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विकास कार्यों में अब नहीं होगा घटिया सामग्री का इस्तेमाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 02:33 AM IST
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Substandard material will no longer be used in development works
Substandard material will no longer be used in development works
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहर के निर्माण कार्यों में अब गुणवत्तापरक सामग्री ही लगेगी, क्योंकि नगर निगम ने निगम कार्यालय में ही आधुनिक सिविल मैटीरियल टेस्टिंग लैब स्थापित कर दिया है। जिसकी शुरुआत बृहस्पतिवार को निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने की। इसमें तीन बड़ी मशीनें लगी हैं, जो सामग्री की गुणवत्ता को जांचकर बताएंगी कि कौन सी सामग्री अच्छी है और कौन सी घटिया। खास बात ये है कि यहां के इंजीनियर खुद ही निर्माण सामग्री की जांच कर सकेंगे।
निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि नगर निगम के मौजूदा कार्यालय में निर्माण सामग्री टेस्ट करने के लिए नई लैब स्थापित की गई है, इसमें मशीनों की संख्या भी पर्याप्त है। इससे पहले पुराने कार्यालय में एक छोटी लैब थी, जिसमें मशीनों की संख्या कम होने से काफी देर होती थी। बाहरी लैब से जांच करानी पड़ती थी। इस आधुनिक लैब की एक-एक मशीन को चेक किया। उन्होंने बताया कि कंप्रेसिट्व स्ट्रैंथ टेस्टिंग मशीन से इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक, ब्रिक्स और क्यूब्स की टेस्टिंग की जाएगी। हॉट एयर ओवन में सैंपल को डालकर पहले उसे ड्राइव किया जाएगा, फिर कंप्रेसिट्व स्ट्रैंथ टेस्टिंग मशीन से उसकी मजबूती जांची जाती है।
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इसके अलावा वेट मशीन से सामग्री का वजन चेक किया जाता है, जबकि स्टीव मशीन से पत्थर-बजरी को छान कर उसकी टेस्टिंग की जाएगी। सीव शेकर भी ऐसी ही अन्य मशीन है, जिसमें लगी छलनी से छोटी-बड़ी बजरी का साइज चेक किया जाएगा। मोल्ड मशीन में साइट पर ही सीमेंट-कंक्रीट के क्यूब भरे जाते हैं फिर एक अवधि के बाद इन मशीनों में डालकर स्ट्रैंथ देखी जाती है। इसके अतिरिक्त स्लंप कोन मशीन में कंक्रीट की टेस्टिंग की जाएगी, जबकि बिटुमिन एक्सट्रेक्टर में तारकोल की टेस्टिंग की जाएगी। इंपैक्ट टेस्टर मशीन में एग्रीगेट मैटीरियल यानि पत्थर-बजरी इत्यादि की टेस्टिंग की जाती है।
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टेस्टिंग का रखा जाएगा रिकॉर्ड
लैब शुरू कराने के बाद निरीक्षण भी कर लिया है। टेस्टिंग का रिकॉर्ड रखने के लिए एक प्रोफार्मा बनाने का निर्देश दिया है। जिसमें प्रतिदिन टेस्टों की रिपोर्ट भरी जाएगी। रिपोर्ट में मैटीरियल का नाम, किसकी उपस्थिति में टेस्ट किया गया। रिपोर्ट पर संबंधित जेई, एई व एक्सईएन के हस्ताक्षर होंगे। निगम की अपनी टेस्टिंग लैब से समय और खर्चे की बचत होगी तथा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
- अजय सिंह तोमर, निगमायुक्त करनाल
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