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Karnal News: भारतीय बैंक खातों से रुपये डॉलर में बदल गए चीन, पाकिस्तान और दुबई

Thu, 18 Sep 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 18 Sep 2025 12:55 AM IST
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Rupees converted into dollars from Indian bank accounts in China, Pakistan and Dubai
137....थाना साईबर क्राईम
गगन तलवार
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करनाल। साइबर अपराध के दौरान लोगों के बैंक खातों से निकले रुपये डॉलर में परिवर्तित होकर चीन, दुबई, पाकिस्तान और कंबोडिया तक जा रहे हैं। विदेश में बैठे साइबर ठग वारदात के लिए बैंक खाता और निशाना भी भारतीयों को बना रहे हैं। इसके लिए उनके स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए गुर्गे काम करते हैं, जो उन्हें बैंक खातों की जानकारी मुहैया कराते हैं। ये भविष्य में भी काम करते रहें, इसके लिए इन्हें इन बैंक खातों में आने वाली राशि का करीब 10 प्रतिशत तक दिया जाता है।

करनाल में चीन को किराये के बैंक खाते मुहैया कराने के चार आरोपियों के काबू आने और अन्य कई लोगों के बैंक खातों से रुपये निकले की वारदात से यह खुलासा हुआ है। पुलिस का अनुमान है कि इस वर्ष करनाल में हुई वारदातों में करीब पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि विदेश पहुंची है। पुलिस जब जांच करते हुए अंतिम कड़ी तक पहुंची तो पता चला कि एप के माध्यम से इन बैंक खातों में आई राशि के यूएस डॉलर खरीद लिए गए, जिन्हें आगे साइबर ठगों ने किसी ओर को बेचते हुए मुनाफा कमा लिया। ऐसे में विदेश में बैठे ठग का भी किसी को पता नहीं चल पाया और स्थानीय गुर्गों के कमीशन के कारण कई लोग धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। विदेश में बैठे साइबर ठग निवेश, टास्क एप, अर्ली अर्निंग जैसे कई माध्यमों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर बैंक खातों से रुपये निकालते हैं। साइबर थाना के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दूसरे दिन एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो रहा है। 2025 में अब तक 141 केस दर्ज हुए हैं।
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तो फंस जाता है बैंक खाताधारक

साइबर अपराध के बाद जब जांच होती है तो सबसे पहले पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचती है जिसके नाम पर बैंक खाता हो। साइबर थाना प्रभारी संजय कुमार का कहना है कि यहां पहुंचने पर पता चलता है कि उस व्यक्ति ने कोई वारदात नहीं की है। ऐसे में साइबर अपराध में भारतीयों के ठगे जाने से बचने के लिए हमें अपना बैंक खाता व इससे संबंधित जानकारी दूसरों को देना बंद करना होगा। जब भारतीय बैंक खाता ही नहीं मिलेगा तो विदेश ठग वारदात भी नहीं कर पाएगा।
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80 से 90 प्रतिशत राशि पहुंचती है विदेश

जिन मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरोह काम करता है, वहां साइबर अपराध की 80 से 90 प्रतिशत तक रकम विदेश पहुंचती है। क्योंकि कहीं न कहीं किसी न किसी मोड़ पर ठगों की ओर से इसे डॉलर में परिवर्तित कर लिया जाता है। साइबर क्राइम विशेषज्ञ मुकेश का कहना है कि इसके बाद पुलिस शीघ्रता से आरोपी को नहीं पकड़ पाती और जब तक एकाउंट फ्रीज होता है तब तक आरोपी रुपये भी निकाल चुका होता है।



नेपाल के रास्ते भारतीय नंबर भी कंबोडिया में पहुंचे

अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी में भारतीय मोबाइल नंबरों का भी इस्तेमाल होता है। कुरुक्षेत्र में पूर्व सैनिक के डिजिटल अरेस्ट करने के मामले के बाद हुई जांच में सामने आया कि ठगी को अंजाम देने के लिए भारत से हजारों की संख्या में सिम कार्ड नेपाल के रास्ते चीन पहुंचाता है। वहां से सिम कंबोडिया के साइबर फ्रॉड करने वालों को भेजे जाते हैं। ये सिम भारतीय नेटवर्क पर सक्रिय हो जाती हैं। इससे यह कॉल्स भारतीय नंबरों जैसे दिखते हैं। वहां फंसे भारतीयों के माध्यम से ही वारदात कराई जाती है।





एक चूक पर महज 2 सेकेंड में होता है खाता खाली

साइबर अपराध का शिकार व्यक्ति केवल 2 सेकेंड में हो सकता है। इसलिए किसी भी तरह के लालच में आने से बचें। अज्ञात कॉल और संदिग्ध टास्क व निवेश संबंधित मैसेज पर प्रतिक्रिया से पहले वैरिफाई जरूर करें। करनाल में साइबर अपराध के अब तक के मामलों में रुपये चीन, पाकिस्तान और दुबई तक गए हैं। इनमें भारतीय बैंकखातों का ही इस्तेमाल हुआ। करनाल के भी कई बैंक खातों में साइबर अपराध के माध्यम से आए रुपये विदेश पहुंचे हैं। धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। ताकि पुलिस का केंद्रीयकृत पोर्टल आप से संबंधित वारदात पर सतर्क हो जाए। - संजय कुमार, प्रभारी, साइबर थाना
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