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Karnal News: सख्ती तभी जब तक मामला गरम, अब सभी नरम बच्चों की मौत के बाद लिए कफ सिरप के नमूनों की रिपोर्ट आई नहीं, जांच भी कर दी गई बंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Nov 2025 02:29 AM IST
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Strictness was maintained only till the matter heated up, now the report of cough syrup samples taken after the death of all the innocent children has not come, the investigation has also been stopped.
सख्ती तभी जब तक मामला गरम, अब सभी नरम बच्चों की मौत के बाद लिए कफ सिरप के नमूनों की रिपोर्ट आई
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद उनकी गुणवत्ता और बिक्री पर की गई सख्ती और निगरानी खत्म हो चुकी है। मेडिकल स्टोरों की जांच बंद कर दी गई है। जो जांच हुई थी उसकी रिपोर्ट भी नहीं दी गई है। सात अक्तूबर को चले कफ सिरप जांच अभियान में नई जांच तो दूर एक महीना पहले लिए नमूनों की रिपोर्ट भी अभी तक जारी नहीं हुई। इधर जिले में खांसी-जुकाम के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर बच्चे पीड़ित हैं। मेडिकल स्टोरों पर कफ सिरप की बिक्री जारी है। मांग और बढ़ गई है।
जिला औषधि विभाग ने एक महीने में केवल 20 मेडिकल स्टोरों और दवा बनाने वाली 11 फैक्टरियों का ही निरीक्षण कर नमूने लिए थी। दावा किया था कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट विभाग को नहीं मिली है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। रिपोर्ट राज्य और केंद्र के हेडक्वार्टर तक भेजी गई है। रिपोर्ट गवर्नमेंट एनालिस्ट की ओर से जारी होनी है। जैसे ही मिलेगी आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मेडिकल स्टोर की जांच पर अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में केंद्र के अधिकारी जानकारी दे पाएंगे। सामान्य तौर पर निरीक्षण और नमूनों की रिपोर्ट 10 से 15 दिन में आ जाती है।
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सरकारी अस्पतालों में रोजाना 25 से 30 खांसी जुकाम से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि पिछले 10-12 दिनों में बच्चों के कफ सिरप की बिक्री बढ़ी है।
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पीजी और डीईजी की मात्रा चेक की गई थी
पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कफ सिरप में पीजी (प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल) और डीईजी (डायएथिलीन ग्लाइकॉल) की मात्रा जांची थी। सिरप बनाने के लिए कहां से क्या सामान लिया गया, इसकी रिपोर्ट और मात्रा का भी निरीक्षण किया गया था। इन पदार्थों की मात्रा सिरप में अधिक या निर्धारित स्तर से अधिक होती है तो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इससे बच्चों को किडनी और लिवर को गहरा प्रभाव डाल उनकी जान जोखिम में आ सकती है।

11 फैक्टरियों व 20 मेडिकल स्टोर जांचे
जिले में कुल 15 फैक्टरियां हैं जिनमें से 11 की ही जांच हुई है। जिले में करीब दो हजार मेडिकल स्टोर हैं जिनमें से केवल 20 की जांच करने का आंकड़ा ही विभाग ने दिया है। इसके बाद विभाग केवल मेडिकल स्टोर की जांच के केवल दावा करता रहा है। आंकड़ा मांगे जाने पर नहीं दिए गए।

ये सिरप किए प्रतिबंधित
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स कंपनी के ब्रोमहेक्सिन हाइड्रोक्लोराइड, टरब्यूटेलिन सल्फेट, गुआइफेनेसिन व मेन्थॉल सिरप (रेस्मिकेश टीआर), शेष फार्मा कंपनी के एंब्रॉस्मोल एचसीएल, आइफेनेसिन, टरब्यूटेलिन सल्फेट और मेन्थॉल सिरप (रिलाइफ), तमिलनाडु की सेशन फार्मा कंपनी के फोल्डिफ सिरप और जमपुर स्थित केसन्स फार्मा का डेक्सट्रोयेनर्फिन सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई है।

---------------------------जांच रिपोर्ट आने के बाद हीं कुछ कह सकते हैं


जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी विकास राठी से जब मेडिकल स्टोर की आगे की जांच के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि जो नमूने पहले लिए थे, उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बता पाएंगे। वरिष्ठ जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी सुनील का कहना है कि केंद्र की तरफ से ही अब जांच हो रही है जो जांच पहले की गई थीं उनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। बाद में बोले कि जिस अधिकारी ने नमूने लिए थे वही जानकारी दे पाएंगे।
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