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करनाल: 'हिंद दी चादर' गीत में होंगे हरियाणा के सात ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन

Tue, 12 Apr 2022 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 12 Apr 2022 02:18 AM IST
सार

गीत की शुरुआत में सबसे पहले रोहतक का गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दिखाया गया है। गांव लाखनमाजरा के इस गुरुद्वारे में गुरु जी 13 दिन ठहरे थे। सितंबर 1675 में गुरु जी कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर हिंदू धर्म को बचाने के लिए पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे।

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Seven historical Gurdwaras of Haryana will be visited in the song Hind Di Chadar

विस्तार

प्रदेश सरकार की ओर से नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव मनाया जा रहा है। इसे लेकर सरकार की ओर से गुरु जी के जीवन और बहादुरी को समर्पित गीत भी तैयार कराया गया है। 'धन-धन गुरु तेग बहादुर, इस दुनिया दे पर्दे कज्जू युगा युगा तक हिंद दी चादर' गीत में प्रदेश के सात ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन होंगे।

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हरियाणा लोक संपर्क एवं सूचना विभाग की ओर से गीत के लिए रोहतक, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर और अंबाला के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में शूटिंग की गई है। 3.38 मिनट के इस गीत में गुरुद्वारों के दर्शन के साथ-साथ नई पीढ़ी में जोश भरता हुआ गुरु जी का जीवन भी शब्दों में बताया गया है, ताकि लोग इतिहास को जानें और उनसे प्रेरणा लेकर देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहें।
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सरकार की ओर से 24 अप्रैल को पानीपत में प्रकाश उत्सव को लेकर समागम का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को करनाल पहुंचे मुख्यमंत्री ने भी लोगों को इस समागम में पहुंचने का न्योता दिया था। गुरु तेग बहादुर जी का अधिकांश समय हरियाणा में व्यतीत हुआ। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर जाकर भक्ति के साथ-साथ शक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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रोहतक के गुरुद्वारे में 13 दिन ठहरे थे
गीत की शुरुआत में सबसे पहले रोहतक का गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दिखाया गया है। गांव लाखनमाजरा के इस गुरुद्वारे में गुरु जी 13 दिन ठहरे थे। सितंबर 1675 में गुरु जी कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर हिंदू धर्म को बचाने के लिए पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। यहां उन्होंने संगत को हिंदू धर्म में डटे रहने का संदेश दिया। इसके अलावा कैथल के गढ़ी नजीर गुुरुद्वारे में भी गुरु तेग बहादुर जी अपनी शहीदी यात्रा के दौरान ठहरे थे। इसी तरह यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारों का भी गुरु के इतिहास से संबंध है।

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’हिंद दी चादर’ गीत में होंगे #हरियाणा के सात ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन #Haryana #DIPRHaryana #PrakashPurab

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- DPR Haryana (@diprharyana) 12 Apr 2022



श्री लखनौर साहिब है माता गुजरी का जन्म स्थान
गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब अंबाला श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की पत्नी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की मां माता गुजरी का जन्म स्थान है। बाद में उनके माता-पिता करतारपुर साहिब चले गए, जहां उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी से विवाह किया। जब श्री गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी जी बिहार दौरे पर थे, वहां बाल गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी) का जन्म हुआ था। इस गुरुद्वारे में गुरु जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें आज भी विराजमान हैं।

इन गुरुद्वारों के गीत में होंगे दर्शन
गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, रोहतक
गुरुद्वारा श्री बंदा साहिब झीवरहेड़ी (करनाल)
गुरुद्वारा श्री गढ़ी साहिब, गढ़ी नजीर कैथल
गुरुद्वारा श्री थानेसर (कुरुक्षेत्र)
गुरुद्वारा श्री बुरिया साहिब, यमुनानगर
गुरुद्वारा श्री तजेवाल साहिब, यमुनानगर
गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब, अंबाला

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