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Karnal News: दुग्ध उत्पादन लक्ष्य में बना रिकाॅर्ड
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला एवं एग्री एक्सपो-2025 सालभर की उपलब्धता के प्रदर्शन और नए संकल्पों के साथ संपन्न हो गया।
इसमें एक होलेस्ट्रीन फ्रीजन (एचएफ) गाय ने 87.7 लीटर दूध देकर अपने ही पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ा तो मुर्रा भैंस ने 28 लीटर दूध देकर दुग्ध उत्पादन की नई इबारत पेश की।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के 113 प्रतिभागियों को 8.25 लाख रुपये के नकद पुरस्कार सहित कई पुरस्कार दिए गए। नडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ.धीर सिंह ने कहा कि दुग्ध उत्पादन के वर्ष 2030 के लक्ष्य को अभी ही पा लिया है, 2047 के लक्ष्य 600 मिलियन टन को भी आसानी से पा लिया जाएगा।
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समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे संस्थान के अनुसंधान सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व निदेशक डॉ. नगेंद्र शर्मा ने कहा कि दूध भारत की ग्रामीण सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग है।
उन्होंने मंथन फिल्म का उद्धरण करते हुए ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की ओर उपस्थित कृषकों एवं पशुपालकों का ध्यान आकर्षित किया।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कृषि विविधीकरण पर चर्चा करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा के बाद अब किसानों की आय सुरक्षा पर कार्य करने की आवश्यकता है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव के मद्देनजर भी अनुसंधान पर कार्य करना आवश्यक है। आईसीएआर के जीबी के सदस्य पद्मश्री कंवल सिंह ने किसानों व पशुपालकों का आह्वान किया कि वह यहां से प्राप्त जानकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में फैलाएं।
संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने डेयरी मेले का संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए किसानोपयोगी गोष्ठियों के अलावा मेले में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर स्कूली बच्चों के लिए क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
पशुधन बीमा और स्टार्टअप विषयों पर जानकारी दी गई। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य तेग सिंह राणा, रौनक सिंह, राम सिंह, आयोजन सचिव डॉ. गोपाल सांखला मौजूद रहे।
इस मौके पर डेयरी मेले में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला एवं एग्री एक्सपो-2025 सालभर की उपलब्धता के प्रदर्शन और नए संकल्पों के साथ संपन्न हो गया।
इसमें एक होलेस्ट्रीन फ्रीजन (एचएफ) गाय ने 87.7 लीटर दूध देकर अपने ही पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ा तो मुर्रा भैंस ने 28 लीटर दूध देकर दुग्ध उत्पादन की नई इबारत पेश की।
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विभिन्न प्रतियोगिताओं के 113 प्रतिभागियों को 8.25 लाख रुपये के नकद पुरस्कार सहित कई पुरस्कार दिए गए। नडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ.धीर सिंह ने कहा कि दुग्ध उत्पादन के वर्ष 2030 के लक्ष्य को अभी ही पा लिया है, 2047 के लक्ष्य 600 मिलियन टन को भी आसानी से पा लिया जाएगा।
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समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे संस्थान के अनुसंधान सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व निदेशक डॉ. नगेंद्र शर्मा ने कहा कि दूध भारत की ग्रामीण सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग है।
उन्होंने मंथन फिल्म का उद्धरण करते हुए ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की ओर उपस्थित कृषकों एवं पशुपालकों का ध्यान आकर्षित किया।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कृषि विविधीकरण पर चर्चा करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा के बाद अब किसानों की आय सुरक्षा पर कार्य करने की आवश्यकता है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव के मद्देनजर भी अनुसंधान पर कार्य करना आवश्यक है। आईसीएआर के जीबी के सदस्य पद्मश्री कंवल सिंह ने किसानों व पशुपालकों का आह्वान किया कि वह यहां से प्राप्त जानकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में फैलाएं।
संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने डेयरी मेले का संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए किसानोपयोगी गोष्ठियों के अलावा मेले में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर स्कूली बच्चों के लिए क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
पशुधन बीमा और स्टार्टअप विषयों पर जानकारी दी गई। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य तेग सिंह राणा, रौनक सिंह, राम सिंह, आयोजन सचिव डॉ. गोपाल सांखला मौजूद रहे।
इस मौके पर डेयरी मेले में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।