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Karnal News: मोबाइल छीन पढ़ाई के लिए कहा तो छोड़ दिया घर
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केस-1
मोबाइल पर गेम खेलने को मना किया तो छोड़ा घर
14 वर्षीय किशोर ऑनलाइन गेम्स का आदी हो गया था। दिन-रात मोबाइल पर गेम खेलता। माता-पिता के रोकने पर आक्रामक व्यवहार करता। समस्या बढ़ने पर माता-पिता ने डांटा और मोबाइल से दूर किया तो घर छोड़कर चला गया। काफी छानबीन करने पर दो दिन बाद दोस्त के घर से पकड़ा गया। बच्चे की काउंसिलिंग की गई। तीन सेशन के बाद किशोर की हालत में सुधार है।
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केस-2
सोशल मीडिया से तुलना से बढ़ गया तनाव
काछवा से 16 वर्षीय किशोरी के माता-पिता उसके सोशल मीडिया पर रील्स बनाने से परेशान थे। पिछले कुछ माह से बेटी निराश थी। चिंतित माता-पिता ने बेटी को फोन देने के लिए कहा कि तो लड़ने लगी। घर छोड़ने की धमकी दी। माता-पिता किशोरी को जिला कल्याण समिति में काउंसिलिंग के लिए लाए। बोले कि बेटी घर छोड़कर न भागे इसलिए काउंसिलिंग करवाना सही लगा। काउंसिलिंग में सामने आया कि वह खुद की दूसरों से तुलना करने लगी थी। सोशल मीडिया के अनुसार रहन-सहन नहीं होने पर बढ़ने लगा था।
मानसी मौर्य
करनाल। बेटे को फोन चलाने से मना करते हैं तो घर से भागने की धमकी देता था। परीक्षाओं का समय आया तो पिता ने मोबाइल ले लिया। 15 वर्षीय बेटा शाम को घर नहीं आया। बच्चे को ढूंढकर घर लाने के बाद माता-पिता उसे जिला कल्याण समिति के पास लाए। बच्चे की काउंसिलिंग की जा रही है। मोबाइल की प्रयोग पर अंकुश लगाने पर बच्चे के आक्रामक व्यवहार करने के मामले बढ़ रहे हैं। समिति के पास लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं, जिसमें मोबाइल की मना करने पर बच्चा घर छोड़कर चला गया।
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जिला कल्याण समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि ऐसे ही हर माह तीन से चार मामले देखे जा रहे हैं जिनमें बच्चा मोबाइल की लत के कारण घर को छोड़ भाग जाता है। सबसे अधिक 12 से 18 वर्ष तक के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन अब सिर्फ संपर्क का साधन नहीं रहा बल्कि किशोरों की पूरी दुनिया छोटे से स्क्रीन में सिमटती जा रही है। ऑनलाइन गेम्स, रील्स, शॉर्ट वीडियो, वर्चुअल दोस्ती और फॉलोअर्स की गिनती, यही सब उनकी प्राथमिकता बनती जा रही है। पिछले माह ही चार ऐसे मामले तो वहीं इस माह तीन मामले सामने आए, जिनमें बच्चों ने मोबाइल की लत के चलते घर छोड़ दिया। संवाद
एकल परिवार में समस्या अधिक
जिला बाल कल्याण समिति से बच्चों की परामर्शदाता व बाल संरक्षण अधिकारी गुरमीत ने बताया कि मोबाइल की लत केवल एक आदत नहीं, बल्कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है। काउंसिलिंग में पता चला कि बच्चे खुद को केवल फोन की दुनिया में रखना चाह रहे हैं, माता-पिता का कामकाजी होना और एकल परिवार उन्हें इस जाल में और भी अधिक फंसा रहा है।
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मोबाइल पर गेम खेलने को मना किया तो छोड़ा घर
14 वर्षीय किशोर ऑनलाइन गेम्स का आदी हो गया था। दिन-रात मोबाइल पर गेम खेलता। माता-पिता के रोकने पर आक्रामक व्यवहार करता। समस्या बढ़ने पर माता-पिता ने डांटा और मोबाइल से दूर किया तो घर छोड़कर चला गया। काफी छानबीन करने पर दो दिन बाद दोस्त के घर से पकड़ा गया। बच्चे की काउंसिलिंग की गई। तीन सेशन के बाद किशोर की हालत में सुधार है।
केस-2
सोशल मीडिया से तुलना से बढ़ गया तनाव
काछवा से 16 वर्षीय किशोरी के माता-पिता उसके सोशल मीडिया पर रील्स बनाने से परेशान थे। पिछले कुछ माह से बेटी निराश थी। चिंतित माता-पिता ने बेटी को फोन देने के लिए कहा कि तो लड़ने लगी। घर छोड़ने की धमकी दी। माता-पिता किशोरी को जिला कल्याण समिति में काउंसिलिंग के लिए लाए। बोले कि बेटी घर छोड़कर न भागे इसलिए काउंसिलिंग करवाना सही लगा। काउंसिलिंग में सामने आया कि वह खुद की दूसरों से तुलना करने लगी थी। सोशल मीडिया के अनुसार रहन-सहन नहीं होने पर बढ़ने लगा था।
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मानसी मौर्य
करनाल। बेटे को फोन चलाने से मना करते हैं तो घर से भागने की धमकी देता था। परीक्षाओं का समय आया तो पिता ने मोबाइल ले लिया। 15 वर्षीय बेटा शाम को घर नहीं आया। बच्चे को ढूंढकर घर लाने के बाद माता-पिता उसे जिला कल्याण समिति के पास लाए। बच्चे की काउंसिलिंग की जा रही है। मोबाइल की प्रयोग पर अंकुश लगाने पर बच्चे के आक्रामक व्यवहार करने के मामले बढ़ रहे हैं। समिति के पास लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं, जिसमें मोबाइल की मना करने पर बच्चा घर छोड़कर चला गया।
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जिला कल्याण समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि ऐसे ही हर माह तीन से चार मामले देखे जा रहे हैं जिनमें बच्चा मोबाइल की लत के कारण घर को छोड़ भाग जाता है। सबसे अधिक 12 से 18 वर्ष तक के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन अब सिर्फ संपर्क का साधन नहीं रहा बल्कि किशोरों की पूरी दुनिया छोटे से स्क्रीन में सिमटती जा रही है। ऑनलाइन गेम्स, रील्स, शॉर्ट वीडियो, वर्चुअल दोस्ती और फॉलोअर्स की गिनती, यही सब उनकी प्राथमिकता बनती जा रही है। पिछले माह ही चार ऐसे मामले तो वहीं इस माह तीन मामले सामने आए, जिनमें बच्चों ने मोबाइल की लत के चलते घर छोड़ दिया। संवाद
एकल परिवार में समस्या अधिक
जिला बाल कल्याण समिति से बच्चों की परामर्शदाता व बाल संरक्षण अधिकारी गुरमीत ने बताया कि मोबाइल की लत केवल एक आदत नहीं, बल्कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है। काउंसिलिंग में पता चला कि बच्चे खुद को केवल फोन की दुनिया में रखना चाह रहे हैं, माता-पिता का कामकाजी होना और एकल परिवार उन्हें इस जाल में और भी अधिक फंसा रहा है।