन्ने की किस्में होंगी चिह्नित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 07:17 AM IST
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Sugarcane varieties growing on saline land will be marked
लवणीय भूमि पर गन्ने की फसल लहलहाने की तैयारी
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- 1.62 करोड़ रुपये से क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र में बना माइक्रो प्लॉट
- इन प्लॉटों में आवश्यकतानुसार दी जा सकेगी बारिश या धूप
देव शर्मा
करनाल। उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि कई राज्यों में अब लवणग्रस्त करीब आठ लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की फसल को लहलहाने की तैयारी है। इसके लिए गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र करनाल में 1.62 करोड़ रुपये की लागत से माइक्रो प्लॉट तैयार किया गया है, जिसमें देशभर की गन्ने की किस्मों को लवणता की कसौटी पर परखा जाएगा। इसके बाद जो किस्में जिस राज्य की लवणग्रस्त मिट्टी के अनुकूल पाई जाएंगी, उन किस्मों को निखारकर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र करनाल के क्षेत्र में आने वाले राज्यों में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान आदि राज्यों में करीब 5.2 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की पैदावार होती है। जिसमें करीब आठ लाख हेक्टेयर भूमि ऐसी है, जो अलग-अलग श्रेणियों में लवणता व क्षारीयता से प्रभावित है। लवणग्रस्त भूमि में गन्ने की फसल होती तो है लेकिन उसकी पैदावार, सामान्य भूमि की अपेक्षा 50 प्रतिशत से भी कम होती है। जिसका सीधा नुकसान किसान को तो होता ही है, साथ ही चीनी मिलों को भी गन्ना कम मिल पाता है।
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इसी लवण प्रभावित भूमि में गन्ने की बेहतर पैदावार करने के लिए ऐसी गन्ना किस्मों की जरूरत है जो लवण सहनशील हों। कई ऐसी किस्में पहले से ही मौजूद हैं लेकिन उनकी पहचान नहीं हुई या फिर वह ऐसे राज्यों में हैं, जहां वह पूरी पैदावार नहीं दे पाती है। यही कारण है कि देश की गन्ना किस्मों को लवणता के विभिन्न मानकों पर परखने के लिए क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र करनाल में माइक्रो प्लॉट बनाया गया है।
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48 प्लॉटों में परखी जाएंगी कई किस्में
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पूजा ने बताया कि इस पर करीब 1.62 लाख रुपये की लागत आई है। इसमें 48 प्लॉट बनाए गए हैं, उसमें विभिन्न प्रकार के लवण मिश्रित व सामान्य जल से सिंचाई की व्यवस्था की गई है। अलग-अलग प्लॉटों में लवणता के मानकों के आधार पर मिट्टी डाली गई है। इन प्लॉटों में आवश्यकतानुसार ही बारिश या धूप दी जा सकेगी, इसे रोकने के लिए प्लॉट के ऊपर ऐसी छत तैयार की गई है, जो एक बटन दबाते ही प्लॉट के ऊपर आ जाएगी। इसी तरह से कोहरा व पाला आदि से बचाने की व्यवस्था की गई है। प्लॉटों में विभिन्न प्रकार की किस्में लगा दी गई हैं। गन्ना किस्मों का परीक्षण शुरू कर दिया गया है, परीक्षण में जो किस्में अधिक लवण सहनशील निकलेंगी, उन्हें और निखार कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लवणग्रस्त मिट्टी में पूरी क्षमता के साथ गन्ने की पैदावार ली जा सके।

आज होगा उद्घाटन
क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र करनाल के अध्यक्ष डॉ. एमएल छाबड़ा व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि 24 जुलाई को क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में पहले तो संस्थान और हितधारकों के बीच संवाद होगा। इसके बाद उपोष्ण कटिबंधीय भारत में गन्ने की टिकाऊ खेती विषय पर मंथन किया जाएगा। साथ ही यहां तैयार माइक्रो प्लॉट का उद्घाटन गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर की महानिदेशक डॉ. हेमप्रभा की ओर से किया जाएगा।
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