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धूल फांक रहीं साइंस और गणित की किट
कैथल
Updated Tue, 18 Feb 2014 11:39 PM IST
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सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। स्कूलों में करीब तीन वर्ष पहले विभाग मुख्यालय स्तर पर खरीद कर भेजी गईं साइंस व गणित के उपकरणों की किट आज तक खुल ही नहीं पाई हैं। अधिकतर स्कूलों में ये किट आज भी बंद बॉक्स में पड़ी हुई हैं। यदि इन्हें खोलकर बच्चों को इनके माध्यम से पढ़ाया जाए तो पढ़ाई को काफी आसान किया जा सकता है। शिकायत मिलने पर मंगलवार को सर्वशिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी ने स्कूलों में छापामारी अभियान चलाया। उन्होंने किटों की विशेष रूप से जांच की।
वर्ष 2011 में सभी स्कूलों में साइंस व गणित विषयों को पढ़ाने में प्रयोग होने वाली किट भेजी गई थीं जिसमें प्रिज्म, स्केल, मापक सहित कुल 98 प्रकार के उपकरण शामिल थे ताकि बच्चों को इन उपकरणों के माध्यम से गणित और साइंस के फार्मूले आसानी से समझ आ सकें। अध्यापक संघ ने इनकी गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान उठाया था। विभाग ने स्कूलों में किट तो भेज दीं लेकिन स्कूलों में इनका बच्चों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर स्कूलों में ये किट आज भी बंद बॉक्स में पड़ी हुई हैं।
स्कूल मुखिया को फटकार
जिला परियोजना अधिकारी सुरेंद्र मोर ने मंगलवार को जिले के स्कूलों में छापामारी कर गणित व साइंस किटों की जांच की। जांच में पता चला कि ये किट आज तक खोली ही नहीं गई हैं। उन्होंने स्कूल मुखिया को फटकार लगाते हुए किट का प्रयोग करने के आदेश दिए। जांच में राजकीय कन्या स्कूल जखौली अड्डा सहित अन्य स्कूलों में ये किट बॉक्स में बंद पड़ी मिलीं।
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नहीं मिल रहा लाभ
विद्यार्थी मनोज, अशोक, रोहन, मुसाफिर, संदीप, अनीषा, सोनिया, ममता, काजल ने बताया कि अध्यापक बोर्ड से पढ़ाते हैं। गणित व साइंस किट का प्रयोग अभी तक नहीं किया गया है।
जांच होगी : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले जिले के सभी स्कूलों को साइंस व गणित किट खोलने के आदेश जारी किए गए थे। स्कूलों को पत्र के माध्यम से भी सूचित किया गया है। बावजूद इसके स्कूल किट नहीं खोली गई हैं तो सभी स्कूलों में जांच होगी अगर किट बंद पाई गईं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
इस संबंध में अध्यापक संघ के सचिव सतबीर गोयत का कहना है कि भेजे गए उपकरणों में काफी उपकरण साईज से छोटे हैं। अध्यापकों के जहां पढ़ाने की बात हैं तो प्रैक्टिल के कोई पीडियड़ नहीं हैं। पैक्टिकल के अलग से पीरियर्ड़ निर्धारित किया जाए। ताकि बच्चों को पढ़ाने का वक्त मिल सके।
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वर्ष 2011 में सभी स्कूलों में साइंस व गणित विषयों को पढ़ाने में प्रयोग होने वाली किट भेजी गई थीं जिसमें प्रिज्म, स्केल, मापक सहित कुल 98 प्रकार के उपकरण शामिल थे ताकि बच्चों को इन उपकरणों के माध्यम से गणित और साइंस के फार्मूले आसानी से समझ आ सकें। अध्यापक संघ ने इनकी गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान उठाया था। विभाग ने स्कूलों में किट तो भेज दीं लेकिन स्कूलों में इनका बच्चों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर स्कूलों में ये किट आज भी बंद बॉक्स में पड़ी हुई हैं।
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स्कूल मुखिया को फटकार
जिला परियोजना अधिकारी सुरेंद्र मोर ने मंगलवार को जिले के स्कूलों में छापामारी कर गणित व साइंस किटों की जांच की। जांच में पता चला कि ये किट आज तक खोली ही नहीं गई हैं। उन्होंने स्कूल मुखिया को फटकार लगाते हुए किट का प्रयोग करने के आदेश दिए। जांच में राजकीय कन्या स्कूल जखौली अड्डा सहित अन्य स्कूलों में ये किट बॉक्स में बंद पड़ी मिलीं।
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नहीं मिल रहा लाभ
विद्यार्थी मनोज, अशोक, रोहन, मुसाफिर, संदीप, अनीषा, सोनिया, ममता, काजल ने बताया कि अध्यापक बोर्ड से पढ़ाते हैं। गणित व साइंस किट का प्रयोग अभी तक नहीं किया गया है।
जांच होगी : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले जिले के सभी स्कूलों को साइंस व गणित किट खोलने के आदेश जारी किए गए थे। स्कूलों को पत्र के माध्यम से भी सूचित किया गया है। बावजूद इसके स्कूल किट नहीं खोली गई हैं तो सभी स्कूलों में जांच होगी अगर किट बंद पाई गईं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
इस संबंध में अध्यापक संघ के सचिव सतबीर गोयत का कहना है कि भेजे गए उपकरणों में काफी उपकरण साईज से छोटे हैं। अध्यापकों के जहां पढ़ाने की बात हैं तो प्रैक्टिल के कोई पीडियड़ नहीं हैं। पैक्टिकल के अलग से पीरियर्ड़ निर्धारित किया जाए। ताकि बच्चों को पढ़ाने का वक्त मिल सके।