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Karnal News: 15 साल में पहली बार 972 तक पहुंचा लिंगानुपात
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अधिकारियों के साथ बैठक करते अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता प्रवक्ता
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में बेटियों की संख्या बढ़ रही है। पिछले 15 वर्षों में पहली बार जिले का वार्षिक लिंगानुपात 972 तक पहुंच गया है। प्रशासन ने इसे सकारात्मक संकेत मानते हुए कम लिंगानुपात वाले गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
जिला सचिवालय में अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता की अध्यक्षता में जिला स्थायी समिति स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी-पीएनडीटी एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता ने निर्देश दिए कि पाढ़ा, काछवा तथा अन्य जिन गांवों में लिंगानुपात कम है, वहां कारणों की गहन जांच कर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं को बेटियों के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि आशा वर्कर, एएनएम, सीडीपीओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं और परिवारों को जागरूक कर सकें। जिले में एक वर्ष में 945 से 972 तक की छलांग ने उम्मीद जरूर जगाई है लेकिन प्रशासन का मानना है कि जागरूकता, सख्ती और सामुदायिक भागीदारी से ही इस सकारात्मक रफ्तार को कायम रखा जा सकता है।
-- --
2012 से 2026 तक का लिंगानुपात
वर्ष
लिंगानुपात
2012
847
2013
880
2014
886
2015
897
2016
909
2017
922
2018
934
2019
908
2020
900
2021
912
2022
903
2023
908
2024
926
2025
945
2026
972
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15 साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दिखाई दे रहा है कि हमारे यहां सुधार हुआ है। अब आगे और भी अधिक सुधार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
- डॉ. पूनम चौधरी, सिविल सर्जन
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करनाल। जिले में बेटियों की संख्या बढ़ रही है। पिछले 15 वर्षों में पहली बार जिले का वार्षिक लिंगानुपात 972 तक पहुंच गया है। प्रशासन ने इसे सकारात्मक संकेत मानते हुए कम लिंगानुपात वाले गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
जिला सचिवालय में अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता की अध्यक्षता में जिला स्थायी समिति स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी-पीएनडीटी एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
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अतिरिक्त उपायुक्त योगेश मेहता ने निर्देश दिए कि पाढ़ा, काछवा तथा अन्य जिन गांवों में लिंगानुपात कम है, वहां कारणों की गहन जांच कर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं को बेटियों के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि आशा वर्कर, एएनएम, सीडीपीओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं और परिवारों को जागरूक कर सकें। जिले में एक वर्ष में 945 से 972 तक की छलांग ने उम्मीद जरूर जगाई है लेकिन प्रशासन का मानना है कि जागरूकता, सख्ती और सामुदायिक भागीदारी से ही इस सकारात्मक रफ्तार को कायम रखा जा सकता है।
2012 से 2026 तक का लिंगानुपात
वर्ष
लिंगानुपात
2012
847
2013
880
2014
886
2015
897
2016
909
2017
922
2018
934
2019
908
2020
900
2021
912
2022
903
2023
908
2024
926
2025
945
2026
972
15 साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दिखाई दे रहा है कि हमारे यहां सुधार हुआ है। अब आगे और भी अधिक सुधार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
- डॉ. पूनम चौधरी, सिविल सर्जन