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Karnal News: राइस मिलर ने हड़पा दो करोड़ का धान
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- मिल संचालक और उसके पार्टनर पर धोखाधड़ी का केस, मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बुधवार को में किया था स्टाॅक सत्यापन
- 8499 क्विंटल धान मिला कम
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बुधवार को तरावड़ी क्षेत्र के राइस मिलों का भौतिक स्टाॅक सत्यापन किया था जिसमें भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। शुक्रवार को तरावड़ी के एक और राइस मिल संचालक व उसके पार्टनर के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में केस दर्ज कराया है। इस पर करीब दो करोड़ रुपये के धान की हेराफेरी का आरोप है। बुधवार को भी निगदू थाने में आयुष्मान फूड गांव बोहला खालसा के खिलाफ 2.25 करोड़ रुपये से अधिक के धान की हेराफेरी करने का मामला दर्ज कराया था।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता करनाल के निरीक्षक शिव कुमार की अगुवाई में बुधवार को ही पीवी फूड तरावड़ी (राइस मिल) का भौतिक स्टाॅक सत्यापन किया गया था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एएफएसओ रविंद्र सिंह जागलान ने बताया कि 2023-24 धान खरीद सत्र के दौरान पीवी फूड्स तरावड़ी को 34806 क्विंटल 37 किलो चावल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए दी गई थी। बताते हैं कि इस धान में से राइस मिल संचालक पूर्णचंद्र ने 15500 क्विंटल धान डीएफएससी निरीक्षक को सुखाई व कुटाई के लिए दूसरे राइस मिल देव इंडस्ट्रीज सग्गा गांव को दे दिया था। ये बात राइस मिल में मौजूद मिले मुनीम दिनेश कुमार ने बताई थी।
इस धान को निकालने के बाद जब स्टाॅक का मिलान किया गया तो भी यहां 1832 क्विंटल धान कम मिला। इसके बाद पूरी टीम देव इंडस्ट्रीज सग्गा में पहुंचकर सत्यापन किया। यहां भी बताया गया कि राइस मिल मालिक पूर्णचंद निवासी गुप्ता कॉलोनी तरावड़ी व कृष्ण पाल निवासी सनौली (पानीपत) है। यहां मशीनें देव इंडस्ट्रीज की हैं, लेकिन 2023-24 में देव इंडस्ट्रीज को सीएमआर के लिए सरकारी धान आवंटित नहीं किया जा सका था, इसलिए पीवी फूड तरावड़ी से 15500 क्विंटल धान सुखाई व कुटाई के लिए लिया था। दिनेश कुमार ने बताया कि राइस मिल पूर्णचंद्र बीमार है और कृष्ण पाल बाहर गए हैं, इसलिए वह ही राइस मिल को देख रहा है। उसके सामने ही जब स्टाॅक सत्यापन किया गया तो यहां भी स्टाॅक पूरा नहीं मिला। 15500 क्विंटल धान में 6667 क्विंटल धान कम मिला।
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यानी राइस मिल को दिए गए 34806 क्विंटल 37 किलो धान में से 8499 क्विंटल धान कम पाया गया है। जिसकी कीमत एमएसपी के अनुसार एक करोड़ 87 लाख 23 हजार 203 रुपये और इसमें मंडी शुल्क व ढुलाई आदि का खर्च जोड़कर करीब दो करोड़ रुपये से अधिक बनती है। जिसे खुदबुर्द कर दिया गया है। इसके बारे में मुनीम दिनेश कुमार से पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। तरावड़ी थाने के जांच अधिकारी कर्मबीर सिंह ने बताया कि एएफएसओ रविंद्र जागलान की शिकायत पर पीवी फूड्स तरावड़ी के खिलाफ दो मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाएगी।
खुलने लगी खाद्य आपूर्ति, मंडी, राइस मिलों की सांठगांठ की परतें
जब धान की खरीद हो रही थी, उस समय भी राइस मिल, मंडी और खाद्य निरीक्षकों की सांठगांठ से अनधिकृत तरीके से खरीद व फर्जी गेटपास के मामले सामने आए थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा लीपापोती कर दी गई। बता दें कि इससे पहले खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा पहले जिले के अधिकारियों से और बाद में गैर जिलों के विभागीय अधिकारियों से भी राइस मिलों में स्टाॅक सत्यापन कराया। सबसे खास बात तो ये है कि इन विभागीय टीमों को सभी 273 राइस मिलों में सब कुछ ठीकठाक मिला था, लेकिन जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने भौतिक सत्यापन किया तो करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आ रही है।
लोगों का मानना है कि ये हेराफेरी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और मंडी समितियों की सांठगांठ के बिना संभव नहीं है। आरोप लगते रहे हैं कि राइस मिल फर्जी गेटपास ले लेते हैं, धान को पहुंचाने, उतारने, सीएमआर तैयार करने का खर्च भी ले लेते हैं, लेकिन धान नहीं खरीदते, बल्कि सीएमआर में पड़ोसी राज्यों से राशन का सस्ता चावल लाकर आपूर्ति कर देते हैं, लेकिन इस बार सरकार की सख्ती के कारण ये राइस मिल संचालक बाहर से चावल नहीं ला पा रहे हैं। शुक्रवार को इस सीजन में पीवी फूड्स सातवां ऐसा राइस मिल है, जिसके खिलाफ हेराफेरी का मामला दर्ज किया गया है।
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- 8499 क्विंटल धान मिला कम
