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अनुसंधान : एनडीआरआई ने तैयार किया हल्दी वाला घी, दर्द से देगा राहत
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देव शर्मा
करनाल। शरीर में दर्द निवारक और बीमारियों से बचाव के रूप में हल्दी वाले दूध को पीने के फायदे तो बुजुर्गों से सुने हैं लेकिन अब राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल के वैज्ञानिकों ने हल्दी वाले घी की तकनीक को भी तैयार कर दिया है, जो एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल है। यह शरीर को तो कई तरह के फायदे पहुंचाता ही है, साथ ही ये घी जल्द खराब भी नहीं होता। इससे पहले संस्थान ने अर्जुना घी भी तैयार किया है, जो खासकर हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है।
विश्व खाद्य दिवस पर एनडीआरआई द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में संस्थान के डेयरी प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों ने एक स्टाल लगाकर पीले रंग का हल्दी वाला घी (करक्यूमिन फोर्टिफाइड घी) प्रदर्शित किया है। पीएचडी के छात्र हिमांशु कुमार सिंह व मानस सरकार ने बताया कि ये अनुसंधान निदेशक डॉ.धीर सिंह के मार्गदर्शन में डेयरी प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ.डीएन यादव के प्रयोगशाला में किया गया है।
छात्रों ने बताया कि हल्दी में एक विशेष प्रकार का रसायन होता है, जिसे करक्यूमिन कहा जाता है। ये तत्व एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जिसे आमतौर पर शरीर की कोशिकाओं को खराब और नष्ट होने से बचाने में उपयोग किया जाता है। करक्यूमिन को दर्द से राहत देने, कोलेस्ट्राल कम करने व दिल संबंधी रोगों को रोकने में सहायक माना जाता है। इसी करक्यूमिन तत्व को शुद्ध देसी घी में उपयोग करके ये हल्दी वाला घी तैयार किया गया है। एंटी ऑक्सीडेंट होने के साथ साथ ये एंटी बैक्टीरियल भी है, जिसका लाभ ये है कि इसका ये गुण घी की गुणवत्ता को प्रभावित होने से रोकता है, जिससे ये घी नौ माह से एक साल तक भी रखा रहने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती, जबकि अन्य घी में छह माह के बाद उसकी गुणवत्ता में अंतर आने लगता है।
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- सदियों से चोट लगने या फिर शरीर में कहीं दर्द होने पर दूध में हल्दी मिलाकर पीने की सलाह देते आ रहे हैं, इसे देखते हुए अब एनडीआरआई ने हल्दी वाला घी तैयार किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये हल्दी वाले दूध की तरह ही शरीर में दर्द से छुटकारा दिलाने में भी सहायक होगा। इसी पहले संस्थान ने कुछ समय पहले ही हृदयरोगियों को ध्यान में रखते हुए अर्जुना घी की खास तकनीक तैयार की थी। जिसकी तकनीक एनडीआरआई से लेकर एक निजी कंपनी ने इसे बाजार में भी उतार दिया है। इसमें एक विशेष तकनीक के जरिये देसी घी में अर्जुन की छाल को मिलाया गया है, जो उच्च रक्तचाप व अन्य हृदयरोगों में काफी लाभकारी है।
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(फोटो-1002)
-एनडीआरआई ने पहले अर्जुन की छाल वाला देसी घी तैयार किया था, जिसकी तकनीक को एक निजी कंपनी को हस्तांतरित किया है, जिससे अब ये घी जन सामान्य को उपलब्ध होने लगा है, अब संस्थान काफी समय से हल्दी वाले घी पर काम कर रहा था। अब ये तकनीक तैयार कर ली है, इससे घी भी बना लिया गया है। कोई क्लीनिकल ट्रायल तो नहीं हुआ लेकिन पशुओं से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसके गुणों को परखा गया है। शरीर में बनने वाले फ्री रेडिशन कभी अधिक मात्रा में बन जाते हैं तो नुकसान करने लगते हैं, हल्दी वाला घी इनकी अधिकता को रोकने में सहायक है। ये तकनीक भी शीघ्र ही किसी न किसी कंपनी या उद्यमी को हस्तांतरित की जाएगी। इसके बाद ये हल्दी वाला घी जन सामान्य को उपलब्ध हो जाएगा।
