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Karnal News: लड्डू गोपाल को कोई सखा तो कोई भाई मान बांधता है राखी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Aug 2024 03:21 PM IST
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Some consider Laddu Gopal as a friend and some as a brother. Rakhi is tied to him.
- घरों में विराजते हैं अपने-अपने लड्डू गोपाल, जन्माष्टमी पर पूजन की विशेष तैयारियां
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कन्हैया की मनमोहक छवि भक्तों के दिलोदिमाग में बसी है। उनके अलग-अलग रूप हैं। कोई उन्हें अपना बेटा तो कोई सखा मानकर पूजता है, तो कोई अपना पिता मानता है। कोई भाई समझकर राखी बांधता है। फिलहाल अपने ईष्टदेव कृष्ण की जन्माष्टमी मनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए भक्तों ने कान्हा का सुंदर शृंगार करवाया है। पहली बार गाय का भी शृंगार करवाया गया है। कान्हा जी के माथे पर सजाने के लिए मोर पंख भी खरीदे हैं। हर किसी के अपने लड्डू गोपाल हैं, जो उनकी श्रद्धा का केंद्र हैं। भक्त उनकी सेवा में जुटे हैं।

भाई हैं मेरे लड्डू गोपाल
राम गली की रजनी कहती हैं कि लड्डू गोपाल वो 2009 में अपने घर लेकर आए थे, तब से आज तक उनको भाई के रूप में मानते हुए राखी बांधती हूं और कान्हा जी भी भाई का फर्ज अदा करते हुए हर वक्त मेरी रक्षा करते हैं। हम चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत में क्यों न हों कान्हा जी बाहर निकालते हैं।
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बेटे के रूप में अपना रही हूं

दनियालपुर गांव निवासी बुजुर्ग माता संजोगिता का कहना है कि उन्होंने पांच साल पहले वृंदावन से कान्हा जी को लिया था, तब से उनकी बेटे के रूप में सेवा कर रही हूं। जब से मेरे घर में कान्हा जी के चरण पड़े हैं मेरे जीवन में कई चमत्कार हुए हैं। सबसे बड़ा चमत्कार हमारे घर में मेरे बड़े बेटे के जन्मदिन पर घर में पोते युवराज को मेरी झोली में डाल दिया था।
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भाई है मेरा कान्हा जी

रोड़ मोहल्ला निवासी हीरामणी ने बताया कि मैंने कान्हा जी को अपने भाई के रूप में दो साल पहले अपनाया था। पति व सास ससुर की मौत होने के बाद परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तब कान्हा ही ने मुझे सहारा दिया, तभी से लेकर अब तक कान्हा जी मुझे बड़े भाई के रूप में अंग-संग रहकर मुसीबतों में सहारा देते हैं। इन्ही को अपना सब कुछ मानती हूं।



मेरे गिरधर गोपाल मेरे कन्हैया

गुर्जर मोहल्ला निवासी दरसो देवी ने बताया कि उन्होंने जब से कान्हा जी को गुरु के रूप में धारण किया है। तभी से मेरे परिवार पर ठाकुर जी की अपार कृपा है। मोहल्ले की हम सभी महिलाएं इकट्ठा होकर प्रत्येक सप्ताह किसी न किसी घर में कीर्तन जरूर करतीं हैं। इससे एक तो भगवान जी का गुणगान होता है। दूसरा निंदा चुगली से दूर रहकर वातावरण भक्तिमय बना रहता है।



श्री खाटू श्याम है हारे का सहारा

दनियालपुर निवासी केला देवी ने बताया कि वह श्री कृष्ण जी को खाटू श्याम के रूप में पूजती हैं। वह प्रत्येक एकादशी के अवसर पर व्रत रखकर प्रभु श्याम का सिमरन करती हैं और मंदिर जरूर जाती हैं। श्री खाटू श्याम हारे का सहारा हैं, जब से उन्होंने श्याम जी को पूजना शुरू किया है उनके सभी कष्टों का निवारण होता जा रहा है। मैंने अपने जीवन की बागडोर खाटू श्याम के भरोसे छोड़ रखी है।




मेरा लड्डू गोपाल मेरा बच्चा है

गोगामेड़ी कॉलोनी निवासी आशा रानी ने बताया कि मेरा लड्डू गोपाल मेरा बच्चा है। वह उन्हें अपने बच्चे के रूप में पूजती है। मैंने 30 जनवरी 2021 को कान्हा जी को धारण किया था उसे बाद मेरे घर पोते तरुश चौहान के रूप में जन्म लिया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था क्योंकि मेरे पास परिवार में दो लड़कियों के बाद लड़का हुआ लेकिन पोते के रूप में पहली बार में ही पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
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