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Karnal News: लावारिस कुत्तों की नसबंदी हुई शुरू, जरीफा फार्म व उचाना के पास बनेगा शेल्टर होम
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57....दीवान कॉलोनी में घुमते आवारा कुत्ते। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एक बार फिर से नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की नसबंदी का काम सोमवार से फिर शुरू कर दिया है। निगम अधिकारी जरीफा फार्म और ऊंचाना के पास कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के लिए जगह तलाश रहे हैं। शहर की सड़कों, गलियों से आवारा कुत्तों को पकड़वाने, नसबंदी करवाने के लिए शहर के लोग निगम के हेल्पलाइन नंबर 18001802700 पर संपर्क कर सकते हैं।
लावारिस कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद निगम की ओर से नसबंदी का काम बंद करा दिया गया था। अधिकारियों का कहना था कि एसओपी के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। अब दोबारा नसबंदी कर सामान्य कुत्तों को वापस छोड़ने और आक्रामक को शेल्टर होम में रखने के फैसले पर दोबारा से नसबंदी का काम शुरू कराया गया है।
लोग लावारिस कुत्तों के बारे में नगर निगम कार्यालय में भी आयुक्त के नाम शिकायत दे सकते हैं। निगम टीम एजेंसी को सूचना देकर संबंधित जगह से लावारिस कुत्तों को पकड़वाएगी। फरवरी से लेकर अब तक निगम की ओर से करीब 2500 आवारा कुत्तों की नसबंदी कराई जा चुकी है। शहर में एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार करीब 20 हजार कुत्ते लावारिस हैं। जिनकी नसबंदी कराई जानी है। घोघड़ीपुर के पास नगर निगम की देखरेख में सिद्धांत एजेंसी के माध्यम से कुत्तों की नसबंदी कराई जाती है। हर एक कुत्ते के ऑपरेशन और टीकाकरण पर निगम 1450 रुपये खर्च कर रहा है। नसबंदी के दौरान कुत्तों को वैक्सीनेट कर पांच दिन रखरखाव करने के बाद उन्हें स्वस्थ हालात में वहीं छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा जाता है।
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पालतू कुत्तों के काटने की भी समस्या
शहर में सिर्फ आवारा कुत्ते ही नहीं बल्कि पालतू कुत्ते भी लोगों को काट कर अपना शिकार बना रहे हैं। शहर में करीब पांच हजार लोगों ने कुत्ते तो पाल रखे हैं लेकिन इनका निगम में पंजीकरण नहीं कराया है। जिला नागरिक अस्पताल में लोग पालतू कुत्तों के काटे जाने पर इलाज कराने जरूर पहुंच रहे हैं।
शहर की सड़कों पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों के साथ पालतू कुत्तों के काटने के हर माह सैकड़ों केस सामने आ रहे हैं। इस माह में अब तक आवारा कुत्तों के काटे जाने के करीब एक हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं। इसमें से करीब दस प्रतिशत मामलों में लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा था। जुलाई में लावारिस कुत्तों के काटे जाने के 2987 केस आए थे जबकि पालतू कुत्तों के काटने के 85 केस आए थे। जून में आवारा कुत्तों से काटे जाने के एक हजार केस जबकि पालतू कुत्तों के काटने के 120 केस आए थे। इसी प्रकार मई में आवारा कुत्तों के काटने के 1064 केस और पालतू कुत्तों के काटे जाने के 200 केस आए थे।
सरल पोर्टल पर कराएं पंजीकरण
अधिकारियों का कहना है कि पालतू कुत्तों का पंजीकरण नगर निगम कार्यालय के अलावा सरल पोर्टल के माध्यम से भी कराया जा सकता है। जहां कुत्ते के मालिक के आधार कार्ड के साथ कुत्ते की फोटो और उसके वैक्सीन का सर्टिफिकेट देना होता है। पहली बार पंजीकरण के लिए 500 रुपये का शुल्क देय है। इस पंजीकरण को हर साल रिन्यू करवाना होता है। जिसके लिए 250 रुपये का शुल्क देना होता है। नगर निगम की ओर से अब पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर अभियान भी चलाया जाएगा। नगर निगम में एक भी पालतू कुत्ते का पंजीकरण नहीं है।
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कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू करा दिया गया है। अब आक्रामक कुत्तों के लिए शेल्टर होम की जगह तलाशी जा रही है। पालतू कुत्तों के पंजीकरण के बारे में भी निगम अभियान चलाएगा। इसमें लोगों को पालतू कुत्तों के पंजीकरण कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। - सुरेंद्र चोपड़ा, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम