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बुधवार को तरावड़ी क्षेत्र के राइस मिलों का भौतिक स्टाॅक सत्यापन किया था जिसमें भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। शुक्रवार को तरावड़ी के एक और राइस मिल संचालक व उसके पार्टनर के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में केस दर्ज कराया है। इस पर करीब दो करोड़ रुपये के धान की हेराफेरी का आरोप है। बुधवार को भी निगदू थाने में आयुष्मान फूड गांव बोहला खालसा के खिलाफ 2.25 करोड़ रुपये से अधिक के धान की हेराफेरी करने का मामला दर्ज कराया था।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता करनाल के निरीक्षक शिव कुमार की अगुवाई में बुधवार को ही पीवी फूड तरावड़ी (राइस मिल) का भौतिक स्टाॅक सत्यापन किया गया था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एएफएसओ रविंद्र सिंह जागलान ने बताया कि 2023-24 धान खरीद सत्र के दौरान पीवी फूड्स तरावड़ी को 34806 क्विंटल 37 किलो चावल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के लिए दी गई थी। बताते हैं कि इस धान में से राइस मिल संचालक पूर्णचंद्र ने 15500 क्विंटल धान डीएफएससी निरीक्षक को सुखाई व कुटाई के लिए दूसरे राइस मिल देव इंडस्ट्रीज सग्गा गांव को दे दिया था। ये बात राइस मिल में मौजूद मिले मुनीम दिनेश कुमार ने बताई थी।
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इस धान को निकालने के बाद जब स्टाॅक का मिलान किया गया तो भी यहां 1832 क्विंटल धान कम मिला। इसके बाद पूरी टीम देव इंडस्ट्रीज सग्गा में पहुंचकर सत्यापन किया। यहां भी बताया गया कि राइस मिल मालिक पूर्णचंद निवासी गुप्ता कॉलोनी तरावड़ी व कृष्ण पाल निवासी सनौली (पानीपत) है। यहां मशीनें देव इंडस्ट्रीज की हैं, लेकिन 2023-24 में देव इंडस्ट्रीज को सीएमआर के लिए सरकारी धान आवंटित नहीं किया जा सका था, इसलिए पीवी फूड तरावड़ी से 15500 क्विंटल धान सुखाई व कुटाई के लिए लिया था। दिनेश कुमार ने बताया कि राइस मिल पूर्णचंद्र बीमार है और कृष्ण पाल बाहर गए हैं, इसलिए वह ही राइस मिल को देख रहा है। उसके सामने ही जब स्टाॅक सत्यापन किया गया तो यहां भी स्टाॅक पूरा नहीं मिला। 15500 क्विंटल धान में 6667 क्विंटल धान कम मिला।
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यानी राइस मिल को दिए गए 34806 क्विंटल 37 किलो धान में से 8499 क्विंटल धान कम पाया गया है। जिसकी कीमत एमएसपी के अनुसार एक करोड़ 87 लाख 23 हजार 203 रुपये और इसमें मंडी शुल्क व ढुलाई आदि का खर्च जोड़कर करीब दो करोड़ रुपये से अधिक बनती है। जिसे खुदबुर्द कर दिया गया है। इसके बारे में मुनीम दिनेश कुमार से पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। तरावड़ी थाने के जांच अधिकारी कर्मबीर सिंह ने बताया कि एएफएसओ रविंद्र जागलान की शिकायत पर पीवी फूड्स तरावड़ी के खिलाफ दो मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाएगी।
खुलने लगी खाद्य आपूर्ति, मंडी, राइस मिलों की सांठगांठ की परतें
जब धान की खरीद हो रही थी, उस समय भी राइस मिल, मंडी और खाद्य निरीक्षकों की सांठगांठ से अनधिकृत तरीके से खरीद व फर्जी गेटपास के मामले सामने आए थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा लीपापोती कर दी गई। बता दें कि इससे पहले खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा पहले जिले के अधिकारियों से और बाद में गैर जिलों के विभागीय अधिकारियों से भी राइस मिलों में स्टाॅक सत्यापन कराया। सबसे खास बात तो ये है कि इन विभागीय टीमों को सभी 273 राइस मिलों में सब कुछ ठीकठाक मिला था, लेकिन जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने भौतिक सत्यापन किया तो करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आ रही है।
लोगों का मानना है कि ये हेराफेरी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और मंडी समितियों की सांठगांठ के बिना संभव नहीं है। आरोप लगते रहे हैं कि राइस मिल फर्जी गेटपास ले लेते हैं, धान को पहुंचाने, उतारने, सीएमआर तैयार करने का खर्च भी ले लेते हैं, लेकिन धान नहीं खरीदते, बल्कि सीएमआर में पड़ोसी राज्यों से राशन का सस्ता चावल लाकर आपूर्ति कर देते हैं, लेकिन इस बार सरकार की सख्ती के कारण ये राइस मिल संचालक बाहर से चावल नहीं ला पा रहे हैं। शुक्रवार को इस सीजन में पीवी फूड्स सातवां ऐसा राइस मिल है, जिसके खिलाफ हेराफेरी का मामला दर्ज किया गया है।

कुरुक्षेत्र। पटवारियों और कानूनगो को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पर पहुंचे आम आदमी पार्टी के न

कुरुक्षेत्र। पटवारियों और कानूनगो को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पर पहुंचे आम आदमी पार्टी के न

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