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छात्र संघ चुनाव : कॉलेजों में गरमाया माहौल

Wed, 22 Jun 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Wed, 22 Jun 2016 11:48 PM IST
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Student union elections, karnal Student union elections, changed college atmosphere, karnal
चुनाव - फोटो : file

प्रदेश सरकार ने कई साल बाद फिर से कॉलेजों मे छात्रसंघ चुनाव का ऐलान कर दिया है। चुनाव की घोषणा होते ही कॉलेज और विश्वविद्यालयों में राजनैतिक सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। चुनाव में विद्यार्थियों को अपनी ओर रिझाने के लिए कॉलेजों में प्रचार भी शुरू हो गया है। राजनीति में रूचि रखने वाले और राजनैतिक पार्टियों से जुड़े विद्यार्थियों ने कॉलेजो में दाखिलों के लिए आने वाले विद्यार्थियों के लिए हेल्प डेस्क तक शुरू कर दिए हैं।

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प्रदेश के शिक्षामंत्री रामविलास शर्मा ने प्रदेश में छात्र संघ चुनाव करवाने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही स्पष्ट किया है कि प्रधान पद का चुनाव सीधे छात्र न कर के, हर कक्षा के रिप्रेजेंटेटिव के वोट से किया जाएगा। सरकार के इस फैसले पर छात्रसंघ के नेताओं की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। कुछ का कहना है कि इससे चुनाव में एक-एक वोट को लेकर होने वाले झगड़ों पर रोक लगेगी। इसके विपरीत कुछ का कहना है कि इस प्रक्रिया से कोई भी पार्टी कक्षाओं के रिप्रेजेंटेटिव को अपने पक्ष में लेकर चुनाव की बाजी पलट सकती है।
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छात्र संघ के नेता विनय पोसवाल ने कहा कि सरकार द्वारा छात्रसंघ के चुनाव की घोषणा सराहनीय है। इससे अब प्रदेश के युवाओं को राजनीति में कॅरियर बनाने में आसानी होगी। इसके अलावा विपुल कांबोज, देवजीत समरान, सम्राट अरोड़ा, दयाल सिंह कॉलेज के प्रधान, हरमन बल, छात्र नेता नितीश कौशिक, ग्रवित सिंह आदि छात्रों ने भी सरकार के फैसले पर खुशी जाहिर की है। हांलाकि, सरकार द्वारा चुनाव में ओपन वोटिंग की बजाए अप्रत्यक्ष चुनाव करवाने पर नाराजगी भी जाहिर की है।
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वर्जन
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव का ऐलान सराहनीय है। 121 करोड़ की आबादी वाले विश्व के सबसे बड़े प्रजातांत्रिक देश को चलाने के लिए सक्रिय युवा राजनेताओं की आवश्यकता है। ऐसे नेताओं को तैयार करने के लिए छात्रसंघ चुनाव से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।
-गुरदीप राणा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद।

सरकार का हर कक्षा के रिप्रेजेंटेटिव से प्रधान पद के लिए वोट करवाने का फैसला गलत है। ऐसा सरकार ने अपने फायदे के लिए किया है। कोई भी रूलिंग पार्टी कक्षाओं के रिप्रेजेंटेटिव को अपने पक्ष में कर सकती है। सरकार को छात्रसंघ का चुनाव पंजाब विश्वविद्यालय या दिल्ली विश्वविद्यालय की तर्ज पर करवाना चाहिए।
गौरव मराठा, छात्रपति शिवाजी विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय प्रधान ।  

वर्जन
अप्रत्यक्ष तरीके से चुनाव करवाना पूंजीवाद को बढ़ावा देना है। सरकार को प्रत्यक्ष तरीके से चुनाव करवाने चाहिए। इनसो इसका विरोध करेगी। सरकार को किसी भी कीमत पर अपनो को लाभ पहुंचाने नहीं दिया जाएगा। अप्रत्यक्ष चुनाव का सीधा संबंध पूंजीपति और रूलिंग पार्टी से है।

उत्तम घणघस, इनसो के जिला प्रधान।

वर्जन
सरकार बेशक 24 घंटे के नोटिस पर चुनाव करवा ले, एनएसयूआई चुनाव लड़ने के लिए  तैयार हैं। सरकार ने चुनाव के लिए जो अप्रत्यक्ष तरीका अपनाया है, उसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। देश के अन्य राज्यों में प्रत्यक्ष तरीके से चुनाव हो रहे हैं, तो यहां भी होने चाहिए।
पंकज गाबा, पूर्व जिलाध्यक्ष एनएसयूआई, करनाल।

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