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Karnal News: सोशल मीडिया की लत ने चुराई नींद, जागते बीत रही रात
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग लोगों की नींद पर भारी पड़ रहा है। खासकर युवाओं में देर रात तक मोबाइल देखने की आदत अनिद्रा (इंसोम्निया) के मामलों को बढ़ा रही है। चिकित्सकों ने बताया कि देर रात तक स्क्रीन देखने से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित करती है जो नींद के लिए जरूरी होता है। इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है।
मनोचिकित्सक डॉ. निर्णय सचदेवा और डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि हर माह 200 से अधिक लोग नींद से जुड़ी समस्याओं के कारण उनके पास उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इन्हें नींद न आने, बार-बार जागने और दिनभर थकान रहने की समस्या है। इन मरीजों में युवाओं और किशोरों की संख्या अधिक है। मरीजों ने बताया कि सोशल मीडिया पर रील स्क्रॉल करते-करते रात के 1-2 बज जाते हैं। बाद में भी नींद नहीं आती।
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याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
मनोचिकित्सक डॉ. सौभाग्य का कहना है कि लगातार नींद की कमी से न सिर्फ थकान बढ़ती है बल्कि याददाश्त भी कमजोर होने लगती है। कई मामलों में लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, तनाव और चिंता बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। अधिकतर युवा ही इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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डॉक्टरों ने बताया कि कई अभिभावक अपने बच्चों को लेकर परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चों में भी देर रात मोबाइल चलाने की आदत बढ़ रही है जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ध्यान रखें
सोने और जागने का समय तय करें
सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें
रात में कैफीन या नशीले पदार्थों से दूर रहें
हल्का व्यायाम और नियमित दिनचर्या अपनाएं
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करनाल। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग लोगों की नींद पर भारी पड़ रहा है। खासकर युवाओं में देर रात तक मोबाइल देखने की आदत अनिद्रा (इंसोम्निया) के मामलों को बढ़ा रही है। चिकित्सकों ने बताया कि देर रात तक स्क्रीन देखने से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित करती है जो नींद के लिए जरूरी होता है। इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है।
मनोचिकित्सक डॉ. निर्णय सचदेवा और डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि हर माह 200 से अधिक लोग नींद से जुड़ी समस्याओं के कारण उनके पास उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इन्हें नींद न आने, बार-बार जागने और दिनभर थकान रहने की समस्या है। इन मरीजों में युवाओं और किशोरों की संख्या अधिक है। मरीजों ने बताया कि सोशल मीडिया पर रील स्क्रॉल करते-करते रात के 1-2 बज जाते हैं। बाद में भी नींद नहीं आती।
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याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
मनोचिकित्सक डॉ. सौभाग्य का कहना है कि लगातार नींद की कमी से न सिर्फ थकान बढ़ती है बल्कि याददाश्त भी कमजोर होने लगती है। कई मामलों में लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, तनाव और चिंता बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। अधिकतर युवा ही इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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डॉक्टरों ने बताया कि कई अभिभावक अपने बच्चों को लेकर परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चों में भी देर रात मोबाइल चलाने की आदत बढ़ रही है जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ध्यान रखें
सोने और जागने का समय तय करें
सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें
रात में कैफीन या नशीले पदार्थों से दूर रहें
हल्का व्यायाम और नियमित दिनचर्या अपनाएं