-डॉ.धीर सिंह, निदेशक एनडीआरआई करनाल।
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करनाल। शरीर में दर्द निवारक और बीमारियों से बचाव के रूप में हल्दी वाले दूध को पीने के फायदे तो बुजुर्गों से सुने हैं लेकिन अब राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल के वैज्ञानिकों ने हल्दी वाले घी की तकनीक को भी तैयार कर दिया है, जो एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल है। यह शरीर को तो कई तरह के फायदे पहुंचाता ही है, साथ ही ये घी जल्द खराब भी नहीं होता। इससे पहले संस्थान ने अर्जुना घी भी तैयार किया है, जो खासकर हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है।
विश्व खाद्य दिवस पर एनडीआरआई द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में संस्थान के डेयरी प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों ने एक स्टाल लगाकर पीले रंग का हल्दी वाला घी (करक्यूमिन फोर्टिफाइड घी) प्रदर्शित किया है। पीएचडी के छात्र हिमांशु कुमार सिंह व मानस सरकार ने बताया कि ये अनुसंधान निदेशक डॉ.धीर सिंह के मार्गदर्शन में डेयरी प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ.डीएन यादव के प्रयोगशाला में किया गया है।
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छात्रों ने बताया कि हल्दी में एक विशेष प्रकार का रसायन होता है, जिसे करक्यूमिन कहा जाता है। ये तत्व एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जिसे आमतौर पर शरीर की कोशिकाओं को खराब और नष्ट होने से बचाने में उपयोग किया जाता है। करक्यूमिन को दर्द से राहत देने, कोलेस्ट्राल कम करने व दिल संबंधी रोगों को रोकने में सहायक माना जाता है। इसी करक्यूमिन तत्व को शुद्ध देसी घी में उपयोग करके ये हल्दी वाला घी तैयार किया गया है। एंटी ऑक्सीडेंट होने के साथ साथ ये एंटी बैक्टीरियल भी है, जिसका लाभ ये है कि इसका ये गुण घी की गुणवत्ता को प्रभावित होने से रोकता है, जिससे ये घी नौ माह से एक साल तक भी रखा रहने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती, जबकि अन्य घी में छह माह के बाद उसकी गुणवत्ता में अंतर आने लगता है।
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- सदियों से चोट लगने या फिर शरीर में कहीं दर्द होने पर दूध में हल्दी मिलाकर पीने की सलाह देते आ रहे हैं, इसे देखते हुए अब एनडीआरआई ने हल्दी वाला घी तैयार किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये हल्दी वाले दूध की तरह ही शरीर में दर्द से छुटकारा दिलाने में भी सहायक होगा। इसी पहले संस्थान ने कुछ समय पहले ही हृदयरोगियों को ध्यान में रखते हुए अर्जुना घी की खास तकनीक तैयार की थी। जिसकी तकनीक एनडीआरआई से लेकर एक निजी कंपनी ने इसे बाजार में भी उतार दिया है। इसमें एक विशेष तकनीक के जरिये देसी घी में अर्जुन की छाल को मिलाया गया है, जो उच्च रक्तचाप व अन्य हृदयरोगों में काफी लाभकारी है।
(फोटो-1002)
-एनडीआरआई ने पहले अर्जुन की छाल वाला देसी घी तैयार किया था, जिसकी तकनीक को एक निजी कंपनी को हस्तांतरित किया है, जिससे अब ये घी जन सामान्य को उपलब्ध होने लगा है, अब संस्थान काफी समय से हल्दी वाले घी पर काम कर रहा था। अब ये तकनीक तैयार कर ली है, इससे घी भी बना लिया गया है। कोई क्लीनिकल ट्रायल तो नहीं हुआ लेकिन पशुओं से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसके गुणों को परखा गया है। शरीर में बनने वाले फ्री रेडिशन कभी अधिक मात्रा में बन जाते हैं तो नुकसान करने लगते हैं, हल्दी वाला घी इनकी अधिकता को रोकने में सहायक है। ये तकनीक भी शीघ्र ही किसी न किसी कंपनी या उद्यमी को हस्तांतरित की जाएगी। इसके बाद ये हल्दी वाला घी जन सामान्य को उपलब्ध हो जाएगा।
-डॉ.धीर सिंह, निदेशक एनडीआरआई करनाल।