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Karnal News: सीने से मेरे दिल को चुराकर ले गया कोई...
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साझा विरासत कार्यक्रम में रचनाकारों ने रचनाएं पेश कर बटोरीं तालियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंजपुरा। विकास क्लब भवन में रविवार को विकास क्लब साहित्य कला मंच के मासिक साझा विरासत कार्यक्रम में रचनाकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर खूब तालियां बटोरीं। सिटीजन ग्रिवेंसिज कमेटी की चेयरपर्सन अंजू शर्मा ने कहा, कब तलक इम्तिहान दूं अब तो जान पे बन आई है, सोचती हूं जान दे दूं पर उसमें भी रुसवाई है। सुख फाउंडेशन की चेयरपर्सन गुरविंद्र कौर ने कहा कि वो अगर अच्छा लगे उसका इरादा सोच मत, जी ले रिश्ता और रिश्ते का नतीजा सोच मत...। ममता प्रवीण ने कहा कि कोई दरिया पीकर भी प्यासा, किसी को बूंद में भी दिलासा।
कमलेश पालीवाल कमल ने कहा, हम तो आपको भी पहचान लेते हैं, उड़ती चिड़िया के पर जान लेते हैं। गुरमुख सिंह ने कहा कि निगाहें नीची करके चलना तो हया का इक बहाना है, असल में देखते चलते हैं वो अपने शबाब को। हरबंस लाल पथिक ने कहा कि सीने से मेरे दिल को चुराकर ले गया कोई, चलो अच्छा हुआ जालिम बहुत परेशान करता था। महाबीर गोयल ने कहा कि दुआओं का कोई रंग नहीं होता, इन्हें देने का कोई ढंग नहीं होता।
स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक डॉ. एसके शर्मा ने नवरात्रों के आगमन को लेकर सभी को शुभकामनाएं दी। गुलाब सिंह फक्कर ने कहा, अभी जिद न कर ऐ जिंदगी, कभी फुर्सत से लिखेंगे तुझे भी। कार्यक्रम के आयोजक प्रेमपाल सागर ने बाल श्रम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, बेबसी में क्या-क्या दुख उठा रहा बचपन, जुल्म की चक्की में पीसा जा रहा बचपन। रामेश्वर देव ने कहा कि दिल में तमन्ना है और जिगर में हौसला मेरे, अंधेरों में भी साथ दिया तूने ए खुदा मेरे। कवि मनोज मधुरभाषी ने कहा, हवाओं ने हमको हंसाना छोड़ दिया। सचिन पाल दीवाना ने कहा कि दर्द अब दर्द न रहा...। इस मौके पर राजपाल रोजड़ा, अंशुल राणा, हरिओम पांचाल, गुरमीत, सुरेश भाना, कपिल शर्मा व सुरेंद्र मचल मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुंजपुरा। विकास क्लब भवन में रविवार को विकास क्लब साहित्य कला मंच के मासिक साझा विरासत कार्यक्रम में रचनाकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर खूब तालियां बटोरीं। सिटीजन ग्रिवेंसिज कमेटी की चेयरपर्सन अंजू शर्मा ने कहा, कब तलक इम्तिहान दूं अब तो जान पे बन आई है, सोचती हूं जान दे दूं पर उसमें भी रुसवाई है। सुख फाउंडेशन की चेयरपर्सन गुरविंद्र कौर ने कहा कि वो अगर अच्छा लगे उसका इरादा सोच मत, जी ले रिश्ता और रिश्ते का नतीजा सोच मत...। ममता प्रवीण ने कहा कि कोई दरिया पीकर भी प्यासा, किसी को बूंद में भी दिलासा।
कमलेश पालीवाल कमल ने कहा, हम तो आपको भी पहचान लेते हैं, उड़ती चिड़िया के पर जान लेते हैं। गुरमुख सिंह ने कहा कि निगाहें नीची करके चलना तो हया का इक बहाना है, असल में देखते चलते हैं वो अपने शबाब को। हरबंस लाल पथिक ने कहा कि सीने से मेरे दिल को चुराकर ले गया कोई, चलो अच्छा हुआ जालिम बहुत परेशान करता था। महाबीर गोयल ने कहा कि दुआओं का कोई रंग नहीं होता, इन्हें देने का कोई ढंग नहीं होता।
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स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के पूर्व निदेशक डॉ. एसके शर्मा ने नवरात्रों के आगमन को लेकर सभी को शुभकामनाएं दी। गुलाब सिंह फक्कर ने कहा, अभी जिद न कर ऐ जिंदगी, कभी फुर्सत से लिखेंगे तुझे भी। कार्यक्रम के आयोजक प्रेमपाल सागर ने बाल श्रम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, बेबसी में क्या-क्या दुख उठा रहा बचपन, जुल्म की चक्की में पीसा जा रहा बचपन। रामेश्वर देव ने कहा कि दिल में तमन्ना है और जिगर में हौसला मेरे, अंधेरों में भी साथ दिया तूने ए खुदा मेरे। कवि मनोज मधुरभाषी ने कहा, हवाओं ने हमको हंसाना छोड़ दिया। सचिन पाल दीवाना ने कहा कि दर्द अब दर्द न रहा...। इस मौके पर राजपाल रोजड़ा, अंशुल राणा, हरिओम पांचाल, गुरमीत, सुरेश भाना, कपिल शर्मा व सुरेंद्र मचल मौजूद रहे।
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