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जमाबंदी पर लोन की जानकारी हटाई, तहसीलदार, पटवारी सहित पांच पर केस
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। लोन पास होने पर जमाबंदी से लोन की जानकारी हटाने पर बैंक मैनेजर ने तहसीलदार, पटवारी व वकील सहित पांच लोगों पर मामला दर्ज कराया है। तरावड़ी थाना पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी बेटा मांगा सिंह, मां गुरदीप कौर निवासी बालू करनाल, वकील बृजेश शर्मा, पटवारी गांव बालू राजीव लखनपाल और तत्कालीन तहसीलदार पर मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ब्रांच सौकंड़ा के मैनेजर दीपक कुमार ने बताया कि आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर के पास गांव बालू में 90 कनाल 14 मरले भूमि खेवट नंबर 0.205, खतौनी नंबर 390, जमाबंदी वर्ष 2015-2016 कुल रकबा 373 कनाल 15 मरले में से मालिक हैं। 23 मार्च 2017 को आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर ने अपने नाम से इस भूमि पर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक से संयुक्त लोन के लिए आवेदन किया था।
इसके बाद आरोपी वकील बृजेश ने आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर की भूमि के पिछले 13 वर्षों के कागजात का आंकलन करके 31 मार्च 2017 को लीगल सर्च रिपोर्ट बनाकर बैंक में जमा करवाई। जिसके आधार पर मनेजर ने सब रजिस्ट्रार के पास लोन चढ़वाने के लिए संबंधित कागजात भेज दिए। उसके बाद तहसीलदार ने हल्का पटवारी से आरोपियों की जमीन के कागजात पर लोन चढ़वाया और आरोपी तहसीलदार ने कागजात बैंक के पास भेज दिए। इसके बाद बैंक ने आरोपियों को जमीन पर बरूये रपट नंबर 301, राशी 32,32,000 रुपये दर्ज हो गया और उसके आधार पर बैंक ने दोनों आरोपियों को 17 अप्रैल 2017 को लोन जारी कर दिया।
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लोन मिलने के बाद आरोपी मां-बेटे ने लोन की किस्तें नहीं भरी तो बैंक से डिफाल्टर हो गए। 17 मार्च 2020 को बैंक ने दोनों आरोपियों की जमीन की जमाबंदी 2015-2016 की निकलवाई और पाया कि उस जमाबंदी में मांगा सिंह के नाम पंजाब एंड सिंध बैंक जीटी रोड करनाल से 12 लाख रुपये का 19 अक्तूबर 2016 व एसबीओपी बैंक, एनडीआरआई करनाल से 13 लाख रुपये छह जून 2016 तथा गुरदीप कौर के नाम से 11,50,000 का पंजाब एंड सिंध बैंक, जीटी रोड करनाल 12 जनवरी 2017 तथा 13 लाख रुपये का एसबीओपी बैंक करनाल से छह जून 2016 का लोन दर्ज पाया गया।
उन्होंने आरोपी पटवारी से संपर्क किया तो बताया कि 11 अप्रैल 2017 की जमाबंदी में उनके बैंक का लोन दर्ज था लेकिन 17 मार्च 2020 को जब दोबारा जमाबंदी निकलवाई तो उनके बैंक का लोन न होकर अन्य दो बैंक का लोन दस्तावेज में चढ़ा था। जबकि दस्तावेजों पर 11 अप्रैल 2017 में हल्का पटवारी व तहसीलदार के हस्ताक्षर हैं तो हल्का पटवारी ने कहा कि किसी कारणवश रह गया होगा अब दोबारा से दर्ज कर दूंगा। उसके बाद सात मई 2020 की जमाबंदी वर्ष 2015-2016 में अन्य बैंकों के साथ उनके बैंक का लोन दर्ज होकर आ गया। इन सभी आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा किया। तरावड़ी थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी दस्तावेज लिए जाएंगे।
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करनाल। लोन पास होने पर जमाबंदी से लोन की जानकारी हटाने पर बैंक मैनेजर ने तहसीलदार, पटवारी व वकील सहित पांच लोगों पर मामला दर्ज कराया है। तरावड़ी थाना पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी बेटा मांगा सिंह, मां गुरदीप कौर निवासी बालू करनाल, वकील बृजेश शर्मा, पटवारी गांव बालू राजीव लखनपाल और तत्कालीन तहसीलदार पर मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ब्रांच सौकंड़ा के मैनेजर दीपक कुमार ने बताया कि आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर के पास गांव बालू में 90 कनाल 14 मरले भूमि खेवट नंबर 0.205, खतौनी नंबर 390, जमाबंदी वर्ष 2015-2016 कुल रकबा 373 कनाल 15 मरले में से मालिक हैं। 23 मार्च 2017 को आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर ने अपने नाम से इस भूमि पर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक से संयुक्त लोन के लिए आवेदन किया था।
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इसके बाद आरोपी वकील बृजेश ने आरोपी मांगा सिंह व गुरदीप कौर की भूमि के पिछले 13 वर्षों के कागजात का आंकलन करके 31 मार्च 2017 को लीगल सर्च रिपोर्ट बनाकर बैंक में जमा करवाई। जिसके आधार पर मनेजर ने सब रजिस्ट्रार के पास लोन चढ़वाने के लिए संबंधित कागजात भेज दिए। उसके बाद तहसीलदार ने हल्का पटवारी से आरोपियों की जमीन के कागजात पर लोन चढ़वाया और आरोपी तहसीलदार ने कागजात बैंक के पास भेज दिए। इसके बाद बैंक ने आरोपियों को जमीन पर बरूये रपट नंबर 301, राशी 32,32,000 रुपये दर्ज हो गया और उसके आधार पर बैंक ने दोनों आरोपियों को 17 अप्रैल 2017 को लोन जारी कर दिया।
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लोन मिलने के बाद आरोपी मां-बेटे ने लोन की किस्तें नहीं भरी तो बैंक से डिफाल्टर हो गए। 17 मार्च 2020 को बैंक ने दोनों आरोपियों की जमीन की जमाबंदी 2015-2016 की निकलवाई और पाया कि उस जमाबंदी में मांगा सिंह के नाम पंजाब एंड सिंध बैंक जीटी रोड करनाल से 12 लाख रुपये का 19 अक्तूबर 2016 व एसबीओपी बैंक, एनडीआरआई करनाल से 13 लाख रुपये छह जून 2016 तथा गुरदीप कौर के नाम से 11,50,000 का पंजाब एंड सिंध बैंक, जीटी रोड करनाल 12 जनवरी 2017 तथा 13 लाख रुपये का एसबीओपी बैंक करनाल से छह जून 2016 का लोन दर्ज पाया गया।
उन्होंने आरोपी पटवारी से संपर्क किया तो बताया कि 11 अप्रैल 2017 की जमाबंदी में उनके बैंक का लोन दर्ज था लेकिन 17 मार्च 2020 को जब दोबारा जमाबंदी निकलवाई तो उनके बैंक का लोन न होकर अन्य दो बैंक का लोन दस्तावेज में चढ़ा था। जबकि दस्तावेजों पर 11 अप्रैल 2017 में हल्का पटवारी व तहसीलदार के हस्ताक्षर हैं तो हल्का पटवारी ने कहा कि किसी कारणवश रह गया होगा अब दोबारा से दर्ज कर दूंगा। उसके बाद सात मई 2020 की जमाबंदी वर्ष 2015-2016 में अन्य बैंकों के साथ उनके बैंक का लोन दर्ज होकर आ गया। इन सभी आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा किया। तरावड़ी थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी दस्तावेज लिए जाएंगे।