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करनाल। एक बार फिर से नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की नसबंदी का काम सोमवार से फिर शुरू कर दिया है। निगम अधिकारी जरीफा फार्म और ऊंचाना के पास कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के लिए जगह तलाश रहे हैं। शहर की सड़कों, गलियों से आवारा कुत्तों को पकड़वाने, नसबंदी करवाने के लिए शहर के लोग निगम के हेल्पलाइन नंबर 18001802700 पर संपर्क कर सकते हैं।
लावारिस कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद निगम की ओर से नसबंदी का काम बंद करा दिया गया था। अधिकारियों का कहना था कि एसओपी के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। अब दोबारा नसबंदी कर सामान्य कुत्तों को वापस छोड़ने और आक्रामक को शेल्टर होम में रखने के फैसले पर दोबारा से नसबंदी का काम शुरू कराया गया है।
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लोग लावारिस कुत्तों के बारे में नगर निगम कार्यालय में भी आयुक्त के नाम शिकायत दे सकते हैं। निगम टीम एजेंसी को सूचना देकर संबंधित जगह से लावारिस कुत्तों को पकड़वाएगी। फरवरी से लेकर अब तक निगम की ओर से करीब 2500 आवारा कुत्तों की नसबंदी कराई जा चुकी है। शहर में एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार करीब 20 हजार कुत्ते लावारिस हैं। जिनकी नसबंदी कराई जानी है। घोघड़ीपुर के पास नगर निगम की देखरेख में सिद्धांत एजेंसी के माध्यम से कुत्तों की नसबंदी कराई जाती है। हर एक कुत्ते के ऑपरेशन और टीकाकरण पर निगम 1450 रुपये खर्च कर रहा है। नसबंदी के दौरान कुत्तों को वैक्सीनेट कर पांच दिन रखरखाव करने के बाद उन्हें स्वस्थ हालात में वहीं छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा जाता है।
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पालतू कुत्तों के काटने की भी समस्या
शहर में सिर्फ आवारा कुत्ते ही नहीं बल्कि पालतू कुत्ते भी लोगों को काट कर अपना शिकार बना रहे हैं। शहर में करीब पांच हजार लोगों ने कुत्ते तो पाल रखे हैं लेकिन इनका निगम में पंजीकरण नहीं कराया है। जिला नागरिक अस्पताल में लोग पालतू कुत्तों के काटे जाने पर इलाज कराने जरूर पहुंच रहे हैं।
शहर की सड़कों पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों के साथ पालतू कुत्तों के काटने के हर माह सैकड़ों केस सामने आ रहे हैं। इस माह में अब तक आवारा कुत्तों के काटे जाने के करीब एक हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं। इसमें से करीब दस प्रतिशत मामलों में लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा था। जुलाई में लावारिस कुत्तों के काटे जाने के 2987 केस आए थे जबकि पालतू कुत्तों के काटने के 85 केस आए थे। जून में आवारा कुत्तों से काटे जाने के एक हजार केस जबकि पालतू कुत्तों के काटने के 120 केस आए थे। इसी प्रकार मई में आवारा कुत्तों के काटने के 1064 केस और पालतू कुत्तों के काटे जाने के 200 केस आए थे।
सरल पोर्टल पर कराएं पंजीकरण
अधिकारियों का कहना है कि पालतू कुत्तों का पंजीकरण नगर निगम कार्यालय के अलावा सरल पोर्टल के माध्यम से भी कराया जा सकता है। जहां कुत्ते के मालिक के आधार कार्ड के साथ कुत्ते की फोटो और उसके वैक्सीन का सर्टिफिकेट देना होता है। पहली बार पंजीकरण के लिए 500 रुपये का शुल्क देय है। इस पंजीकरण को हर साल रिन्यू करवाना होता है। जिसके लिए 250 रुपये का शुल्क देना होता है। नगर निगम की ओर से अब पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर अभियान भी चलाया जाएगा। नगर निगम में एक भी पालतू कुत्ते का पंजीकरण नहीं है।
कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू करा दिया गया है। अब आक्रामक कुत्तों के लिए शेल्टर होम की जगह तलाशी जा रही है। पालतू कुत्तों के पंजीकरण के बारे में भी निगम अभियान चलाएगा। इसमें लोगों को पालतू कुत्तों के पंजीकरण कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। - सुरेंद्र चोपड़ा, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम

57....दीवान कॉलोनी में घुमते आवारा कुत्ते। संवाद