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Karnal News: सर्दियों में बीमारियों से बचाता है सांधा, बाजार में बढ़ी सूखे मेवे की मांग
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- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बाजार में सूखे मेवों की हो रही खरीदारी
- पिछले साल की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक हुआ कीमतों में इजाफा
काजल पांचाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सर्दियों में परिजनों को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाए रखने के लिए घरों में सूखे मेवे से तैयार होने वाला सांधा बनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। सर्दियों के मौसम में इस बार भी खासकर कर्ण बाजार में सूखे मेवों की मांग बढ़ गई है। बदलते मौसम की सामान्य बीमारियों, जैसे खांसी, जुकाम आदि से बचने के लिए लोग इन दिनों सूखा मेवा खूब खरीद रहे हैं। बाजार में सूखे मेवों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 10-15 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसके बावजूद इनकी बिक्री बढ़ी है। बाजार में बादाम, खसखस, काजू, अखरोट, गोंद, पिस्ता और देसी घी जैसी सामग्रियां पारंपरिक व्यंजन जैसे सांधा और लड्डू बनाने के लिए खरीदी जा रही हैं।
विशेषज्ञों और महिलाओं का मानना है कि ये व्यंजन न केवल सेहतमंद रखते हैं बल्कि घर की परंपरा और संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं। गृहिणियों का कहना है कि इन व्यंजनों की जड़ें भारतीय परंपरा में गहराई तक फैली हैं, जो स्वादिष्ट तो हैं ही, साथ ही शरीर को तंदुरुस्त भी रखती हैं। वहीं, आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना का कहना है कि ये पदार्थ ठंड से बचने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए बेहद उपयुक्त हैं।
कमाई में हुआ है इजाफा
- दुकानदार जय कुमार ने बताया कि इस बार सर्दियों में सूखे मेवों की मांग काफी ज्यादा है। लोग बड़ी मात्रा में गोंद, खसखस और काजू खरीद रहे हैं। गोंद 400 रुपये किलो तक पहुंच गया है जबकि खसखस 1400 रुपये किलो बिक रहा है। खास तौर पर महिलाएं सांधा और लड्डू बनाने के लिए खरीदारी कर रही हैं। बाजार में इस समय सूखे मेवों की बिक्री हमारे अनुमान से ज्यादा हो रही है, जिससे हमारी कमाई में भी इजाफा हुआ है।
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सुखे मेवों की मांग में हुुआ है इजाफा
- दुकानदार राजा का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार सूखे मेवों की मांग कई गुना बढ़ गई है। अखरोट और पिस्ता जैसे प्रीमियम मेवे 1300 रुपये और 1000 रुपये किलो के भाव में बिक रहे हैं। इसके अलावा देसी घी और खसखस की मांग भी बढ़ी है। सूखे मेवे के साथ लोग घी जरूर खरीदते हैं क्योंकि घी के बिना सांधा हो या लड्डू दोनों में से कुछ नहीं बन सकता।
सूखे मेवे अमृत की तरह करते हैं काम
- गृहिणी विमला देवी ने बताया कि हमारी दादी-नानी के समय से सांधा और लड्डू बनाने की परंपरा चली आ रही है। यह सिर्फ स्वाद या परंपरा तक सीमित नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। सर्दियों में ये पदार्थ अमृत की तरह होते हैं। मेरे बच्चे अक्सर खांसी-जुकाम से परेशान रहते हैं इसलिए हर सर्दी गोंद, खसखस, काजू, बादाम के साथ और भी कई तरह के सूखे मेवे के लड्डू बनाती हूं क्योंकि इन व्यंजनों से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
पीढ़ियों से चली आ रही सांधा बनाने की परंपरा
- गृहिणी परवेश ने बताया कि हम वर्षों से घर में सांधा बनाते आ रहे हैं। इससे पहले घर की बुजुर्ग महिलाएं हर साल कई-कई किलो सांधा बनाती थीं, जो पूरी सर्दी खत्म नहीं होता था लेकिन बढ़ती महंगाई में अब चार से पांच किलो सांधा बनाया जाता है, जो डेढ़ से दो महीने आराम से चल जाता है जिससे घर के सदस्य बीमार नहीं होते। इसके अलावा परवेश ने बताया कि जब भी घर में नवजात का जन्म होता है तो सांधा बनाना हमारी परंपरा है। मां को इसे खिलाने से उसकी ताकत जल्दी लौट आती है। यह परंपरा हमारे परिवार में कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सूखे मेवे
- आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि सूखे मेवे सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं। ये शरीर को गर्म रखते हैं। काजू, बादाम व अखरोट जैसे सूखे मेवे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। इनमें प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने व मेटाबोलिज्म को दुरुस्त करने में मदद करते हैं और सर्दियों में बीमारियों से बचाव करने में मदद करते हैं लेकिन जिन्हें शुगर व हार्ट की समस्या हो, उन्हें इनसे परहेज करना चाहिए। नवजात की मां को खिलाने से यह कमजोरी दूर करता है जबकि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ठंड से बचाव का बेहतरीन उपाय है। इन व्यंजनों को सर्दियों में हर घर का हिस्सा बनाना चाहिए।
सामग्री मौजूदा कीमत (प्रति किलो) पिछली कीमत
बादाम 840 रुपये 700 रुपये
काजू 1000 रुपये 850 रुपये
खसखस 1400 रुपये 1300 रुपये
अखरोट 1300 रुपये 1150 रुपये
