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Karnal News: तटों के कटाव को भरने के लिए जगाधरी से मंगवाए पत्थर
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करनाल। पश्चिमी यमुना नहर में दो जगहों पर तट के कटाव से स्थित बिगड़ने से पहले मुख्यालय के अधिकारी भी सतर्क हो गए है। कटाव को जल्द बंद कराने के लिए निदेशालय से प्रिंसिपल निदेशक की अध्यक्षता में एक टीम शुक्रवार को करनाल पहुंची। जिसमें सिंचाई विभाग के एचओडी स्पेशल, प्रिंसिपल निदेशक बीरेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर यमुना वाटर सर्विस एमएल राणा शामिल रहे। टीम ने मौके पर जाकर पूरी स्थिति का जायजा लेने के बाद विभाग के अधिकारियों से अभी तक किए गए प्रयासों की जानकारी ली।
वहीं अब अधिकारियों ने तट को मजबूत करने के लिए अब जगाधरी से पत्थर मंगवाया है। इससे पहले पानीपत से काला पत्थर मंगवाया गया था। अब जगाधरी वाले पत्थर से नहर के अंदर के हिस्से को मजबूत किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार नहर के तट को टूटे हुए चौथा दिन बीत चुका है लेकिन अभी तक अधिकारी दोनों कटाव को बंद नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में यह चिंता का विषय है। यदि कटाव और अधिक हो जाता तो स्थिति बहुत अधिक बिगड़ सकती थी। इस दौरान विभाग के एसई आजाद सिंह, एक्सईन रणवीर सिंह, मनोज कुमार सहित एसडीओ व जेई मौजूद रहे।
तीन हजार क्यूसेक कराया पानी
विदित हो कि 27 अगस्त को रेलवे ओवरब्रिज के समीप पश्चिमी यमुना नहर की स्लैब में कटाव हो गया था। जो करीब 100 फीट लंबा था। इसकी जानकारी मिलते ही विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कटाव को भरने का कार्य शुरु कर दिया। इसके बाद 28 अगस्त को नहर के दूसरी तरफ भी स्लैब में कटाव हो गया। अधिकारियों ने इन दोनों कटाव को भरने के लिए मिट्टी डाली व मिट्टी भरकर कट्टे लगाए लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण वह पानी में ही बह गए। इसके बाद अधिकारियों ने नहर में पानी के बहाव को कम कराया। पहले नहर में 12 हजार क्यूसेक के करीब पानी बह रहा था। पानी कम कराने के बाद अब नहर में करीब तीन हजार क्यूसेक पानी बह रहा है।
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नहर की स्लैब की जांच होनी चाहिए।
किसान सोहन, मुकेश, रामफल आदि का कहना है कि नहर के स्लैब का टूटना आम बात नहीं है। इस नहर का पुनर्निर्माण हुए करीब तीन वर्ष ही हुए हैं। जिसपर 202 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इतने कम समय में स्लैब का टूटा पुनर्निर्माण कार्य पर सवाल खड़े करता है कि उस दौरान नहर के स्लैब बनाने में कहीं न कहीं घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। तभी यह स्लैब टूटी है। ऐसे में उच्च अधिकारियों को इस नहर की स्लैब की जांच करानी चाहिए ताकि आगे ओर कहीं से स्लैब न टूटे।
नहर के तटों के भराव के लिए जगाधरी से पत्थर मंगवाए गए हैं। जिनसे टूटी हुई स्लैब को मजबूत किया जा रहा है। लगभग दोनों तटों का मजबूत किया गया है। थोड़ा कार्य बाकी है। जिसे जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। फिलहाल पानी का बहाव कम कराया गया है।
रणवीर सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग करनाल।
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वहीं अब अधिकारियों ने तट को मजबूत करने के लिए अब जगाधरी से पत्थर मंगवाया है। इससे पहले पानीपत से काला पत्थर मंगवाया गया था। अब जगाधरी वाले पत्थर से नहर के अंदर के हिस्से को मजबूत किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार नहर के तट को टूटे हुए चौथा दिन बीत चुका है लेकिन अभी तक अधिकारी दोनों कटाव को बंद नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में यह चिंता का विषय है। यदि कटाव और अधिक हो जाता तो स्थिति बहुत अधिक बिगड़ सकती थी। इस दौरान विभाग के एसई आजाद सिंह, एक्सईन रणवीर सिंह, मनोज कुमार सहित एसडीओ व जेई मौजूद रहे।
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तीन हजार क्यूसेक कराया पानी
विदित हो कि 27 अगस्त को रेलवे ओवरब्रिज के समीप पश्चिमी यमुना नहर की स्लैब में कटाव हो गया था। जो करीब 100 फीट लंबा था। इसकी जानकारी मिलते ही विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कटाव को भरने का कार्य शुरु कर दिया। इसके बाद 28 अगस्त को नहर के दूसरी तरफ भी स्लैब में कटाव हो गया। अधिकारियों ने इन दोनों कटाव को भरने के लिए मिट्टी डाली व मिट्टी भरकर कट्टे लगाए लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण वह पानी में ही बह गए। इसके बाद अधिकारियों ने नहर में पानी के बहाव को कम कराया। पहले नहर में 12 हजार क्यूसेक के करीब पानी बह रहा था। पानी कम कराने के बाद अब नहर में करीब तीन हजार क्यूसेक पानी बह रहा है।
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नहर की स्लैब की जांच होनी चाहिए।
किसान सोहन, मुकेश, रामफल आदि का कहना है कि नहर के स्लैब का टूटना आम बात नहीं है। इस नहर का पुनर्निर्माण हुए करीब तीन वर्ष ही हुए हैं। जिसपर 202 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इतने कम समय में स्लैब का टूटा पुनर्निर्माण कार्य पर सवाल खड़े करता है कि उस दौरान नहर के स्लैब बनाने में कहीं न कहीं घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। तभी यह स्लैब टूटी है। ऐसे में उच्च अधिकारियों को इस नहर की स्लैब की जांच करानी चाहिए ताकि आगे ओर कहीं से स्लैब न टूटे।
नहर के तटों के भराव के लिए जगाधरी से पत्थर मंगवाए गए हैं। जिनसे टूटी हुई स्लैब को मजबूत किया जा रहा है। लगभग दोनों तटों का मजबूत किया गया है। थोड़ा कार्य बाकी है। जिसे जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। फिलहाल पानी का बहाव कम कराया गया है।
रणवीर सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग करनाल।