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Karnal News: स्वयं सहायता समूह से जुड़कर लिया प्रशिक्षण, अब बनीं ड्रोन दीदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jun 2025 02:34 AM IST
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She took training by joining self-help group, now she has become Drone Didi
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। कतलाहेड़ी गांव की सीता 2018 से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और प्रशिक्षण लेकर ड्रोन संचालक बनी हैं। अब वह ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं, क्योंकि ग्रामीण युवतियां भी ड्रोन संचालन सीख रही हैं। सीता करनाल के साथ-साथ पांच जिलों में ड्रोन के माध्यम से खेतों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव कर रही हैं। 15 महिलाओं वाले स्वयं सहायता समूह की प्रधान भी हैं, जिसमें वह ग्रामीण महिलाओं को बचत करना और बैंकों में लेनदेन करना सिखाती हैं।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर ग्रामीण महिलाएं भी अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं, जिसमें सीता ने गुड़गांव से ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद वह वर्तमान में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं। 2018 में स्वयं का समूह बनाकर उन्होंने महिलाओं को बैंकों में बचत करना और बैंकों में लेनदेन करना सिखाया। वह कई जिलों में ड्रोन उड़ा कर खेतों में कीटनाशक और खाद का छिड़काव करती हैं। पहले ग्रामीण महिलाएं घर से निकलते हुए डरती थीं लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सभी महिलाएं एक-दूसरे का मजबूत सहारा बन रही हैं और कई छोटे-मोटे रोजगार स्थापित कर आजीविका चला रही हैं। सीता ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं भी ड्रोन दीदी बन आत्मनिर्भर बन सकती हैं इसके लिए उन्हें केवल आत्मविश्वास की जरूरत हैं।
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सीता ने बताया कि वह हमेशा से अपने परिवार में कुछ अलग करना चाहती थी। जब सरकार की ओर से स्वयं सहायता समूह योजना महिलाओं के लिए आई तो मन बना लिया था कि अपने लिए कुछ करना है। शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था क्योंकि गांव स्तर पर महिलाओं का घर से निकलकर काम करने की इजाजत नहीं होती हैं, लेकिन समय के बदलने पर महिलाएं अपने लिए परिवार और समाज में अपनी बात रखने के लिए स्वयं को सक्षम कर रहीं है जिसमें आज वह घरेलू कामों को ही अपनी ताकत बना रोजगार कर रही हैं। वहीं उन्होंने बताया कि ड्रोन दीदी योजना से जुड़ कर गुड़गांव के पटौदी शहर में ड्रोन केंद्र से 15 दिन निशुल्क प्रशिक्षण लिया। पिछले आठ साल से ड्रोन दीदी बन खेतों में स्प्रे करने कार्य कर रही हैं। खेतों में फर्टिलाइजर, नैनो यूरिया और कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रहीं है व मार्गदर्शन कर उन्हें अपने सशक्त बनाने की राह में कार्यरत हैं।
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