गोंद 400 रुपये 280 रुपये
पिस्ता 1000 रुपये 900 रुपये
देसी घी 700-1200 रुपये 600-1000 रुपये
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- पिछले साल की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक हुआ कीमतों में इजाफा
काजल पांचाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सर्दियों में परिजनों को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाए रखने के लिए घरों में सूखे मेवे से तैयार होने वाला सांधा बनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। सर्दियों के मौसम में इस बार भी खासकर कर्ण बाजार में सूखे मेवों की मांग बढ़ गई है। बदलते मौसम की सामान्य बीमारियों, जैसे खांसी, जुकाम आदि से बचने के लिए लोग इन दिनों सूखा मेवा खूब खरीद रहे हैं। बाजार में सूखे मेवों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 10-15 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसके बावजूद इनकी बिक्री बढ़ी है। बाजार में बादाम, खसखस, काजू, अखरोट, गोंद, पिस्ता और देसी घी जैसी सामग्रियां पारंपरिक व्यंजन जैसे सांधा और लड्डू बनाने के लिए खरीदी जा रही हैं।
विशेषज्ञों और महिलाओं का मानना है कि ये व्यंजन न केवल सेहतमंद रखते हैं बल्कि घर की परंपरा और संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं। गृहिणियों का कहना है कि इन व्यंजनों की जड़ें भारतीय परंपरा में गहराई तक फैली हैं, जो स्वादिष्ट तो हैं ही, साथ ही शरीर को तंदुरुस्त भी रखती हैं। वहीं, आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना का कहना है कि ये पदार्थ ठंड से बचने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए बेहद उपयुक्त हैं।
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कमाई में हुआ है इजाफा
- दुकानदार जय कुमार ने बताया कि इस बार सर्दियों में सूखे मेवों की मांग काफी ज्यादा है। लोग बड़ी मात्रा में गोंद, खसखस और काजू खरीद रहे हैं। गोंद 400 रुपये किलो तक पहुंच गया है जबकि खसखस 1400 रुपये किलो बिक रहा है। खास तौर पर महिलाएं सांधा और लड्डू बनाने के लिए खरीदारी कर रही हैं। बाजार में इस समय सूखे मेवों की बिक्री हमारे अनुमान से ज्यादा हो रही है, जिससे हमारी कमाई में भी इजाफा हुआ है।
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सुखे मेवों की मांग में हुुआ है इजाफा
- दुकानदार राजा का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार सूखे मेवों की मांग कई गुना बढ़ गई है। अखरोट और पिस्ता जैसे प्रीमियम मेवे 1300 रुपये और 1000 रुपये किलो के भाव में बिक रहे हैं। इसके अलावा देसी घी और खसखस की मांग भी बढ़ी है। सूखे मेवे के साथ लोग घी जरूर खरीदते हैं क्योंकि घी के बिना सांधा हो या लड्डू दोनों में से कुछ नहीं बन सकता।
सूखे मेवे अमृत की तरह करते हैं काम
- गृहिणी विमला देवी ने बताया कि हमारी दादी-नानी के समय से सांधा और लड्डू बनाने की परंपरा चली आ रही है। यह सिर्फ स्वाद या परंपरा तक सीमित नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। सर्दियों में ये पदार्थ अमृत की तरह होते हैं। मेरे बच्चे अक्सर खांसी-जुकाम से परेशान रहते हैं इसलिए हर सर्दी गोंद, खसखस, काजू, बादाम के साथ और भी कई तरह के सूखे मेवे के लड्डू बनाती हूं क्योंकि इन व्यंजनों से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
पीढ़ियों से चली आ रही सांधा बनाने की परंपरा
- गृहिणी परवेश ने बताया कि हम वर्षों से घर में सांधा बनाते आ रहे हैं। इससे पहले घर की बुजुर्ग महिलाएं हर साल कई-कई किलो सांधा बनाती थीं, जो पूरी सर्दी खत्म नहीं होता था लेकिन बढ़ती महंगाई में अब चार से पांच किलो सांधा बनाया जाता है, जो डेढ़ से दो महीने आराम से चल जाता है जिससे घर के सदस्य बीमार नहीं होते। इसके अलावा परवेश ने बताया कि जब भी घर में नवजात का जन्म होता है तो सांधा बनाना हमारी परंपरा है। मां को इसे खिलाने से उसकी ताकत जल्दी लौट आती है। यह परंपरा हमारे परिवार में कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सूखे मेवे
- आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि सूखे मेवे सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं। ये शरीर को गर्म रखते हैं। काजू, बादाम व अखरोट जैसे सूखे मेवे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। इनमें प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने व मेटाबोलिज्म को दुरुस्त करने में मदद करते हैं और सर्दियों में बीमारियों से बचाव करने में मदद करते हैं लेकिन जिन्हें शुगर व हार्ट की समस्या हो, उन्हें इनसे परहेज करना चाहिए। नवजात की मां को खिलाने से यह कमजोरी दूर करता है जबकि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ठंड से बचाव का बेहतरीन उपाय है। इन व्यंजनों को सर्दियों में हर घर का हिस्सा बनाना चाहिए।
सामग्री मौजूदा कीमत (प्रति किलो) पिछली कीमत
बादाम 840 रुपये 700 रुपये
काजू 1000 रुपये 850 रुपये
खसखस 1400 रुपये 1300 रुपये
अखरोट 1300 रुपये 1150 रुपये
गोंद 400 रुपये 280 रुपये
पिस्ता 1000 रुपये 900 रुपये
देसी घी 700-1200 रुपये 600-1000 रुपये