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हरियाणा के किसानों के लिए पंजीकरण शुरू
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05.. नई अनाज मंडी में बैठक करते हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य। संवाद
करनाल। भले ही अभी धान की फसल मंडियों में आने में समय है लेकिन हरियाणा सरकार ने एमएसपी पर धान विक्रय के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का पंजीकरण शुरू कर दिया है। हालांकि यह पंजीकरण सिर्फ हरियाणा के किसानों के लिए ही खोला गया है। करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने शनिवार को बैठक कर सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब राज्यों के किसानों की फसल पंजीकरण के लिए पोर्टल नहीं खोले जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने पोर्टल को सभी किसानों के लिए खोलने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे में सीमावर्ती राज्यों के किसान पिछड़ सकते हैं।
करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक जिला प्रधान रजनीश चौधरी के प्रतिष्ठान पर हुई। आढ़तियों ने कहा कि सभी जानते हैं कि हरियाणा की सीमा से सटे कई राज्यों के लाखों किसान हर सीजन में धान बेचने के लिए हरियाणा राज्य की मंडियों में आते हैं। वे पंजीकरण भी कराते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस बार अभी सिर्फ हरियाणा राज्य के निवासी किसानों की फसल के पंजीकरण के लिए पोर्टल खोला है।
ऐसे में सीमावर्ती राज्यों के किसान पिछड़ जाएंगे, यदि सरकार ने अधिक देरी की तो वे अपने राज्यों में ही औने दामों पर धान बेचने को विवश हो जाएगा। इसका नुकसान हरियाणा प्रदेश के आढ़तियों को भी होगा। प्रधान रजनीश चौधरी ने मांग की कि सरकार को तत्काल प्रभाव से सीमावर्ती राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल खोलना चाहिए। सचिव राजेश अरोड़ा ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि हैफेड ने गोडाउन पर मंडियों से भेजे गए गेहूं को कम बताकर शार्टेज के नाम पर 2360 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 25 करोड़ रुपये की कटौती कर ली है, जबकि गेहूं का मूल्य 1975 रुपये था।
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इस धनराशि को तत्काल आढ़तियों को वापस किया जाना चाहिए। राजकुमार सिंगला ने कहा कि 2020-21 गेहूं के सीजन में जिन आढ़तियों के खातों में विलंब से भुगतान पहुंचा। उसके भुगतान आढ़तियों को किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान जिले सिंह कुंडू, राज कुमार सिंगला, रघुवीर सिंह खारा, राकेश चौधरी, मुकेश सिंगला, चंद्रशेखर टक्कर,महेेंद्र गर्ग, रोबिन नरवाल, विनोद सिंगला, अमित चौधरी, निर्मल प्रकाश आदि शामिल रहे।
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करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक जिला प्रधान रजनीश चौधरी के प्रतिष्ठान पर हुई। आढ़तियों ने कहा कि सभी जानते हैं कि हरियाणा की सीमा से सटे कई राज्यों के लाखों किसान हर सीजन में धान बेचने के लिए हरियाणा राज्य की मंडियों में आते हैं। वे पंजीकरण भी कराते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस बार अभी सिर्फ हरियाणा राज्य के निवासी किसानों की फसल के पंजीकरण के लिए पोर्टल खोला है।
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ऐसे में सीमावर्ती राज्यों के किसान पिछड़ जाएंगे, यदि सरकार ने अधिक देरी की तो वे अपने राज्यों में ही औने दामों पर धान बेचने को विवश हो जाएगा। इसका नुकसान हरियाणा प्रदेश के आढ़तियों को भी होगा। प्रधान रजनीश चौधरी ने मांग की कि सरकार को तत्काल प्रभाव से सीमावर्ती राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल खोलना चाहिए। सचिव राजेश अरोड़ा ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि हैफेड ने गोडाउन पर मंडियों से भेजे गए गेहूं को कम बताकर शार्टेज के नाम पर 2360 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 25 करोड़ रुपये की कटौती कर ली है, जबकि गेहूं का मूल्य 1975 रुपये था।
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इस धनराशि को तत्काल आढ़तियों को वापस किया जाना चाहिए। राजकुमार सिंगला ने कहा कि 2020-21 गेहूं के सीजन में जिन आढ़तियों के खातों में विलंब से भुगतान पहुंचा। उसके भुगतान आढ़तियों को किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान जिले सिंह कुंडू, राज कुमार सिंगला, रघुवीर सिंह खारा, राकेश चौधरी, मुकेश सिंगला, चंद्रशेखर टक्कर,महेेंद्र गर्ग, रोबिन नरवाल, विनोद सिंगला, अमित चौधरी, निर्मल प्रकाश आदि शामिल रहे।