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Karnal News: संजीव पर थी दो परिवारों की जिम्मेदारी.. साढू की मौत के बाद से साली के परिवार को भी रहे थे संभाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2025 01:19 AM IST
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Sanjeev was responsible for two families. After his brother-in-law's death, he was also taking care of his sister-in-law's family.
जगदीप
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करनाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अनियंत्रित ट्रक की टक्कर से जान गंवाने वाले नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) के जोनल मैनेजर संजीव पर दो परिवारों की जिम्मेदारी थी। वह अपने परिवार के साथ गांव में ही साली मौसम के परिवार को भी संभालते थे। साढू की वर्ष 2012 में फतेहाबाद के पास अपहरण करके हत्या कर दी गई थी। साढ़े गैस एजेंसी का ट्रक चलाते थे।
संजीव ने अंग्रेजी से एमए किया था। गांव के स्कूल में पढ़ाने लगे थे। करीब 10 साल पहले गांव में ही सीएससी
सेंटर शुरू किया था। गांव के लोगों के अनुसार वह हर किसी के सुख-दुख में हमेशा आगे बढ़कर मदद के लिए तैयार रहते थे। पेंशन और फैमिली आईडी की अधिकतर समस्याओं का समाधान वह करवाते थे। कोहंड निवासी गौरव रावल ने बताया कि उनके मौसा संजीव के बाद अब दोनों परिवारों को संभालने वाला कोई भी नहीं बचा है। उन्होंने एक सप्ताह पूर्व ही उनकी बहन मीरा का रिश्ता तय किया था। शादी करने की तैयारी थी। हादसे ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं। गौरव रावल ने बताया कि 10 दिन पहले ही उनके मामा के बेटे वंश को सड़क हादसे में चोट लग गई थी। वह अपनी मौसी बेबी (संजीव की पत्नी) के साथ शामली गए हुए थे। वह दो दिन पहले ही शामली से वापस आए थे।
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संजीव के परिवार में अब उसकी पत्नी बेबी, बेटा शौर्य और बेटी पावनी हैं। बेटा शौर्य दसवीं कक्षा में पढ़ता है और बेटी नौवीं कक्षा की छात्रा है। उनके बड़े भाई ऋषिपाल हैं। एक छोटा भाई भी है। संवाद
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कैंसरग्रस्त लोगों की सहायता के लिए कार्यालय खोलने की थी तैयारी
संजीव के बचपन के दोस्त विक्रम सिंह निवासी लखनऊ ने बताया कि कोहंड गांव में उनकी बुआ का घर है। दोनों साथ में पढ़े थे। उन्होंने लखनऊ में आनंद वेलफेयर फाउंडेशन और साथी वेलफेयर फाउंडेशन नामक संस्था बना ली। उनकी संस्था कैंसरग्रस्त मरीजों के लिए काम करती है। अब वह और संजीव घरौंडा के पास संस्था का कार्यालय खोलने की तैयारी कर रहे थे। ताकि कैंसर ग्रस्त लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके।
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