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Karnal News: सेक्टर-13, घरौंडा और मिरगेन का पानी खराब
Tue, 26 Nov 2024 07:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 26 Nov 2024 07:57 AM IST
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राकेश चौहान
करनाल। सावधान, सेक्टर-13, घरौंडा और गांव मिरगेन के क्षेत्र में सप्लाई हो रहा पानी पीने लायक नहीं है। यहां के पानी में कहीं कीटाणु है और क्लोरीन की मात्रा भी अधिक है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग हर महीने जिले में अलग अलग जगहों से पानी के नमूने लेता है। इस बार अक्तूबर महीने में विभाग ने जिले में 153 जगहों से पानी के नमूने लिए गए थे। सेक्टर-13 के क्षेत्र में तीन पानी के नमूने लिए गए थे। यह तीनों फेल आए है। जिनमें क्लोरीन की मात्रा अधिक मिली है। वहीं घरौंडा क्षेत्र में पानी के पांच नमूने लिए गए थे।
यहां भी पांचों नमूने फेल आए है। इन पानी में कीटाणु मिले है। इससे अलग गांव मिरगेन के क्षेत्र में भी पानी के चार नमूने फेल आए है। यहां भी पानी में क्लोरीन की मात्रा अधिक पाई गई है। यहां का पानी पीने लायक नहीं है। इसका स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ सकता है।
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शहर में 150 के करीब ट्यूबवेल है। जिनसे घरों में पेयजल सप्लाई होता है। वहीं तीन बूस्तर स्टेशन भी लगे हैं। इससे अलग ग्रामीण क्षेत्र में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के करीब 600 ट्यूबवेल है। वहां से गांव में घर घर में पेयजल सप्लाई किया जाता है। विभाग के करीब आठ बूस्टर स्टेशन भी है। संवाद
हैजा, टाइफाइड सहित हो सकती हैं कई बीमारियां : डॉ. सैनी
मेडिसन विभाग के डॉ. ओपी सैनी ने बताया कि गंदा पानी पीने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इनमें बुखार, उल्टी, दस्त, हैजा, टाइफाइड, जॉन्डिस आदि शामिल हैं। यदि पानी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा है तो दांत रोग हो सकता है और उल्टी लग सकती है। ऐसे में साफ और स्वच्छ पानी पीना चाहिये। यहीं कहीं पर पानी साफ नहीं है तो उस पानी को उबालकर ठंडा करके पी सकते हैं।
पेयजल पर गंभीर नहीं विभाग : हरीश
अधिवक्ता हरीश आर्य का कहना है कि पेयजल के नमूने फेल आना गंभीर विषय है। यह पानी बार नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि कहीं न कहीं पानी के नमूने फेल आते ही है। इससे साफ है कि विभाग पेयजल को लेकर गंभीर नहीं है। विभाग को चाहिए कि अपने स्तर पर ही सप्ताह में एक बार पानी की जांच करनी चाहिए। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की अपनी खुद की लैब भी है। इसके बावजूद भी पानी के नमूने फेल आ रहे हैं। विभाग के अधिकारियों को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है क्योंकि अधिकारियों के दफ्तर में आरओ लगे हैं। यह पानी तो गरीब जनता को पीना है।
विभाग की ओर से पानी के नमूने लिए जाते हैं। जिन जगहों के पानी के नमूने फेल आते हैं। उसे क्षेत्र में पानी की सप्लाई करने वाले संबंधित विभाग को वह रिपोर्ट भेजी जाती है ताकि वहां सप्लाई हो रहे पेय जल को ठीक किया जा सके। - डॉ. लोकवीर, सीएमओ करनाल।
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करनाल। सावधान, सेक्टर-13, घरौंडा और गांव मिरगेन के क्षेत्र में सप्लाई हो रहा पानी पीने लायक नहीं है। यहां के पानी में कहीं कीटाणु है और क्लोरीन की मात्रा भी अधिक है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग हर महीने जिले में अलग अलग जगहों से पानी के नमूने लेता है। इस बार अक्तूबर महीने में विभाग ने जिले में 153 जगहों से पानी के नमूने लिए गए थे। सेक्टर-13 के क्षेत्र में तीन पानी के नमूने लिए गए थे। यह तीनों फेल आए है। जिनमें क्लोरीन की मात्रा अधिक मिली है। वहीं घरौंडा क्षेत्र में पानी के पांच नमूने लिए गए थे।
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यहां भी पांचों नमूने फेल आए है। इन पानी में कीटाणु मिले है। इससे अलग गांव मिरगेन के क्षेत्र में भी पानी के चार नमूने फेल आए है। यहां भी पानी में क्लोरीन की मात्रा अधिक पाई गई है। यहां का पानी पीने लायक नहीं है। इसका स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ सकता है।
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शहर में 150 के करीब ट्यूबवेल है। जिनसे घरों में पेयजल सप्लाई होता है। वहीं तीन बूस्तर स्टेशन भी लगे हैं। इससे अलग ग्रामीण क्षेत्र में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के करीब 600 ट्यूबवेल है। वहां से गांव में घर घर में पेयजल सप्लाई किया जाता है। विभाग के करीब आठ बूस्टर स्टेशन भी है। संवाद
हैजा, टाइफाइड सहित हो सकती हैं कई बीमारियां : डॉ. सैनी
मेडिसन विभाग के डॉ. ओपी सैनी ने बताया कि गंदा पानी पीने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इनमें बुखार, उल्टी, दस्त, हैजा, टाइफाइड, जॉन्डिस आदि शामिल हैं। यदि पानी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा है तो दांत रोग हो सकता है और उल्टी लग सकती है। ऐसे में साफ और स्वच्छ पानी पीना चाहिये। यहीं कहीं पर पानी साफ नहीं है तो उस पानी को उबालकर ठंडा करके पी सकते हैं।
पेयजल पर गंभीर नहीं विभाग : हरीश
अधिवक्ता हरीश आर्य का कहना है कि पेयजल के नमूने फेल आना गंभीर विषय है। यह पानी बार नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि कहीं न कहीं पानी के नमूने फेल आते ही है। इससे साफ है कि विभाग पेयजल को लेकर गंभीर नहीं है। विभाग को चाहिए कि अपने स्तर पर ही सप्ताह में एक बार पानी की जांच करनी चाहिए। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की अपनी खुद की लैब भी है। इसके बावजूद भी पानी के नमूने फेल आ रहे हैं। विभाग के अधिकारियों को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है क्योंकि अधिकारियों के दफ्तर में आरओ लगे हैं। यह पानी तो गरीब जनता को पीना है।
विभाग की ओर से पानी के नमूने लिए जाते हैं। जिन जगहों के पानी के नमूने फेल आते हैं। उसे क्षेत्र में पानी की सप्लाई करने वाले संबंधित विभाग को वह रिपोर्ट भेजी जाती है ताकि वहां सप्लाई हो रहे पेय जल को ठीक किया जा सके। - डॉ. लोकवीर, सीएमओ करनाल।